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किसानों की समस्याओं का समाधान करे सरकार : हुड्डा
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कहा-अगर सरकार के पास उचित मात्रा में खाद है तो किसानों को क्यों नहीं मिल पा रही
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि भाजपा का मकसद किसानों को घाटे में धकेलना है। यही वजह है कि 10 साल से सत्ता में होने के बावजूद भाजपा कभी भी किसानों को समय पर पूरी खाद मुहैया नहीं करवा पाई। जब से भाजपा सत्ता में आई है, उसने किसानों को मंडी की कतारों में खड़ा कर रखा है। जब फसल बेचने का वक्त आता है, तब भी किसानों को कई-कई दिन इंतजार करवाया जाता है, लेकिन उन्हें फसल पर एमएसपी नहीं दिया जाता। वर्तमान में सरकार जानबूझकर खाद की किल्लत पैदा कर रही है। अब सरकार हनीमून पीरियड से बाहर निकले और किसानों की समस्याओं का समाधान करे।
हुड्डा ने कहा कि प्रदेश सरकार का कहना है कि खाद की कोई कमी नहीं है व उसके पास उचित मात्रा में खाद है। जबकि किसान एक-एक बैग खाद के लिए तरस रहे हैं। भारी भीड़ और लंबी कतारों में फंसे किसान धक्का-मुक्की, हाथापाई और पुलिसिया लाठीचार्ज के शिकार हो रहे हैं। सरकार को बताना चाहिए कि अगर उसके पास उचित मात्रा में खाद है तो वह किसानों को क्यों नहीं मिल पा रही। हुड्डा का कहना है कि सच्चाई यह है कि हर वर्ष अक्तूबर-नवंबर में किसानों को लगभग 2.8 लाख टन डीएपी की जरूरत होती है। लेकिन इस बार अब तक किसानों को सिर्फ 1.20 लाख टन डीएपी खाद ही मिल पाई है। सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि वह जानबूझकर खाद की किल्लत पैदा कर रही है। नैनो डीएपी की बिक्री बढ़ाने के लिए परंपरागत डीएपी की किल्लत खड़ी की जा रही है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि भाजपा का मकसद किसानों को घाटे में धकेलना है। यही वजह है कि 10 साल से सत्ता में होने के बावजूद भाजपा कभी भी किसानों को समय पर पूरी खाद मुहैया नहीं करवा पाई। जब से भाजपा सत्ता में आई है, उसने किसानों को मंडी की कतारों में खड़ा कर रखा है। जब फसल बेचने का वक्त आता है, तब भी किसानों को कई-कई दिन इंतजार करवाया जाता है, लेकिन उन्हें फसल पर एमएसपी नहीं दिया जाता। वर्तमान में सरकार जानबूझकर खाद की किल्लत पैदा कर रही है। अब सरकार हनीमून पीरियड से बाहर निकले और किसानों की समस्याओं का समाधान करे।
हुड्डा ने कहा कि प्रदेश सरकार का कहना है कि खाद की कोई कमी नहीं है व उसके पास उचित मात्रा में खाद है। जबकि किसान एक-एक बैग खाद के लिए तरस रहे हैं। भारी भीड़ और लंबी कतारों में फंसे किसान धक्का-मुक्की, हाथापाई और पुलिसिया लाठीचार्ज के शिकार हो रहे हैं। सरकार को बताना चाहिए कि अगर उसके पास उचित मात्रा में खाद है तो वह किसानों को क्यों नहीं मिल पा रही। हुड्डा का कहना है कि सच्चाई यह है कि हर वर्ष अक्तूबर-नवंबर में किसानों को लगभग 2.8 लाख टन डीएपी की जरूरत होती है। लेकिन इस बार अब तक किसानों को सिर्फ 1.20 लाख टन डीएपी खाद ही मिल पाई है। सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि वह जानबूझकर खाद की किल्लत पैदा कर रही है। नैनो डीएपी की बिक्री बढ़ाने के लिए परंपरागत डीएपी की किल्लत खड़ी की जा रही है।
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