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चंडीगढ़ में 8 साल से 60% फर्मों ने नहीं भरा टैक्स, नोटिस जारी और पेनाल्टी लगाने की तैयारी
Mon, 22 Jun 2020 10:22 AM IST
खुशबू गोयल
अभिषेक वाजपेयी, चंडीगढ़
अभिषेक वाजपेयी, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 22 Jun 2020 10:22 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
यूटी में वित्तीय वर्ष 2012-13 के सेल्स टैक्स के पेंडिंग केसों को सुलझाने के लिए वस्तु एवं सेवाकर विभाग (यूटी) ने वेबसाइट पर नोटिस अपलोड कर दिए हैं। सी-फार्म न जमा करा पाने के कारण विभाग में पंजीकृत 60 प्रतिशत फर्मों को नोटिस जारी किए गए हैं। यदि जल्द ही इन फर्मों ने सी फार्म या अन्य जरूरी दस्तावेज जमा नहीं कराए तो उनके खिलाफ पेनाल्टी लगाने की कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि वित्तीय वर्ष 2012-13 में दूसरे राज्यों में फर्मों के द्वारा की गई बिक्री के लिए सी-फार्म जमा करने की अंतिम तिथि 31 मार्च 2020 थी।
यूटी के वस्तु एवं सेवाकर विभाग ने समयावधि समाप्त होने के बाद सेल्स टैक्स के पेंडिंग केसों को सुलझाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। आठ साल बाद भी सी फार्म जमा नहीं करने वाली लगभग 60 फीसदी फर्मों को विभाग की वेबसाइट पर नोटिस अपलोड कर दिए गए हैं। विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि जल्द ही यदि फर्मों के द्वारा मांगे गए सी फार्म या अन्य जरूरी दस्तावेज जमा नहीं कराए तो उनके खिलाफ पेनाल्टी लगाने की कार्रवाई की जाएगी।
कुल बिक्री पर 11 प्रतिशत टैक्स का प्रावधान
दूसरे राज्यों में फर्मों के द्वारा बिक्री किए गए सामान पर सी फार्म लेना और उसे विभाग में जमा कराना अनिवार्य है। यदि किसी फर्म के द्वारा सी फार्म नहीं जमा किया जाता है तो उसे 11 प्रतिशत टैक्स का भुगतान विभाग में जमा करना पड़ता है। इस पर ब्याज भी विभाग के द्वारा लगाया जाता है। आपको बता दें कि माल बिक्री के दौरान एक प्रतिशत टैक्स के रूप में भी जमा कराया जाता है।
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यूटी के वस्तु एवं सेवाकर विभाग ने समयावधि समाप्त होने के बाद सेल्स टैक्स के पेंडिंग केसों को सुलझाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। आठ साल बाद भी सी फार्म जमा नहीं करने वाली लगभग 60 फीसदी फर्मों को विभाग की वेबसाइट पर नोटिस अपलोड कर दिए गए हैं। विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि जल्द ही यदि फर्मों के द्वारा मांगे गए सी फार्म या अन्य जरूरी दस्तावेज जमा नहीं कराए तो उनके खिलाफ पेनाल्टी लगाने की कार्रवाई की जाएगी।
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कुल बिक्री पर 11 प्रतिशत टैक्स का प्रावधान
दूसरे राज्यों में फर्मों के द्वारा बिक्री किए गए सामान पर सी फार्म लेना और उसे विभाग में जमा कराना अनिवार्य है। यदि किसी फर्म के द्वारा सी फार्म नहीं जमा किया जाता है तो उसे 11 प्रतिशत टैक्स का भुगतान विभाग में जमा करना पड़ता है। इस पर ब्याज भी विभाग के द्वारा लगाया जाता है। आपको बता दें कि माल बिक्री के दौरान एक प्रतिशत टैक्स के रूप में भी जमा कराया जाता है।
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1996-97 में हो चुका है डीम्ड असेसमेंट
प्रशासन द्वारा ऐसा ही डीम्ड असेसमेंट वर्ष 1996-97 के दौरान किया गया था, जिसमें प्रति एक लाख रुपये की सेल पर 100 रुपये टैक्स लिए जाने का प्रावधान किया गया था। चंडीगढ़ के व्यापारी नेताओं ने ऐसी ही स्कीम दोबारा फिर से लाकर व्यापारियों को राहत दिए जाने की मांग की है।
दूसरे राज्यों की तर्ज पर हो व्यवस्था
सेल्स टैक्स के पेंडिंग केसों को लेकर गुजरात, हिमाचल प्रदेश में व्यापारियों को सरकार ने राहत दी है। एक लाख के बकाए पर मात्र 100 रुपया टैक्स का प्रावधान कर दिया गया है। चंडीगढ़ में भी व्यापारियों को राहत देने के लिए यह व्यवस्था विभाग को लागू करनी चाहिए।
- नरेश कुमार, अध्यक्ष, चंडीगढ़ फर्नीचर एसोसिएशन
डीम्ड असेसमेंट की व्यापारियों ने उठाई मांग
सेल्स टैक्स और वैट समाप्त होने के बाद अब टैक्स के रूप में जीएसटी का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2012-13 के पेंडिंग केसों के लिए डीम्ड असेसमेंट की आवश्यकता है। व्यापार मंडल की ओर से प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्री को पत्र भेजा गया है, जिसमें पेंडिंग केसों का डीम्ड असेसमेंट कर केसों को समाप्त किया जाए, जिससे व्यापारियों को राहत मिल सके।
- कैलाश चंद जैन, व्यापारी नेता, चंडीगढ़
दूसरे राज्यों की तर्ज पर हो व्यवस्था
सेल्स टैक्स के पेंडिंग केसों को लेकर गुजरात, हिमाचल प्रदेश में व्यापारियों को सरकार ने राहत दी है। एक लाख के बकाए पर मात्र 100 रुपया टैक्स का प्रावधान कर दिया गया है। चंडीगढ़ में भी व्यापारियों को राहत देने के लिए यह व्यवस्था विभाग को लागू करनी चाहिए।
- नरेश कुमार, अध्यक्ष, चंडीगढ़ फर्नीचर एसोसिएशन
डीम्ड असेसमेंट की व्यापारियों ने उठाई मांग
सेल्स टैक्स और वैट समाप्त होने के बाद अब टैक्स के रूप में जीएसटी का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2012-13 के पेंडिंग केसों के लिए डीम्ड असेसमेंट की आवश्यकता है। व्यापार मंडल की ओर से प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्री को पत्र भेजा गया है, जिसमें पेंडिंग केसों का डीम्ड असेसमेंट कर केसों को समाप्त किया जाए, जिससे व्यापारियों को राहत मिल सके।
- कैलाश चंद जैन, व्यापारी नेता, चंडीगढ़