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Chandigarh News: जीएमचीएच की मोबाइल मेमोग्राफी वैन की मशीन खराब, मरीज परेशान
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चंडीगढ़। पीजीआई के मैमोग्राफी मोबाइल वैन के कंडम होने के बाद अब जीएमसीएच-32 की मैमोग्राफी मोबाइल वैन की मशीन भी खराब हो गई है। स्थिति यह है की जांच के लिए आने वाली महिलाओं को निराश लौटना पड़ रहा है। वहीं, बीमारी की गंभीरता के डर से महिलाएं महज 100 से 250 रुपये तक की होने वाली जांच के लिए 3000 तक खर्च करने को मजबूर हैं। वही जीएमसीएच के डायरेक्टर प्रिंसिपल प्रो. एके अत्रि का कहना है कि जल्द ही मशीन ठीक करवा दी जाएगी। बता दें कि भारत सरकार ने जीएमसीएच-32 को मोबाइल वैन के साथ मैमोग्राफी मशीन उपलब्ध कराई थी। अस्पताल के अंदर कोई अन्य मैमोग्राफी मशीन नहीं है। शुरुआती दौर में यह वैन स्वास्थ्य एवं आरोग्य केंद्रों पर घूमती थी, जहां क्षेत्र की महिलाओं की जांच की जाती थी। सूत्रों से पता चला है कि अब अस्पताल प्रशासन ने आउटरीच सेवाओं के लिए वैन भेजना बंद कर दिया है। यह वैन अस्पताल में ही एक जगह खड़ी रहती है और इससे मैमोग्राफी की जाती है। सामान्य दिनों में मैमोग्राफी के लिए प्रतिदिन 20 पंजीकरण होते हैं। ऐसे में मशीन खराब होने से जांच ठप हो जाने के कारण काफी केस लंबित हो गए हैं।
पीजीआई की वैन हो गई कंडम : गौरतलब है कि पीजीआई में आशा ज्योति वैन-महिलाओं के लिए मोबाइल कैंसर वैन थी, जिसे कुछ साल पहले फंड की कमी के कारण बंद कर दिया गया था। यह वैन सेक्टरों और आसपास के ग्रामीण इलाकों में जाकर घर-घर जाकर कैंसर की जांच करती थी। वहीं, अब जीएमसीएच-32 की मोबाइल वैन खराब होने से महिलाओं की परेशानी और बढ़ गई है, क्योंकि पीजीआई में मरीज का दबाव होने के करण जांच के लिए लंबी डेट दी जा रही है। वहीं, विशेषज्ञों की कमी के कारण जीएमएसएच में भी सीमित संख्या में ही जांच हो रही है।
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पीजीआई की वैन हो गई कंडम : गौरतलब है कि पीजीआई में आशा ज्योति वैन-महिलाओं के लिए मोबाइल कैंसर वैन थी, जिसे कुछ साल पहले फंड की कमी के कारण बंद कर दिया गया था। यह वैन सेक्टरों और आसपास के ग्रामीण इलाकों में जाकर घर-घर जाकर कैंसर की जांच करती थी। वहीं, अब जीएमसीएच-32 की मोबाइल वैन खराब होने से महिलाओं की परेशानी और बढ़ गई है, क्योंकि पीजीआई में मरीज का दबाव होने के करण जांच के लिए लंबी डेट दी जा रही है। वहीं, विशेषज्ञों की कमी के कारण जीएमएसएच में भी सीमित संख्या में ही जांच हो रही है।
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