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तनाव और थकान दूर करने का सबसे अच्छा विकल्प बागवानी

Thu, 13 May 2021 02:01 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 13 May 2021 02:01 AM IST
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Gardening is the best option to relieve stress and fatigue
चंडीगढ़। मानसिक तनाव और थकान से उबरने के लिए बागवानी से अच्छा कोई विकल्प नहीं है। शुद्ध हवा मिलने के अलावा सकारात्मक विचार का संचार भी होता है। यह कहना है सेक्टर- 32 निवासी तिलक राज का। तिलक राज जीएमसीएच- 32 में ड्राइवर के तौर पर कार्यरत हैं।
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उन्होंने बताया कि 22 साल से वह चंडीगढ़ में नौकरी कर रहे हैं, लेकिन टाइप- 1 के मकान में जगह कम होने के कारण बागवानी का शौक कभी पूरा नहीं कर पाए। पिछले साल उन्हें दूसरा सरकारी मकान मिला, तब उन्होंने छत पर किचन गार्डन की शुरुआत की। उनके बगीचे में लगभग 7 प्रकार की सब्जियां और 10 प्रकार के फलदार पौधे हैं। लगभग छह महीने से उन्होंने कोई सब्जी बाहर से नहीं खरीदी। उन्हें देखकर उनका बेटा शिवम चौहान भी बागवानी में सहायता करता है। तिलक राज ने बताया कि वह अंबाला जिले के एक गांव के रहने वाले हैं। गांव में उनके काफी खेत हैं, लेकिन नौकरी और जगह की कमी के चलते वह अपना शौक पूरा नहीं कर पाए। अभी मौका मिलने पर वह इसे गंवाना नहीं चाहते।
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पड़ोसियों के लिए तैयार किए पौधे
उन्होंने बताया कि देखादेखी पड़ोसियों ने भी फल और सब्जियों के पौधे लगा लिए हैं। उन्होंने नए पौधे तैयार कर पड़ोसियों को भी बांटे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी क्वार्टरों में थोड़ी जगह में ही लोग सब्जियां फल लगाकर बागवानी करने का प्रयास कर रहे हैं, यह एक अच्छी शुरुआत है।
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फाउंटेन ने बढ़ाई बगीचे की सुंदरता
तिलक राज ने थर्माकोल की कटिंग कर दो बेडशीट को सीमेंट में भिगोकर एक फाउंटेन तैयार किया है, जिसमें से पानी बहता रहता है। उन्होंने बताया कि इससे बगीचे की सुंदरता और बढ़ गई है। कई लोग इस फाउंटेन को खरीदने के लिए तैयार हो गए हैं। यह देखने में बहुत सुंदर लगता है। सुबह के समय यहां पर योग करते समय गिरते पानी की आवाज एक अलग ही सुकून देती है। यह आवाज पहाड़ों में होने का अहसास दिलाती है।
लहसुन, प्याज, नीम, लाल मिर्च से बनाते हैं घोल
उन्होंने बताया कि वह अपने पौधों को काली, हरी और सफेद मक्खी से बचाने के लिए उन पर एक घोल का छिड़काव करते हैं। यह घोल चार महीने में तैयार होता है। वह लहसुन, प्याज, नीम के पत्ते और लाल मिर्च पाउडर को पानी में डालकर 4 महीने तक ढक कर रख देते हैं। इस घोल का छिड़काव करने से पौधों का चींटी, मक्खी और कीड़े तीनों से बचाव किया जा सकता है।

रसोई की व्यर्थ सब्जियों से करते हैं खाद्य तैयार
उन्होंने बताया कि अपने घर में दो बड़े बॉक्स रखे हुए हैं। एक बॉक्स रसोई की व्यर्थ सब्जियों, पौधों के पीले पत्तों और छिलकों से दो महीने में भर जाता है। उसे ढक कर रख दिया जाता है। लगभग तीन महीने बाद जब यह खाद तैयार होती है तो इससे पौधों को काफी लाभ मिलता है। तिलक राज का कहना है कि यह खाद देसी खाद की तरह होती है।
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