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Chandigarh News: संपत्ति कर के बिल से अलग होगा कचरा संग्रहण शुल्क, दरों की भी होगी समीक्षा
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चंडीगढ़। नगर निगम ने पहली बार संपत्ति कर के बिल में कचरा संग्रहण शुल्क लगाकर भेजा, जिसे देख उद्योगपति व कारोबारियों के होश उड़ गए। कचरा संग्रहण शुल्क, संपत्ति कर से तीन गुना तक अधिक लगा है। इसे लेकर मंगलवार को मेयर अनूप गुप्ता की अध्यक्षता में सेक्टर-17 स्थित चंडीगढ़ नगर निगम कार्यालय में उद्योगपतियों के एक ज्वाइंट फोरम, चंडीगढ़ व्यापार मंडल और नगर निगम की आयुक्त आनिंदिता मित्रा व अन्य अधिकारियों की बैठक हुई। बैठक में उद्योगपतियों ने अपनी-अपनी समस्याएं बताईं, जिसके बाद कई फैसले लिए गए। इसमें सबसे अहम फैसला यह है कि कचरा शुल्क को संपत्ति कर के बिल से अलग किया जाएगा।उद्योगपतियों के ज्वाइंट फोरम ने बताया कि नगर निगम के अधिकारियों ने उन्हें बताया कि कचरा शुल्क को संपत्ति कर के बिल में जोड़कर क्यों भेजा गया और किस आधार पर यह रेट तय किए गए हैं। इस पर उद्योगपतियों ने सवाल उठाए। बताया कि जो औद्योगिक कचरा होता है, उसे फेंका नहीं जाता बल्कि बेचा जाता है। जैसे कि किसी फैक्ट्री में अगर लोहे का काम होता है तो उसका कचरा भी लोहा ही होता है, जिसे स्क्रैप डीलर्स को बेच दिया जाता है।
नगर निगम की गाड़ी में फैक्ट्रियों से कोई कचरा नहीं डाला जाता तो नगर निगम उनसे यह भारी भरकम शुल्क क्यों वसूल रहा है। कुछ उद्योगपतियों की तरफ से कहा गया कि अगर निगम ने शुल्क लेने भी हैं तो दरों का एक आधार होना चाहिए और दरें भी कम होनी चाहिए। साथ ही मांग रखी गई कि कचरा संग्रहण शुल्क को संपत्ति कर से तुरंत अलग किया जाए। बता दें कि औद्योगिक क्षेत्र के प्लॉट मालिकों को भेजे गए कचरा संग्रहण शुल्क, संपत्ति कर से तीन गुना तक ज्यादा हैं। व्यावसायिक श्रेणी में कुछ एससीओ को भेजा गया कचरा शुल्क 80 से 90 हजार रुपये तक है। इससे उद्योगपति और कारोबारी परेशान हैं।
बैठक में हुए फैसले
1. कचरा संग्रहण शुल्क को संपत्ति कर के बिल से अलग किया जाएगा। औद्योगिक क्षेत्र फेज-2 स्थित डिस्ट्रिक्ट इंडस्ट्रीज सेल (डीआईसी) में 15 और 16 मई को एक शिविर लगाया जाएगा, जिसमें कचरा शुल्क को अलग कर पानी के बिल के साथ जोड़ा जाएगा।
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2. संपत्ति कर के बिल से अलग करने के बाद जून से पानी के बिल में ही कचरा शुल्क को जोड़ कर भेजा जाएगा।
3. अभी तक जारी अधिक शुल्क वाले बिलों को भी सुधारा जाएगा और अधिसूचना के अनुसार अधिकतम 1000 रुपये प्रतिमाह शुल्क लिया जाएगा। जल्द ही नगर निगम की सदन की बैठक में दरों की समीक्षा की जाएगी और एक उचित राशि तय करके अधिसूचना के लिए प्रशासन को भेजा जाएगा।
उद्योगपतियों को लाभ मिलेगा
मेयर और निगम के अधिकारियों के साथ बैठक बहुत सकारात्मक रही। हम अधिकारियों को अपनी परेशानी समझाने में कामयाब रहे। मेयर ने संपत्ति कर और कचरा शुल्क को अलग-अलग करने के निर्देश दिए ताकि सभी अपना संपत्ति कर जमा करा सकें। इसके अलावा भी राहत वाले कई फैसले हुए हैं।
- अवि भसीन, सदस्य, प्रशासकीय सलाहकार परिषद
राहत देने के लिए हम मेयर के आभारी
हमने मेयर और निगम के अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखीं। बताया कि संपत्ति कर में कचरा शुल्क को भेजने का फैसला गलत है। इससे उद्योगपतियों और कारोबारियों को बहुत परेशानी हो रही है। हमारे अनुरोध को स्वीकार करने और मौके पर ही निर्णय लेने के लिए हम अपने मेयर के आभारी हैं।
- अरुण महाजन, अध्यक्ष, इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ चंडीगढ़
दरों की होगी समीक्षा
बैठक में कई फैसले हुए हैं, जिससे उद्योगपतियों और व्यापारियों को राहत मिलेगी। कचरा शुल्क को संपत्ति कर से अलग किया जाएगा। कचरा शुल्क की दरें भी ठीक नहीं हैं। इसका मुद्दा भी उठाया गया। फैसला हुआ कि दरों की भी समीक्षा की जाएगी। इसके लिए सदन की बैठक में प्रस्ताव लाने का फैसला हुआ है।
- नवीन मंगलानी, उपाध्यक्ष, चेंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्रीज
जिनके यहां पानी का बिल नहीं जाता, उनके संपत्ति कर में जोड़ा गया है कचरा संग्रहण शुल्क
नगर निगम की तरफ से कचरा शुल्क उन लोगों के संपत्ति कर के बिल में जोड़ कर भेजा गया है, जिनके यहां पानी के बिल नहीं जाते। अधिकतर लोग हर दो महीने में पानी के बिल के साथ ही कचरा संग्रहण शुल्क देते हैं, लेकिन नगर निगम के पास चुनौती थी कि वह उन लोगों से कैसे कचरा शुल्क वसूला जाए, जिनके यहां पानी का बिल नहीं जाता। ऐसे में फैसला लिया गया कि संपत्ति कर में ही कचरा शुल्क जोड़ कर भेजा जाएगा। ऐसे अधिकतर लोग औद्योगिक क्षेत्र के प्लॉट मालिक व एससीओ, एससीएफ आदि के मालिक हैं, इसलिए इस समस्या से सबसे ज्यादा उद्योगपति व व्यापारी जूझ रहे हैं।
कचरा संग्रहण शुल्क को संपत्ति कर से अलग किया जाएगा। इस संबंध में फैसला ले लिया गया है ताकि लोग बिना देरी के संपत्ति कर जमा कर सकें। लोगों की मदद के लिए विशेष शिविर भी लगाए जाएंगे। विस्तृत चर्चा के लिए इस मुद्दे को नगर निगम की सदन की बैठक में भी लाया जाएगा।
- अनूप गुप्ता, मेयर
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नगर निगम की गाड़ी में फैक्ट्रियों से कोई कचरा नहीं डाला जाता तो नगर निगम उनसे यह भारी भरकम शुल्क क्यों वसूल रहा है। कुछ उद्योगपतियों की तरफ से कहा गया कि अगर निगम ने शुल्क लेने भी हैं तो दरों का एक आधार होना चाहिए और दरें भी कम होनी चाहिए। साथ ही मांग रखी गई कि कचरा संग्रहण शुल्क को संपत्ति कर से तुरंत अलग किया जाए। बता दें कि औद्योगिक क्षेत्र के प्लॉट मालिकों को भेजे गए कचरा संग्रहण शुल्क, संपत्ति कर से तीन गुना तक ज्यादा हैं। व्यावसायिक श्रेणी में कुछ एससीओ को भेजा गया कचरा शुल्क 80 से 90 हजार रुपये तक है। इससे उद्योगपति और कारोबारी परेशान हैं।
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बैठक में हुए फैसले
1. कचरा संग्रहण शुल्क को संपत्ति कर के बिल से अलग किया जाएगा। औद्योगिक क्षेत्र फेज-2 स्थित डिस्ट्रिक्ट इंडस्ट्रीज सेल (डीआईसी) में 15 और 16 मई को एक शिविर लगाया जाएगा, जिसमें कचरा शुल्क को अलग कर पानी के बिल के साथ जोड़ा जाएगा।
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2. संपत्ति कर के बिल से अलग करने के बाद जून से पानी के बिल में ही कचरा शुल्क को जोड़ कर भेजा जाएगा।
3. अभी तक जारी अधिक शुल्क वाले बिलों को भी सुधारा जाएगा और अधिसूचना के अनुसार अधिकतम 1000 रुपये प्रतिमाह शुल्क लिया जाएगा। जल्द ही नगर निगम की सदन की बैठक में दरों की समीक्षा की जाएगी और एक उचित राशि तय करके अधिसूचना के लिए प्रशासन को भेजा जाएगा।
उद्योगपतियों को लाभ मिलेगा
मेयर और निगम के अधिकारियों के साथ बैठक बहुत सकारात्मक रही। हम अधिकारियों को अपनी परेशानी समझाने में कामयाब रहे। मेयर ने संपत्ति कर और कचरा शुल्क को अलग-अलग करने के निर्देश दिए ताकि सभी अपना संपत्ति कर जमा करा सकें। इसके अलावा भी राहत वाले कई फैसले हुए हैं।
- अवि भसीन, सदस्य, प्रशासकीय सलाहकार परिषद
राहत देने के लिए हम मेयर के आभारी
हमने मेयर और निगम के अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखीं। बताया कि संपत्ति कर में कचरा शुल्क को भेजने का फैसला गलत है। इससे उद्योगपतियों और कारोबारियों को बहुत परेशानी हो रही है। हमारे अनुरोध को स्वीकार करने और मौके पर ही निर्णय लेने के लिए हम अपने मेयर के आभारी हैं।
- अरुण महाजन, अध्यक्ष, इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ चंडीगढ़
दरों की होगी समीक्षा
बैठक में कई फैसले हुए हैं, जिससे उद्योगपतियों और व्यापारियों को राहत मिलेगी। कचरा शुल्क को संपत्ति कर से अलग किया जाएगा। कचरा शुल्क की दरें भी ठीक नहीं हैं। इसका मुद्दा भी उठाया गया। फैसला हुआ कि दरों की भी समीक्षा की जाएगी। इसके लिए सदन की बैठक में प्रस्ताव लाने का फैसला हुआ है।
- नवीन मंगलानी, उपाध्यक्ष, चेंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्रीज
जिनके यहां पानी का बिल नहीं जाता, उनके संपत्ति कर में जोड़ा गया है कचरा संग्रहण शुल्क
नगर निगम की तरफ से कचरा शुल्क उन लोगों के संपत्ति कर के बिल में जोड़ कर भेजा गया है, जिनके यहां पानी के बिल नहीं जाते। अधिकतर लोग हर दो महीने में पानी के बिल के साथ ही कचरा संग्रहण शुल्क देते हैं, लेकिन नगर निगम के पास चुनौती थी कि वह उन लोगों से कैसे कचरा शुल्क वसूला जाए, जिनके यहां पानी का बिल नहीं जाता। ऐसे में फैसला लिया गया कि संपत्ति कर में ही कचरा शुल्क जोड़ कर भेजा जाएगा। ऐसे अधिकतर लोग औद्योगिक क्षेत्र के प्लॉट मालिक व एससीओ, एससीएफ आदि के मालिक हैं, इसलिए इस समस्या से सबसे ज्यादा उद्योगपति व व्यापारी जूझ रहे हैं।
कचरा संग्रहण शुल्क को संपत्ति कर से अलग किया जाएगा। इस संबंध में फैसला ले लिया गया है ताकि लोग बिना देरी के संपत्ति कर जमा कर सकें। लोगों की मदद के लिए विशेष शिविर भी लगाए जाएंगे। विस्तृत चर्चा के लिए इस मुद्दे को नगर निगम की सदन की बैठक में भी लाया जाएगा।
- अनूप गुप्ता, मेयर