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Chandigarh News: नीलगाय से लेकर पैंगोलिन तक, सेंक्चुरी में बढ़ रही वन्यजीवों की मौजूदगी...पिछले साल दिखा था तेंदुआ
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चंडीगढ़। चंडीगढ़ एक छोटा शहर है, लेकिन जैव विविधता के मामले में किसी बड़े इलाके से कम नहीं। सुखना वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी में तेंदुए से लेकर चीतल, नीलगाय और मोर तक कई प्रजातियां पाई जाती हैं। शहर में पक्षियों पर आधारित पार्क और बटरफ्लाई गार्डन इसकी खास पहचान हैं।
छोटा शहर होने के बावजूद चंडीगढ़ अपनी समृद्ध बायोडायवर्सिटी के लिए जाना जाता है। यहां न सिर्फ स्थानीय जीव-जंतु बल्कि कई तरह की दुर्लभ प्रजातियां भी देखी जा सकती हैं। 17 नवंबर 2024 को सुखना वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी में एक तेंदुआ (लेपर्ड) दिखाई दिया था। हालांकि, वन विभाग का कहना है कि लेपर्ड यहां स्थाई रूप से नहीं रहते, बल्कि समय-समय पर आते-जाते रहते हैं।
सेंक्चुरी में इस समय कई तरह के वन्यजीव मौजूद हैं जिनमें जंगली बिल्ली, गोल्डन जैकाल, इंडियन ग्रे मोंगूज, चीतल, जंगली सूअर, नीलगाय, लंगूर, इंडियन पैंगोलिन और इंडियन पॉर्क्यूपाइन शामिल हैं। वहीं, पक्षियों में भारतीय मोर, लाल मोर के अलावा करीब 300 प्रजातियां दर्ज की गई हैं। सांपों की कई किस्में भी यहां पाई जाती हैं, जिनमें कोबरा प्रमुख है। वन विभाग के निदेशक सौरभ कुमार ने बताया कि छोटा शहर होने के बावजूद चंडीगढ़ में काफी समृद्ध जैव विविधता है। उन्होंने कहा कि विभाग लगातार प्रयास कर रहा है कि यहां की बायोडायवर्सिटी और मजबूत हो। इसके लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
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मोरों की संख्या अन्य जगहों की तुलना में कहीं ज्यादा
शहर की खासियत यह है कि यहां मोरों की संख्या अन्य जगहों की तुलना में कहीं ज्यादा है। यही नहीं, चंडीगढ़ देश का एकमात्र ऐसा शहर है जहां पक्षियों पर आधारित पार्क बनाए गए हैं। सेक्टर-39 स्थित पीकॉक पार्क और सेक्टर-26 स्थित बटरफ्लाई गार्डन इसकी मिसाल हैं। बटरफ्लाई गार्डन में सबसे अधिक प्रजातियों की तितलियां देखी जाती हैं। इसके अलावा, शहर में बर्ड पार्क भी है, जहां विदेशी पक्षियों की कई किस्में मौजूद हैं।
ग्रीन कवर और वन क्षेत्र भी बढ़ रहा
वर्ष 2023 के नवीनतम इंडियन स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (आईएसएफआर) के अनुसार चंडीगढ़ का कुल ग्रीन कवर बढ़ा है। फॉरेस्ट एरिया-ट्री कवर को मिलाकर और सुखना वाइल्ड लाइफ सेंचुरी को छोड़कर कुल ग्रीन कवर 2021 में 37.88 वर्ग किमी था, जो 2023 में बढ़कर 46.18 वर्ग किमी हो गया है। यह 22 फीसदी की वृद्धि है। इसमें से ट्री कवर 2021 में 15 वर्ग किमी था, जो 2023 में बढ़कर 21.18 वर्ग किमी हो गया।
आईएसएफआर 2023 के अनुसार चंडीगढ़ का वन क्षेत्र 2021 में 22.88 वर्ग किमी था, जो 2023 में बढ़कर 25 वर्ग किमी हो गया है। साथ ही, भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की तरफ से जुलाई 2024 में लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार चंडीगढ़ में वन क्षेत्र लगभग 23 वर्ग किमी हो गया है।
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छोटा शहर होने के बावजूद चंडीगढ़ अपनी समृद्ध बायोडायवर्सिटी के लिए जाना जाता है। यहां न सिर्फ स्थानीय जीव-जंतु बल्कि कई तरह की दुर्लभ प्रजातियां भी देखी जा सकती हैं। 17 नवंबर 2024 को सुखना वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी में एक तेंदुआ (लेपर्ड) दिखाई दिया था। हालांकि, वन विभाग का कहना है कि लेपर्ड यहां स्थाई रूप से नहीं रहते, बल्कि समय-समय पर आते-जाते रहते हैं।
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सेंक्चुरी में इस समय कई तरह के वन्यजीव मौजूद हैं जिनमें जंगली बिल्ली, गोल्डन जैकाल, इंडियन ग्रे मोंगूज, चीतल, जंगली सूअर, नीलगाय, लंगूर, इंडियन पैंगोलिन और इंडियन पॉर्क्यूपाइन शामिल हैं। वहीं, पक्षियों में भारतीय मोर, लाल मोर के अलावा करीब 300 प्रजातियां दर्ज की गई हैं। सांपों की कई किस्में भी यहां पाई जाती हैं, जिनमें कोबरा प्रमुख है। वन विभाग के निदेशक सौरभ कुमार ने बताया कि छोटा शहर होने के बावजूद चंडीगढ़ में काफी समृद्ध जैव विविधता है। उन्होंने कहा कि विभाग लगातार प्रयास कर रहा है कि यहां की बायोडायवर्सिटी और मजबूत हो। इसके लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
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मोरों की संख्या अन्य जगहों की तुलना में कहीं ज्यादा
शहर की खासियत यह है कि यहां मोरों की संख्या अन्य जगहों की तुलना में कहीं ज्यादा है। यही नहीं, चंडीगढ़ देश का एकमात्र ऐसा शहर है जहां पक्षियों पर आधारित पार्क बनाए गए हैं। सेक्टर-39 स्थित पीकॉक पार्क और सेक्टर-26 स्थित बटरफ्लाई गार्डन इसकी मिसाल हैं। बटरफ्लाई गार्डन में सबसे अधिक प्रजातियों की तितलियां देखी जाती हैं। इसके अलावा, शहर में बर्ड पार्क भी है, जहां विदेशी पक्षियों की कई किस्में मौजूद हैं।
ग्रीन कवर और वन क्षेत्र भी बढ़ रहा
वर्ष 2023 के नवीनतम इंडियन स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (आईएसएफआर) के अनुसार चंडीगढ़ का कुल ग्रीन कवर बढ़ा है। फॉरेस्ट एरिया-ट्री कवर को मिलाकर और सुखना वाइल्ड लाइफ सेंचुरी को छोड़कर कुल ग्रीन कवर 2021 में 37.88 वर्ग किमी था, जो 2023 में बढ़कर 46.18 वर्ग किमी हो गया है। यह 22 फीसदी की वृद्धि है। इसमें से ट्री कवर 2021 में 15 वर्ग किमी था, जो 2023 में बढ़कर 21.18 वर्ग किमी हो गया।
आईएसएफआर 2023 के अनुसार चंडीगढ़ का वन क्षेत्र 2021 में 22.88 वर्ग किमी था, जो 2023 में बढ़कर 25 वर्ग किमी हो गया है। साथ ही, भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की तरफ से जुलाई 2024 में लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार चंडीगढ़ में वन क्षेत्र लगभग 23 वर्ग किमी हो गया है।