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नियमों को दरकिनार कर प्रिंसिपल ने पत्नी को बनवाया गेस्ट लेक्चरर, 15 साल बाद हुआ खुलासा
Mon, 29 Jun 2020 06:13 PM IST
खुशबू गोयल
सनमीत सिंह थिंद, सिरसा
सनमीत सिंह थिंद, सिरसा
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 29 Jun 2020 06:13 PM IST
सार
- वर्तमान प्रिंसिपल ने किया बर्खास्त, 32 लाख रुपये की रिकवरी डाली
- महिला ने खुद को स्थानीय होने का दावा कर ली नौकरी, नहीं दिया था कोई प्रूफ
- तीन सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट में खुली फर्जीवाड़े की पोल
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फर्जी शिक्षिका प्रकरण
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नियमों को दरकिनार करके प्रिंसिपल ने पत्नी को अपने ही स्कूल में गेस्ट लेक्चरर बनवा दिया। 15 साल बाद इस मामले का खुलासा हुआ। महिला 15 सालों से नौकरी कर रही थी और सैलरी भी उठा रही थी। मामले की पोल उस समय खुली, जब शिक्षा निदेशालय के एमआईएस पोर्टल पर महिला गेस्ट लेक्चरर द्वारा अपलोड की गई जानकारी पर मौजूदा स्कूल प्रिंसिपल को शक हुआ।
प्रिंसिपल करतार सिंह ने इसकी जांच के लिए कमेटी बना दी। तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने महिला द्वारा दी गई जानकारी को फर्जी पाया और इसकी रिपोर्ट स्कूल प्रिंसिपल करतार सिंह को सौंपी। प्रिंसिपल ने रिपोर्ट के आधार पर महिला गेस्ट टीचर को बर्खास्त कर उससे करीब 32 लाख रुपये की रिकवरी भी डाली है। उसे 21 जुलाई 2020 तक इसे जमा करवाना है।
15 साल में 32 लाख रुपये वेतन के लिए
गेस्ट लेक्चरर ने फर्जी डॉक्यूमेंट के आधार पर करीब 15 साल नौकरी की। 30 मई 2020 तक कुल 32 लाख रुपये का वेतन प्राप्त किया है। रानियां स्कूल के प्रिंसिपल करतार सिंह ने एक्स पोस्ट फैक्ट के तहत उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया है।
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गेस्ट लेक्चरर को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। राशि वसूलने का भी नोटिस जारी हो चुका है। हमने निदेशालय को रिपोर्ट बनाकर भेज दी है।
- आत्म प्रकाश मेहरा, जिला शिक्षा अधिकारी सिरसा।
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प्रिंसिपल करतार सिंह ने इसकी जांच के लिए कमेटी बना दी। तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने महिला द्वारा दी गई जानकारी को फर्जी पाया और इसकी रिपोर्ट स्कूल प्रिंसिपल करतार सिंह को सौंपी। प्रिंसिपल ने रिपोर्ट के आधार पर महिला गेस्ट टीचर को बर्खास्त कर उससे करीब 32 लाख रुपये की रिकवरी भी डाली है। उसे 21 जुलाई 2020 तक इसे जमा करवाना है।
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15 साल में 32 लाख रुपये वेतन के लिए
गेस्ट लेक्चरर ने फर्जी डॉक्यूमेंट के आधार पर करीब 15 साल नौकरी की। 30 मई 2020 तक कुल 32 लाख रुपये का वेतन प्राप्त किया है। रानियां स्कूल के प्रिंसिपल करतार सिंह ने एक्स पोस्ट फैक्ट के तहत उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया है।
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गेस्ट लेक्चरर को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। राशि वसूलने का भी नोटिस जारी हो चुका है। हमने निदेशालय को रिपोर्ट बनाकर भेज दी है।
- आत्म प्रकाश मेहरा, जिला शिक्षा अधिकारी सिरसा।
यह था मामला
राजकीय वरिष्ठ उच्च माध्यमिक विद्यालय रानियां में 21 दिसंबर 2005 को एक हिंदी गेस्ट लेक्चरर ने ज्वॉइन किया। महिला के पति तत्कालीन समय में रानियां के इसी स्कूल के प्रिंसिपल थे और उनके पास डिप्टी डीईओ का अतिरिक्त चार्ज भी था। गेस्ट लेक्चरर के नियमानुसार स्थानीय उम्मीदवार को ही वरीयता देनी होती है।
पद के लिए चार उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। लेकिन प्रिंसिपल ने जो कमेटी बनाई, उस तीन सदस्यीय कमेटी ने 64 प्रतिशत वाले उम्मीदवार को यह कहकर रिजेक्ट कर दिया कि आप ग्रामीण क्षेत्र के हो। हमें स्थानीय उम्मीदवार चाहिए। कमेटी ने प्रिंसिपल की पत्नी का गेस्ट लेक्चरर के पद पर चयन कर दिया। जबकि महिला के पास स्थानीय निवास का कोई प्रूफ नहीं था।
उसने केवल पत्र व्यवहार के लिए स्थानीय पता दिया। गेस्ट लेक्चरर पिछले 15 सालों से नौकरी कर रही थी। एमआईएस पोर्टल पर डाटा अपलोड किया तो स्कूल प्रिंसिपल को शक हुआ। क्योंकि एमआईएस पोर्टल पर उसने अपनी जन्म तिथि 1969 अंकित की थी। अगस्त 1982 में अपनी शादी दिखाई, जो 12 साल आठ महीने की उम्र में हुई।
अक्टूबर 1983 में बेटे का जन्म दिखाया। करीब 36 साल की उम्र में बेटा हुआ। मार्च 1984 में गेस्ट लेक्चरर ने दसवीं प्राइवेट परीक्षार्थी के तौर पर की। उस समय लेक्चरर की उम्र करीब 14 साल थी।
पद के लिए चार उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। लेकिन प्रिंसिपल ने जो कमेटी बनाई, उस तीन सदस्यीय कमेटी ने 64 प्रतिशत वाले उम्मीदवार को यह कहकर रिजेक्ट कर दिया कि आप ग्रामीण क्षेत्र के हो। हमें स्थानीय उम्मीदवार चाहिए। कमेटी ने प्रिंसिपल की पत्नी का गेस्ट लेक्चरर के पद पर चयन कर दिया। जबकि महिला के पास स्थानीय निवास का कोई प्रूफ नहीं था।
उसने केवल पत्र व्यवहार के लिए स्थानीय पता दिया। गेस्ट लेक्चरर पिछले 15 सालों से नौकरी कर रही थी। एमआईएस पोर्टल पर डाटा अपलोड किया तो स्कूल प्रिंसिपल को शक हुआ। क्योंकि एमआईएस पोर्टल पर उसने अपनी जन्म तिथि 1969 अंकित की थी। अगस्त 1982 में अपनी शादी दिखाई, जो 12 साल आठ महीने की उम्र में हुई।
अक्टूबर 1983 में बेटे का जन्म दिखाया। करीब 36 साल की उम्र में बेटा हुआ। मार्च 1984 में गेस्ट लेक्चरर ने दसवीं प्राइवेट परीक्षार्थी के तौर पर की। उस समय लेक्चरर की उम्र करीब 14 साल थी।
पति की दो शादियां, लेकिन सबूत नहीं दे पाई
रानियां स्कूल के प्रिंसिपल करतार सिंह के संज्ञान में मामला आया तो उन्होंने तीन सदस्यीय जांच कमेटी बना दी। जांच कमेटी ने पाया कि गेस्ट लेक्चरर की वोटर लिस्ट में आयु 65 साल है, जबकि नौकरी के लिए जमा करवाए गए बर्थ सर्टिफिकेट में उसका जन्म वर्ष 1969 लिखा हुआ है। आयु में करीब 15 साल का फर्क है। जांच कमेटी ने वोटर लिस्ट में एक बेटे की आयु करीब 43 साल पाई। इस पर गेस्ट टीचर ने दावा किया कि उसके पति की दो शादियां हुई है।
43 साल वाला बेटा पति की पहली पत्नी का है। लेकिन महिला पति की पहली शादी का कोई सबूत नहीं दे पाई। उसके बेटे का जन्म अक्टूबर 1983 को हुआ। जांच कमेटी ने दसवीं की मार्कशीट की कॉपी हरियाणा भिवानी बोर्ड को जांच के लिए भेजी है। क्योंकि दसवीं की मार्कशीट के अनुसार उनकी दसवीं 14 साल में हो गई। मार्कशीट पर दसवीं किस स्कूल से की गई, उसका जिक्र नहीं। प्राइमरी और हाई स्कूल कहां से की, इस पर महिला लेक्चरर का जवाब था कि यह नियम उन पर लागू नहीं।
गेस्ट लेक्चरर ने यह दावा किया कि वह एक साल फेल हो गई थी, उसके बाद उसने अगले वर्ष प्राइवेट की परीक्षा दी। जबकि जांच कमेटी ने दावा किया कि उस समय प्राइवेट परीक्षा का नियम नहीं था। जांच कमेटी ने ग्रेजुएशन और मास्टर डिग्री की डीएमसी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय को वेरीफिकेशन के लिए भेज दिए हैं। साथ ही नियमानुसार केवल उस विद्यालय में स्थानीय उम्मीदवार को ही गेस्ट लेक्चरर लगाया जा सकता है। गेस्ट लेक्चरर के पास रानियां का कोई स्थायी प्रूफ भी नहीं मिला।
43 साल वाला बेटा पति की पहली पत्नी का है। लेकिन महिला पति की पहली शादी का कोई सबूत नहीं दे पाई। उसके बेटे का जन्म अक्टूबर 1983 को हुआ। जांच कमेटी ने दसवीं की मार्कशीट की कॉपी हरियाणा भिवानी बोर्ड को जांच के लिए भेजी है। क्योंकि दसवीं की मार्कशीट के अनुसार उनकी दसवीं 14 साल में हो गई। मार्कशीट पर दसवीं किस स्कूल से की गई, उसका जिक्र नहीं। प्राइमरी और हाई स्कूल कहां से की, इस पर महिला लेक्चरर का जवाब था कि यह नियम उन पर लागू नहीं।
गेस्ट लेक्चरर ने यह दावा किया कि वह एक साल फेल हो गई थी, उसके बाद उसने अगले वर्ष प्राइवेट की परीक्षा दी। जबकि जांच कमेटी ने दावा किया कि उस समय प्राइवेट परीक्षा का नियम नहीं था। जांच कमेटी ने ग्रेजुएशन और मास्टर डिग्री की डीएमसी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय को वेरीफिकेशन के लिए भेज दिए हैं। साथ ही नियमानुसार केवल उस विद्यालय में स्थानीय उम्मीदवार को ही गेस्ट लेक्चरर लगाया जा सकता है। गेस्ट लेक्चरर के पास रानियां का कोई स्थायी प्रूफ भी नहीं मिला।