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पीजीआई चंडीगढ़ में ‘अमृत’ का बोर्ड लगा बेची जा रहीं महंगी दवाएं, असली को ग्राहक का इंतजार

Thu, 26 Dec 2019 11:00 AM IST
खुशबू गोयल वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 26 Dec 2019 11:00 AM IST
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Fraud on the Name of Amrit Pharmacy in PGI Chandigarh
मेडिकल स्टोर पर लगा अमृत का बोर्ड - फोटो : अमर उजाला
गरीब और जरूरतमंद मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार ‘अमृत फार्मेसी’ और ‘जन औषधि केन्द्र’ संचालित कर रही है। लेकिन इनके नाम का फायदा उठाकर प्राइवेट दवा की दुकान वाले खुलेआम मरीजों से सस्ती दवा के नाम पर भी महंगी दवाएं बेचकर मोटी रकम वसूल रहे हैं। पीजीआई में यह काम प्रशासन की आंखों के सामने खुलेआम हो रहा है।
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एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर के बेसमेंट में अमृत फार्मेसी के सामने ही शिव अमृत बेबी केमिस्ट के नाम से दुकान संचालित की जा रही है। जिसके बोर्ड पर शिव और बेबी को दरकिनार कर अमृत केमिस्ट को बड़े-बड़े अक्षरों में डिसप्ले किया गया है। जिसे पढ़कर मरीज सस्ती दवा की आस में यहीं चले जाते हैं। क्योंकि ज्यादातर मरीज सिर्फ अमृत लिखा हुआ देखकर चक्कर में पड़ जाते हैं और वहीं से दवा जिस रेट में मिलती है उसी रेट में सस्ती समझकर खरीद कर चले जात हैं।
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वहीं, अमृत फार्मेसी की नकल करते हुए प्राइवेट दुकान पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तस्वीर लगाकर उसके बगल में 80 प्रतिशत डिस्काउंट रेट पर दवा बेचने संदेश लिखा गया है। जबकि हकीकत कुछ और ही है। वहां 80 के बजाय सिर्फ 20 से 30 प्रतिशत तक डिस्काउंट तो दिया जा रहा है, लेकिन इसमें भी खेल है।
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एक व्यक्ति ने शिव अमृत बेबी केमिस्ट से हनी सुपर सीरप खरीदा। बिल पर उसका रेट 99 रुपये लिखा गया था। जिसे 30 प्रतिशत छूट के साथ 69 रुपये में बेचा गया। जबकि पीजीआई के बाहर की दवा की दुकान पर वहीं सीरप बिना डिस्काउंट के 70 रुपये में मिल रही है। इस तरह रेट को लेकर बड़ा खेल किया जा रहा है।

असली सरकारी अमृत फार्मेसी पर सन्नाटा

एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर के सामने निजी दवा की दुकान के फैलाये गये भ्रम का असर इस कदर छाया हुआ है कि उसके सामने संचालित हो रहे असली सरकारी अमृत फार्मेसी पर सन्नाटा छाया रहता है। सेंटर के कमर्चारियों का कहना है कि अमृत के नाम पर मरीजों को ठगा जा रहा है, लेकिन पीजीआई प्रशासन कोई कार्यवाही नहीं कर रहा है।

सूत्रों का कहना है कि टेंडर के समय पीजीआई प्रशासन की ओर से इन्हें अमृत या जन औषधि जैसे नाम अलॉट नहीं किये जाते। दुकानवाले फायदा पाने के चक्कर में हेल्थ डिपार्टमेंट से दुकान का नाम बदलवा लेते हैं।

पीजीआई में दवा की दुकानों से संबंधित शिकायत पर रोक लगाने के लिए अब टेंडर में नाम के बजाय सीरियल नंबर अलॉट करने की योजना बनाई जा रही है। ऐसा लागू हो जाने पर मेडिकल की दुकान को उनके नाम की बजाय सीरियल नंबर से जाना जायेगा। इसके अलावा कोई भी समस्या हो तो इसकी लिखित सूचना शिकायत प्रकोष्ठ में दे सकते हैं।
- डॉ. अशोक कुमार, पीजीआई प्रवक्ता
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