पंजाबः एक मंत्री की शिकायत पर चार अफसर सस्पेंड, दूसरे की सिफारिश पर बहाल
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पंचायत चुनावों के दौरान सरपंच व पंच पद को गलत ढंग से आरक्षित करने के आरोप में डीडीपीओ समेत जिन चार अधिकारियों को उच्च शिक्षा मंत्री अरुणा चौधरी की शिकायत पर सस्पेंड किया गया था, उन्हें पंचायत मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा की सिफारिश पर बहाल कर दिया गया। चारों की बहाली की इस प्रक्रिया से दोनों मंत्री आमने-सामने आ गए हैं। अरुणा चौधरी ने बाजवा पर कई सवाल खड़े कर दिए। गौरतलब है कि अरुणा और बाजवा एक ही जिले से संबंध रखते हैं, लेकिन बाजवा मुख्यमंत्री के ज्यादा करीब माने जाते हैं।
बता दें कि 24 दिसंबर को ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग के वित्तीय कमिश्नर और सचिव अनुराग वर्मा ने जिला विकास और पंचायत अफसर (डीडीपीओ) हरजिंदर सिंह संधू, लेखाकार कम रीडर सुखजिंदर सिंह, पंचायत सचिव बलजीत सिंह और कंप्यूटर आपरेटर मंजीत सिंह को मुअत्तल किया था। सभी पर 2018 की ग्राम पंचायतों में सरपंचों की सीटों के आरक्षण नियमों का उल्लंघन करने का आरोप था। इस पर डीसी गुरदासपुर विपुल चौधरी को मंत्री अरुणा चौधरी ने शिकायत दी थी।
डीसी ने एक कमेटी का गठन कर एडीसी सुभाष चंद्र तथा सहायक कमिश्नर को रिपोर्ट देने को कहा था। कमेटी की रिपोर्ट में बताया गया कि डीडीपीओ गुरदासपुर की तरफ से दो ड्राफ्ट नोटिफिकेशन तैयार किए गए थे। ड्राफ्ट नोटिफिकेशन एक को आधार मानकर फाइनल नोटिफिकेशन प्रकाशित किया गया। दूसरे ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के जारी होने के कारण भ्रम की स्थिति बनी।
इसके चलते विभाग के वित्तिय सचिव तथा कमिश्नर अनुराग वर्मा ने उन्हें निलंबित कर दिया। लेकिन अब बिना चार्जशीट और जांच के विभाग की ओर से दिए गए बहाली के आदेश पर चर्चा का बाजार गर्म हो गया। गुरदासपुर के डिप्टी कमिश्नर विपुल उज्जवल जो छुट्टी पर हैं, ने बताया कि विभाग के अधिकारी ही बता सकते हैं कि किस आधार पर बहाली की गई। इस संबंध में पंचायत विभाग के डायरेक्टर जसकीरत सिंह ने कहा कि मंत्री की सिफारिश पर सभी की केवल सस्पेंशन रद्द की गई है लेकिन आरोप मुक्त नहीं किया गया।
यह एक बड़ी साजिश: चौधरी
मंत्री अरुणा चौधरी ने कहा कि बिना जांच तथा चार्जशीट के बहाली क्यों की गई, उन्हें खुद नहीं पता। दो पीसीएस अफसरों की जांच के बाद यह सस्पेंशन हुई थी। मामले में इतनी क्या जल्दी थी, यह एक बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा कि मंत्री साहब की ऐसी क्या कमजोरी थी, यह तो वे ही बता सकते हैं। इस फैसले से वह बेहद आहत हैं। मुख्यमंत्री के सामने यह मुद्दा रखने पर अरुणा चौधरी ने कहा कि समय आने पर वह सब कुछ करेंगी।
जांच ही नहीं हुई, इसलिए बहाल किया: बाजवा
पंचायत मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा का कहना है कि बहाली की सिफारिश उन्हीं ने की है। इस केस में कोई जांच नहीं हुई। इस कारण उन्होंने अफसरों को बहाल किया है। लेकिन जब उनसे डीसी की ओर से करवाई जांच के बारे में कहा गया तो उन्होंने कहा कि वह इसकी उच्च स्तरीय जांच करवाएंगे। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।