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'56 इंच की छाती' तले मर रहा है अन्नदाता, कब जागेगी सरकार?
ब्यूरो/अमर उजाला, बरनाला(पंजाब)
Updated Mon, 06 Mar 2017 09:21 AM IST
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मालवा में एक दिन में चार किसानों ने की खुदकुशी
- फोटो : File Photo
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यह बेहद परेशान करने वाली घटना है कि देश का अन्नदाता, गरीबी और आर्थिक तनाव के चलते लगातार खुदकुशी कर रहा है। पंजाब के मालवा क्षेत्र में एक दिन में चार किसानों ने आर्थिक तंगी के कारण खुदकुशी कर ली है। इससे किसानों के लिए केंद्र व राज्य सरकारों की ओर से बनाई नीतियों पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
शनिवार को बरनाला के कस्बा हंडियाया के एक किसान मघर सिंह पुत्र अमर सिंह ने आर्थिक तंगी के कारण फंदा लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। कस्बा हंडियाया निवासी बंधनतोड़ सिंह ने बताया कि मृतक किसान मघर सिंह के घर की आर्थिक हालत काफी खराब थी। इसके कारण उसने यह कदम उठाया।
दूसरी खुदकुशी संगरूर के गांव नंगला में हुई। इस गांव के रहने वाले किसान रघवीर सिंह पुत्र दरबारा सिंह ने आर्थिक तंगी के कारण अपने घर में फंदा लगा लिया। गांव के पूर्व सरपंच जगदीप सिंह ने बताया कि मृतक के पास जमीन नहीं थी। वह दो एकड़ जमीन ठेके पर लेकर अपने परिवार का गुजारा चलाता था। अब उसके सिर पर कर्ज चढ़ गया था। उसकी घर की हालत सुधर नहीं पा रही थी। इसके कारण उसने अपने आपको फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली।
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शनिवार को बरनाला के कस्बा हंडियाया के एक किसान मघर सिंह पुत्र अमर सिंह ने आर्थिक तंगी के कारण फंदा लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। कस्बा हंडियाया निवासी बंधनतोड़ सिंह ने बताया कि मृतक किसान मघर सिंह के घर की आर्थिक हालत काफी खराब थी। इसके कारण उसने यह कदम उठाया।
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दूसरी खुदकुशी संगरूर के गांव नंगला में हुई। इस गांव के रहने वाले किसान रघवीर सिंह पुत्र दरबारा सिंह ने आर्थिक तंगी के कारण अपने घर में फंदा लगा लिया। गांव के पूर्व सरपंच जगदीप सिंह ने बताया कि मृतक के पास जमीन नहीं थी। वह दो एकड़ जमीन ठेके पर लेकर अपने परिवार का गुजारा चलाता था। अब उसके सिर पर कर्ज चढ़ गया था। उसकी घर की हालत सुधर नहीं पा रही थी। इसके कारण उसने अपने आपको फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली।
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पिछले साल 250 किसानों ने दी थी जान
सुसाइड
- फोटो : Demo Pic
तीसरी घटना पटियाला के गांव मिहोणा में हुई। गांव मिहोणा के एक किसान देव राज, जिसकी मौत हो चुकी है, उसने अपनी कबीलदारी चलाने के लिए आढ़ती व बैंक से कर्ज लिया हुआ था। उसे उतारते हुए उसकी जान चली गई।
इसके बाद पिता का कर्ज उतारने की जिम्मेदारी किसान बेटे जसविंदर कुमार पर आ गई। बैंक और आढ़ती का कर्ज बढ़कर दोगुना हो गया था। जसविंदर कुमार के पास सिर्फ डेढ़ एकड़ जमीन है जिससे कर्ज तो क्या उतरना था गुजारा भी नहीं होता था। इस कारण वह मजदूरी करने भी चला जाता था।
आढ़ती ने रुपये लेने के लिए जसविंदर सिंह की जमीन की कुर्की करवा ली। इसके चलते किसान जसविंदर सिंह ने दुखी होकर मानसिक परेशानी के चलते कोई जहरीली वस्तु खाकर खुदकुशी कर ली।
चौथी घटना मानसा के गांव झंडा खुर्द में हुई। गांव झंडा खुर्द के किसान दलवीर सिंह पुत्र हवा सिंह ने कोई जहरीली वस्तु निगलकर आत्महत्या कर ली। उसके परिवारिक मेंबरों के अनुसार वह ठेके पर जमीन लेकर परिवार का पालन पोषण करता था। उसपर छह लाख रुपये कर्ज भी चढ़ा हुआ था। शनिवार को उसने कोई जहरीली वस्तु निगलकर आत्महत्या कर ली।
इसके बाद पिता का कर्ज उतारने की जिम्मेदारी किसान बेटे जसविंदर कुमार पर आ गई। बैंक और आढ़ती का कर्ज बढ़कर दोगुना हो गया था। जसविंदर कुमार के पास सिर्फ डेढ़ एकड़ जमीन है जिससे कर्ज तो क्या उतरना था गुजारा भी नहीं होता था। इस कारण वह मजदूरी करने भी चला जाता था।
आढ़ती ने रुपये लेने के लिए जसविंदर सिंह की जमीन की कुर्की करवा ली। इसके चलते किसान जसविंदर सिंह ने दुखी होकर मानसिक परेशानी के चलते कोई जहरीली वस्तु खाकर खुदकुशी कर ली।
चौथी घटना मानसा के गांव झंडा खुर्द में हुई। गांव झंडा खुर्द के किसान दलवीर सिंह पुत्र हवा सिंह ने कोई जहरीली वस्तु निगलकर आत्महत्या कर ली। उसके परिवारिक मेंबरों के अनुसार वह ठेके पर जमीन लेकर परिवार का पालन पोषण करता था। उसपर छह लाख रुपये कर्ज भी चढ़ा हुआ था। शनिवार को उसने कोई जहरीली वस्तु निगलकर आत्महत्या कर ली।
किसान जत्थेबंदियां चिंता में, संघर्ष की तैयारी में जुटे
सुसाइड
- फोटो : file photo
भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहां, भारतीय किसान यूनियन डकौंदा, पंजाब खेत मजदूर यूनियन पंजाब, दिहाड़ी मजूदर सभा पंजाब, मजदूर मुक्ति मोर्चा के नेताओं बलौर सिंह छन्ना, दर्शन सिंह उगोके, जरनैल सिंह बदरा, सुखदेव सिंह, बलजीत कौर, निक्का सिंह संधू, कामरेड हरचरण सिंह. रूप सिंह छन्ना ने कहा कि मालवा क्षेत्र की पूरी बेल्ट काटन के लिए पहचानी जाती है।
मालवा क्षेत्र में वर्ष 2015 के दौरान नकली पेस्टीसाइड और सफेद मक्खी ने ऐसा कहर ढाया कि अब तक किसान अपने पैरों पर खड़े ही नहीं हो पाए। पिछले साल सिर्फ मालवा क्षेत्र में ही 250 करीब किसान खुदकुशियां कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार की ओर से की गई नोटबंदी का भी किसानों पर बुरा असर पड़ा।
उनको बैंकों व आढ़तियों से अपनी व फसल की जरूरत मुताबिक रुपये नहीं मिल पाए। उन्होंने कहा आजादी के वर्षों बाद भी कोई भी सरकार देश के अन्नदाता किसान की दशा नहीं सुधार सकी। उन्होंने एलान किया कि समूह भरातरी जत्थेबंदियों को साथ लेकर किसानों के पक्ष में एक बड़ा जेहाद छेड़ा जाएगा। उन्होंने खुदकुशी कर चुके किसानों को तुरंत योग मुआवजा देने की मांग की।
मालवा क्षेत्र में वर्ष 2015 के दौरान नकली पेस्टीसाइड और सफेद मक्खी ने ऐसा कहर ढाया कि अब तक किसान अपने पैरों पर खड़े ही नहीं हो पाए। पिछले साल सिर्फ मालवा क्षेत्र में ही 250 करीब किसान खुदकुशियां कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार की ओर से की गई नोटबंदी का भी किसानों पर बुरा असर पड़ा।
उनको बैंकों व आढ़तियों से अपनी व फसल की जरूरत मुताबिक रुपये नहीं मिल पाए। उन्होंने कहा आजादी के वर्षों बाद भी कोई भी सरकार देश के अन्नदाता किसान की दशा नहीं सुधार सकी। उन्होंने एलान किया कि समूह भरातरी जत्थेबंदियों को साथ लेकर किसानों के पक्ष में एक बड़ा जेहाद छेड़ा जाएगा। उन्होंने खुदकुशी कर चुके किसानों को तुरंत योग मुआवजा देने की मांग की।