{"_id":"5a4541a54f1c1b3c3d8c072d","slug":"former-hockey-player-pargat-singh-on-drugs-problem-in-punjab","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"हरियाणा के यूथ ने दूध पीया और पंजाब वालों ने नशा: परगट सिंह ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हरियाणा के यूथ ने दूध पीया और पंजाब वालों ने नशा: परगट सिंह
सुशील गंभीर/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 29 Dec 2017 09:39 AM IST
विज्ञापन
Pargat Singh
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरियाणा के यूथ ने दूध पीया, पहलवान बने और मेडल लाए। लेकिन पंजाब का नौजवान नशे में डूब गया। ये कहना है ओलंपियन पूर्व हॉकी खिलाड़ी और मौजूदा समय में जालंधर कैंट से विधायक परगट सिंह का। पद्मश्री पुरस्कार से नवाजे गए प्रगट सिंह वीरवार को पंजाब यूनिवर्सिटी में नए बने एस्ट्रो टर्फ हॉकी स्टेडियम के उद्घाटन करने यहां आए थे।
इस दौरान जब उनसे पूछा गया कि पंजाब से अलग होकर हरियाणा बना, लेकिन अगर सिर्फ खेल की बात करें तो हरियाणा ने पंजाब को कहीं पीछे छोड़ दिया है। इस पर उन्होंने भी अफसोस जताया और आखिर उनके मन का गुबार बाहर निकल ही आया। उन्होंने कहा कि युवा होते ही जो हाथ में बीयर की बोतल पकड़ लेंगे, उनका भविष्य क्या होगा? उन्होंने कहा कि पंजाब की खेल नीति खराब नहीं है, लेकिन अब इस पर स्पोर्ट्स फॉर ऑल के नारे के साथ काम किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि ड्रग्स के मर्ज की दवा सिर्फ खेल ही है। खेलों में ज्यादा से ज्यादा भागीदारी बढ़ाई जाएगी। उन्होंने चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां नौ करोड़ युवाओं को खिलाया जाता है, तब नौ सौ बेहतरीन प्रतिभाएं सामने आती हैं। प्रगट सिंह के मुताबिक मुख्यमंत्री से भी उन्होंने खेल और खिलाड़ी को लेकर बातचीत की थी, इस पर बड़े स्तर पर काम चल रहा है। वे सिर्फ हॉकी ही नहीं, सभी खेलों को प्रमोट करेंगे।
विज्ञापन
बलबीर सिंह सीनियर ने भी ड्रग्स और डिस्टरबेंस को माना बड़ी वजह
एस्ट्रो टर्फ हॉकी स्टेडियम का उद्घाटन करने आए तीन बार के ओलंपिक गोल्ड विजेता और हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और कोच बलबीर सिंह सीनियर पंजाब यूनिवर्सिटी आए थे। उन्होंने भी पंजाब में ड्रग्स और डिस्टरबेंस को खेल में पिछड़ जाने की वजह माना।
विज्ञापन
इस दौरान जब उनसे पूछा गया कि पंजाब से अलग होकर हरियाणा बना, लेकिन अगर सिर्फ खेल की बात करें तो हरियाणा ने पंजाब को कहीं पीछे छोड़ दिया है। इस पर उन्होंने भी अफसोस जताया और आखिर उनके मन का गुबार बाहर निकल ही आया। उन्होंने कहा कि युवा होते ही जो हाथ में बीयर की बोतल पकड़ लेंगे, उनका भविष्य क्या होगा? उन्होंने कहा कि पंजाब की खेल नीति खराब नहीं है, लेकिन अब इस पर स्पोर्ट्स फॉर ऑल के नारे के साथ काम किया जाएगा।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि ड्रग्स के मर्ज की दवा सिर्फ खेल ही है। खेलों में ज्यादा से ज्यादा भागीदारी बढ़ाई जाएगी। उन्होंने चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां नौ करोड़ युवाओं को खिलाया जाता है, तब नौ सौ बेहतरीन प्रतिभाएं सामने आती हैं। प्रगट सिंह के मुताबिक मुख्यमंत्री से भी उन्होंने खेल और खिलाड़ी को लेकर बातचीत की थी, इस पर बड़े स्तर पर काम चल रहा है। वे सिर्फ हॉकी ही नहीं, सभी खेलों को प्रमोट करेंगे।
विज्ञापन
बलबीर सिंह सीनियर ने भी ड्रग्स और डिस्टरबेंस को माना बड़ी वजह
एस्ट्रो टर्फ हॉकी स्टेडियम का उद्घाटन करने आए तीन बार के ओलंपिक गोल्ड विजेता और हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और कोच बलबीर सिंह सीनियर पंजाब यूनिवर्सिटी आए थे। उन्होंने भी पंजाब में ड्रग्स और डिस्टरबेंस को खेल में पिछड़ जाने की वजह माना।
Pargat Singh
सरदार बलबीर सिंह के मुताबिक जब एक पीढ़ी खराब होती है, तो अगली कई पीढ़ियों तक इसका असर रहता है। वहीं पंजाब की खेल पॉलिसी पर उन्होंने कहा कि पॉलिसी अच्छी है, उन्होंने खुद इसे बनाया है। बस जरूरत है तो इसे ईमानदारी से इस्तेमाल करने की। खिलाड़ी को अगर प्रोत्साहन मिलता है, तो वह उसके लिए टोनिक का काम करता है।
गोल्ड बॉयोपिक नहीं, 1948 ओलंपिक की कहानी
हॉकी पर एक फिल्म बन रही है। चर्चाएं हैं कि यह बलबीर सिंह सीनियर की बॉयोपिक है लेकिन उन्होंने इस बात से इनकार किया। बलबीर सिंह ने कहा कि यह उनकी नहीं, बल्कि 1948 के ओलंपिक की कहानी है। आजादी के बाद पहली बार इंटरनेशनल स्तर पर तिरंगा लहराया था, क्योंकि भारतीय हॉकी टीम ने इंग्लैंड को फाइनल में हराया था।
वह उस टीम के भागीदार थे। उन्होंने कहा कि हॉकी को फिल्म की जरूरत थी। जब उनसे पूछा गया कि फिल्म में उनका किरदार निभा रहे अक्षय कुमार ने क्या कभी उनसे 1984 के दौरान के समय की कोई जानकारी नहीं ली, वे इस बात को टाल गए। बस इतना ही कहा कि हाल ही में अक्षय से मुलाकात हुई थी और कुछ हल्की फुल्की बातें हुईं।
दो दिन लापता थे बच्चे, हुआ था ये खुलासा
बता दें कि 21 नवंबर को पंचकूला के मोरनी के जंगलों में तीन बच्चों के शव मिले थे। पुलिस के मुताबिक इन बच्चों की हत्या उनके चाचा जगदीप मलिक ने उनके पिता साेनू मलिक ने कराई थी। जगदीप से पूछताछ में खुलासा हुआ था कि पिता का दूसरी महिला से अवैध संबंध था और उससे शादी के लिए बच्चों को रास्ते से हटाना चाहता था। यह भी खुलासा हुआ था कि वह बाद में पत्नी सुमन को भी इस तरह मारना चाहता था कि पूरा मामला आत्महत्या लगे।अब ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस सोनू मलिक को निर्दोष करार दे रही है।
गोल्ड बॉयोपिक नहीं, 1948 ओलंपिक की कहानी
हॉकी पर एक फिल्म बन रही है। चर्चाएं हैं कि यह बलबीर सिंह सीनियर की बॉयोपिक है लेकिन उन्होंने इस बात से इनकार किया। बलबीर सिंह ने कहा कि यह उनकी नहीं, बल्कि 1948 के ओलंपिक की कहानी है। आजादी के बाद पहली बार इंटरनेशनल स्तर पर तिरंगा लहराया था, क्योंकि भारतीय हॉकी टीम ने इंग्लैंड को फाइनल में हराया था।
वह उस टीम के भागीदार थे। उन्होंने कहा कि हॉकी को फिल्म की जरूरत थी। जब उनसे पूछा गया कि फिल्म में उनका किरदार निभा रहे अक्षय कुमार ने क्या कभी उनसे 1984 के दौरान के समय की कोई जानकारी नहीं ली, वे इस बात को टाल गए। बस इतना ही कहा कि हाल ही में अक्षय से मुलाकात हुई थी और कुछ हल्की फुल्की बातें हुईं।
दो दिन लापता थे बच्चे, हुआ था ये खुलासा
बता दें कि 21 नवंबर को पंचकूला के मोरनी के जंगलों में तीन बच्चों के शव मिले थे। पुलिस के मुताबिक इन बच्चों की हत्या उनके चाचा जगदीप मलिक ने उनके पिता साेनू मलिक ने कराई थी। जगदीप से पूछताछ में खुलासा हुआ था कि पिता का दूसरी महिला से अवैध संबंध था और उससे शादी के लिए बच्चों को रास्ते से हटाना चाहता था। यह भी खुलासा हुआ था कि वह बाद में पत्नी सुमन को भी इस तरह मारना चाहता था कि पूरा मामला आत्महत्या लगे।अब ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस सोनू मलिक को निर्दोष करार दे रही है।