आईडी स्वामी को राजकीय सम्मान के साथ दी अंतिम विदाई, मुख्यमंत्री ने भी पार्थिव शरीर को दिया कंधा
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पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री आईडी स्वामी का सोमवार को शहर के अर्जुन गेट स्थित शिवपुरी श्मशान घाट में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। आईडी स्वामी के पार्थिव शरीर को उनके पुत्र राजेंद्र स्वामी ने मुखाग्नि दी।
इस दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल के अलावा विधानसभा स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता, गृहमंत्री अनिल विज, सांसद संजय भाटिया, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला, घरौंडा के विधायक हरविन्द्र कल्याण, नीलोखेड़ी के विधायक धर्मपाल गोंदर, पुंडरी के विधायक रणधीर सिंह गोलन, महीपाल ढांडा, पूर्व मंत्री राम बिलास शर्मा, पूर्व मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव कृष्ण बेदी, पूर्व विधायक भगवानदास कबीर पंथी, प्रदेश महामंत्री एडवोकेट वेदपाल, भाजपा जिला अध्यक्ष जगमोहन आंनद, मेयर रेनू बाला गुप्ता, भाजपा नेता अशोक सुखीजा, आईजी योगेंद्र सिंह नेहरा, डीसी विनय प्रताप सिंह, पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार भोरिया और बड़ी संख्या में शहर लोग मौजूद रहे।
इससे पूर्व, मुख्यमंत्री करीब 11 बजे दिवंगत आईडी स्वामी के निवास स्थान सेक्टर-13 में पहुंचे और उन्होंने आई.डी. स्वामी के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन कर शोकाकुल परिवार के साथ दुख प्रकट किया। सीएम ने कहा कि आईडी स्वामी के निधन से भाजपा के साथ-साथ समाज को एक बड़ी क्षति पहुंची है, जिसकी भरपाई करना नामुमकिन है। शवयात्रा शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री ने आईडी स्वामी को कंधा भी दिया। इस दौरान उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गई।
विलक्षण प्रतिभा के धनी थे आईडी स्वामी
विलक्षण प्रतिभा के धनी आईडी स्वामी का जन्म 10 अगस्त 1929 को अंबाला जिला के गांव मोहड़ा में हुआ था। उन्होंने गांव के स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा ली और फिर कॉलेज की शिक्षा अंबाला कैंट में ली। पंजाब यूनिवर्सिटी से एमए, एलएलबी की। इसके बाद पंजाब सिविल सर्विस में चयनित हुए और सिटी मजिस्ट्रेट तथा एसडीएम जैसे पदों पर रहे।
पदोन्नति पाकर आईएएस बने और सिरसा व हिसार में उपायुक्त के पद पर तैनात रहे। सर्विस से रिटायर होने के बाद वर्ष 1990 में भाजपा में शामिल हुए और फिर 1996 में पहली बार चुनाव जीतकर करनाल के सांसद बने। उन्होंने चुनाव में कांग्रेस के चिरंजी लाल शर्मा को पराजित किया।
इसके बाद वर्ष 1996 में पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल से हार गए। फिर 1999 में चुनाव मे भजन लाल को रिकॉर्ड मतों से हरा कर विजयी रहे और उन्हें केन्द्र में गृह राज्य मंत्री का पद मिला। इसके बाद वे कांग्रेस के अरविंद शर्मा से हार गए। पिछले कई वर्षों से अधिक उम्र की वजह से उन्होंने राजनीतिक कार्यक्रमों से दूरी बनाई हुई थी।
यहां भी निधन पर शोक जताने पहुंचे सीएम
इसके पश्चात मुख्यमंत्री जाटो गेट स्थित पार्षद युद्धवीर सैनी के घर गए और पार्षद के ताऊ 57 वर्षीय रमेश चंद सैनी के निधन पर शोक प्रकट किया। रमेश चंद सैनी कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। वे अपने पीछे पत्नी रानी, एक बेटा व दो बेटियां छोड़ गए हैं। इसके पश्चात मुख्यमंत्री मनोहर लाल भाजपा नेता अशोक भंडारी के भाई सुरेश भंडारी (87) के निधन पर उनके संतनगर स्थित आवास पर गए और शोक प्रकट किया।
उन्होंने भंडारी परिवार के सदस्यों के साथ बैठकर उन्हें सांत्वना दी। दिवंगत सुरेश भंडारी आरएसएस से लंबे समय तक जुड़े रहे। मुख्यमंत्री मनोहर लाल इसके बाद वरिष्ठ पत्रकार देवेंद्र गांधी की माता (62) प्रेमलता के आकस्मिक निधन पर दुख प्रकट करने रामनगर स्थित उनके आवास पर गए।