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Chandigarh: बिना मंजूरी वाले पद पर किया था काम, SPIC के पूर्व प्रमुख की नौकरी से निकाला, 25 लाख भरने के आदेश
Sat, 24 Sep 2022 11:47 AM IST
निवेदिता वर्मा
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 24 Sep 2022 11:47 AM IST
सार
जांच में यह भी पाया गया कि स्पिक के पूर्व केंद्र प्रमुख अनिल पराशर ने कंप्यूटर हार्डवेयर, डेटा कार्ड, ट्रैवल, मोबाइल हैंडसेट आदि की खरीद के लिए कई प्रतिपूर्ति व खर्चों का क्लेम लिया, जिसके वह पहले दिन से हकदार भी नहीं थे। विभाग ने ये खर्चे 1,92,448 रुपये आंके हैं।
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सोसाइटी फॉर प्रमोशन ऑफ आईटी इन चंडीगढ़
- फोटो : www.spicindia.com
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विस्तार
चंडीगढ़ यूटी प्रशासन के आईटी विभाग में हड़कंप मचा है। सोसाइटी फॉर प्रमोशन ऑफ आईटी इन चंडीगढ़ (स्पिक) के पूर्व केंद्र प्रमुख अनिल पराशर को स्पिक के सीईओ और आईटी निदेशक रूपेश कुमार ने शोकॉज नोटिस देने के चार दिन बाद ही नौकरी से निकाल दिया है। आरोप है कि अधिकारियों को गलत जानकारी देकर उन्होंने तीन साल तक उस पद का वेतन उठाया, जो उनके लिए था ही नहीं।
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आईटी निदेशक रूपेश कुमार ने दो सितंबर को अनिल पराशर को एक शोकॉज नोटिस जारी किया। इसमें लिखा कि अनिल पराशर ने कैपेसिटी बिल्डिंग अकाउंट (बीडीओ) से कम्पीटेंट अथॉरिटी से बिना किसी वित्तीय मंजूरी के अगस्त 2015 से सितंबर 2018 तक वेतन के रूप में 23 लाख 48 हजार 700 रुपये वेतन के रूप में लिए, जो कि नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (एनईजीडी) दिशा-निर्देश के अनुसार इस उद्देश्य के लिए नहीं थे।
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यह भी पढ़ें : हाईकोर्ट पहुंचा मामला: वकील से छेड़छाड़ के आरोप में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पर केस दर्ज
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यह भी लिखा कि अनिल पराशर ने अधिकारियों को एनईजीडी के दिशा-निर्देश की गलत जानकारी दी। जिस राज्य के ई-गवर्नेंस मिशन टीम (एसईएमटी) प्रमुख के ऑफिशिएटिंग चार्ज की अंतरिम व्यवस्था वह देख रहे थे, वह डेपुटेशन के अधिकारी के लिए थी। उस अधिकारी की नियुक्ति एनईजीडी की तरफ से की जानी थी। उन्होंने अपने लाभ के लिए नियमित एसईएमटी प्रमुख के लिए फाइल भी आगे नहीं बढ़ाई। जांच में यह भी पाया गया कि उन्होंने कंप्यूटर हार्डवेयर, डेटा कार्ड, ट्रैवल, मोबाइल हैंडसेट आदि की खरीद के लिए कई प्रतिपूर्ति व खर्चों का क्लेम लिया, जिसके वह पहले दिन से हकदार भी नहीं थे। विभाग ने ये खर्चे 1,92,448 रुपये आंके हैं।
नवंबर 2017 में पद खत्म, फिर भी 10 महीने तक लेते रहे सैलरी
नोटिस में लिखा है कि एनईजीडी ने 6 नवंबर 2017 को एसईएमटी प्रमुख का पद खत्म कर दिया था, लेकिन फिर भी वह कम्पीटेंट अथॉरिटी की मंजूरी के बिना सितंबर 2018 तक वेतन लेते रहे। ये सभी आरोप लगाते हुए आदेश में कहा गया कि वह 25 लाख 41 हजार 148 रुपये विभाग के खाते में सात दिन में जमा कराएं, नहीं तो कार्रवाई की जाएगी। वेतन भी रोकने को कहा गया। अपनी बात रखने के लिए 15 दिन का समय दिया गया। हालांकि विभाग ने इस शोकॉज नोटिस जारी करने के चार दिन बाद ही अनिल पराशर को नौकरी से निकाल दिया।नोटिस में जो लिखा, उसमें कोई सच्चाई नहीं : अनिल पराशर
सोसाइटी फॉर प्रमोशन ऑफ आईटी इन चंडीगढ़ (स्पिक) के पूर्व केंद्र प्रमुख अनिल पराशर ने कहा कि शोकॉज नोटिस में जो कुछ लिखा गया है, उसमें कोई सच्चाई नहीं है। कम्पीटेंट अथॉरिटी से साइन होने के बाद ही बीडीओ की तरफ से पेमेंट की जाती है। अधिकारियों को मिसलीड करने की जो बात कही गई है, वह पूरी तरह से गलत है। अनिल पराशर ने कहा कि शोकॉज नोटिस के बाद विभागीय जांच होती है। उसमें दोषी पाए जाने के बाद ही कार्रवाई की जाती है, लेकिन इस मामले में नियमों का पालन नहीं किया गया। शोकॉज नोटिस में 15 दिन का समय लिखा गया था, वह दिन भी उन्हें नहीं दिए गए। दो सितंबर को नोटिस जारी हुआ, तीन को उन्हें मिला और छह सितंबर को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। बताया कि उन्होंने वह कागज मांगे जिसमें साबित होता हो कि वे गलत हैं। उन कागजों की फोटोकॉपी मांगी, लेकिन उन्हें नहीं दी गई। सारी बात लिखित में अधिकारियों को भी कही है।पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा मामला
नौकरी से बर्खास्त करने के बाद अनिल पराशर ने आदेश को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी है। अदालत ने चंडीगढ़ प्रशासन को नोटिस भी जारी किया है। अनिल पराशर ने कहा कि अब विभाग को अदालत में जवाब देना होगा। क्योंकि मामला अब हाईकोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए वह ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहते।नियमों के तहत कार्रवाई की गई
जो गलत है, मैं उसके खिलाफ हूं। नियमों के तहत ही कार्रवाई की गई है। अब मामला पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कह सकता। - रूपेश कुमार, सीईओ स्पिक व आईटी निदेशक
बदले की भावना से कार्रवाई की गई
मेरे खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई की है। शोकॉज नोटिस के बाद विभागीय जांच होती है। उसमें दोषी पाए जाने के बाद ही कार्रवाई की जाती है, लेकिन इस मामले में नियमों का पालन नहीं किया गया। - अनिल पराशर, पूर्व केंद्र प्रमुख, स्पिक