सरकारी स्कूलों में दो लाख दाखिले घटे: मौजूदा व पूर्व शिक्षा मंत्री ट्विटर पर भिड़े, एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया, सियासी माहौल गर्माया
इस साल प्री-प्राइमरी से 12वीं क्लास तक कुल 28.36 लाख दाखिले हुए हैं, जबकि 2021-22 में दाखिलों की संख्या 30.40 लाख थी। इस तरह से पिछले साल के मुकाबले इस साल दाखिलों में करीब पौने सात प्रतिशत की कमी आई है, जबकि पिछले साल 10.53 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। वहीं इससे पहले दाखिलों में वृद्धि 14 प्रतिशत थी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पंजाब के स्कूलों में दिल्ली मॉडल की तर्ज पर शिक्षा स्तर ऊंचा उठाने के दावे कर आप सत्ता में आई लेकिन पार्टी की सरकार के पहले ही साल में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 2.04 लाख दाखिले कम हुए हैं। उधर, इस मुद्दे को लेकर पंजाब में सियासी माहौल गरमा गया है। प्रदेश के मौजूदा शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस और पूर्व शिक्षा मंत्री परगट सिंह के बीच ट्विटर पर जंग छिड़ गई।
परगट सिंह ने लिखा है कि दिल्ली मॉडल पंजाब में धराशायी हो गया है। आप सरकार के पहले ही साल में पंजाब के स्कूलों में दाखिला दो लाख तक कम हो गया है। वर्ष 2016 से पंजाब के स्कूलों में दाखिलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही थी। इससे कांग्रेस सरकार में शिक्षा क्षेत्र में की गई मेहनत खतरे में पड़ गई है।
पूर्व शिक्षा मंत्री के इस ट्वीट के सामने आते ही आप के मौजूदा शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस भी मैदान में उतर आए। उन्होंने लिखा कि अपनी नाकामियों को किसी अन्य के कंधों पर मत डालें। हर वर्ष 14 नवंबर से स्कूलों में दाखिले बढ़ाने के लिए पंजाब में विशेष अभियान शुरू किया जाता है लेकिन पिछले साल यह अभियान शुरू नहीं हो पाया और उस समय परगट सिंह पंजाब के शिक्षा मंत्री थे। यही नहीं पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की लापरवाही के कारण इस साल बच्चों की किताबें समय पर छप नहीं सकीं।
यह हैं दाखिले के आंकड़े
इस साल प्री-प्राइमरी से 12वीं क्लास तक कुल 28.36 लाख दाखिले हुए हैं, जबकि 2021-22 में दाखिलों की संख्या 30.40 लाख थी। इस तरह से पिछले साल के मुकाबले इस साल दाखिलों में करीब पौने सात प्रतिशत की कमी आई है, जबकि पिछले साल 10.53 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। वहीं इससे पहले दाखिलों में वृद्धि 14 प्रतिशत थी।
जानकारी के मुताबिक छठी से 12वीं तक इस साल पिछली बार के 15.73 लाख के मुकाबले 14.51 लाख बच्चों ने दाखिला लिया है। इन आंकड़ों से साफ है कि पंजाब के स्कूलों में इस साल छठी से 12वीं तक 1.22 लाख कम बच्चों ने दाखिला लिया है। उधर प्री-प्राइमरी से पांचवीं कक्षा तक इस बार 13.85 लाख बच्चों ने दाखिला लिया है। इसकी तुलना में पिछले साल इन कक्षाओं में कुल 14.67 लाख बच्चे दाखिल हुए थे। इस तरह से इन कक्षाओं में 82 हजार दाखिले कम हुए हैं।
क्वालिटी एजुकेशन और अध्यापकों की भर्ती पर ध्यान दे सरकार: डीटीएफ
डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (डीटीएफ) के प्रदेश प्रधान विक्रम देव सिंह का कहना है कि स्कूलों में बच्चों के दाखिलों को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने के बजाय पंजाब सरकार को स्कूलों में बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन और अध्यापकों की भर्ती पर ध्यान देना चाहिए। अगर यह हो गया तो दाखिले खुद व खुद बढ़ने लगेंगे।
दाखिले कम होने के कारण
अध्यापक नेता गगन राणू और डीटीएफ प्रदेश प्रधान विक्रम देव सिंह के मुताबिक दिसंबर 2016 के बाद पंजाब के प्राइमरी स्कूलों में अध्यापकों की कोई भर्ती नहीं हुई। अध्यापकों की अध्यापन के अलावा अन्य ड्यूटियां लगाई जाती हैं, जिससे भी बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। कोरोना काल में सरकारी स्कूलों में दाखिले के लिए जरूरी स्थानांतरण प्रमाण पत्र लेने की शर्त हटा दी थी, उस समय बड़ी संख्या में बच्चे निजी स्कूलों से सरकारी में आए। उस समय निजी स्कूलों में फीस को लेकर विवाद चल रहा था लेकिन अब जब लोगों की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई है तो उन्होंने दोबारा निजी स्कूलों की तरफ रुख किया है।