पंजाब में कटेंगे नहीं, बचेंगे पीपल, बरगद और आम के पेड़, जानें- वन विभाग की खास पहल
पंजाब के ‘दरख्तों’ (पुराने पेड़) को वन विभाग बचाएगा। इसके लिए प्रत्यारोपण की एक खास तकनीक को अपनाया जाएगा। इस काम को बेहतर अंजाम तक पहुंचाने के लिए वन विभाग ने एक कमेटी का गठन किया है, जिसमें विभागीय अधिकारियों सहित इस तकनीक के माहिर और पर्यावरणविदों को भी शामिल किया है। कमेटी जल्द ही सूबे के काटे जाने वाले दरख्तों को बचाने के लिए चिन्हीकरण का कार्य शुरू करेगी।
पंजाब में हर साल विकास के नाम पर लाखों हरे पेड़ों को काटा जा रहा है। यदि हम आंकड़ों की बात करें तो पिछले पांच सालों में लगभग 20,0000 हरे पेड़ों को विकास के नाम पर काटा जा चुका है। ऐसे में इन जीवनदायी दरख्तों को बचाने के लिए चंडीगढ़ सहित दूसरे राज्यों से सबक लेते हुए रि-ट्रांसप्लांट कमेटी गठित करने का निर्णय किया
यह कमेटी अपनी देखरेख और सलाह पर राज्य के स्थानीय प्रजाति के वृक्षों के साथ ही पीपल, बरगद और फलदार पेड़ों को रि-ट्रांसप्लांट करवाएगी। चूंकि पंजाब के लिए यह प्रयोग नया होगा इसलिए छह सदस्यीय कमेटी में चार वरिष्ठ आईएफएस अधिकारियों और दो सलाहकार के रूप में वृक्षों के रि-ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ और पर्यावरणविद को शामिल किया गया है।
अब कमेटी जल्द ही सूबे में होने वाले विकास कार्यों की जद में आने वाले दरख्तों को बचाने के लिए काम शुरू करने जा रही है। कमेटी में शामिल अधिकारी भी संभावना प्रकट कर रहे हैं कि काटे जाने वाले वृक्षों में 20 प्रतिशत को वह रि-ट्रांसप्लांट के जरिए बचा पाएंगे।
इनकी देखरेख में होगा दरख्तों का रि-ट्रांसप्लांट
रि-ट्रांसप्लांट कमेटी में एनएस रंधावा को चेयरमैन नियुक्त किया गया है। इसके अतिरिक्त आईएफएस संजीव तिवारी, सुरजीत सिंह सहोता, जरनैल सिंह को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। सलाहकार के रूप में हरियाणा के पूर्व पीसीसीएफ और एफआरआई (देहरादून) के पूर्व डायरेक्टर पीपी भोजवेद और आर्गेनिक शेयरिंग के संस्थापक राहुल महाजन को नियुक्त किया गया है।
पंजाब के वन विभाग की यह अच्छी पहल है। इस पहले के जरिए पंजाब में हर साल 10 हजार से अधिक दरख्तों को बचाने में विभाग को सफलता मिलेगी। - राहुल महाजन, सलाहकार, रि-ट्रांसप्लांट कमेटी, पंजाब
सूबे में सड़क चौड़ीकरण और नहरों के रास्तों को पक्का करने में कई पेड़ों को काटना पड़ता है। विभाग इन पेड़ों को बचाने के लिए रि-ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया को अपनाने जा रहा है। हम इस प्रक्रिया के जरिए 20 प्रतिशत दरख्तों को बचाने में सफलता जरूर हासिल कर पाएंगे। - प्रवीन कुमार, एडिशनल पीसीसीएफ, वन विभाग