{"_id":"610eb01c8ebc3e73d357f023","slug":"fishes-found-dead-in-sukhna-lake-department-says-died-due-to-lack-of-oxygen-chandigarh-news-pkl422752080","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुखना लेक में मृत मिलीं मछलियां, विभाग का तर्क- ऑक्सीजन की कमी से मरीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुखना लेक में मृत मिलीं मछलियां, विभाग का तर्क- ऑक्सीजन की कमी से मरीं
विज्ञापन
चंडीगढ़। सुखना लेक में पिछले कुछ दिनों से मछलियां मृत पाई जा रही हैं। इस वजह से लेक के कुछ हिस्सों में बदबू भी फैल गई है। शुक्रवार को भी कुछ मछलियां मिली थीं और शनिवार को भी चार मृत मछलियां मिली। इस पर मत्स्य पालन विभाग सतर्क हो गया है। विभाग का कहना है कि इससे लोगों को घबराने की जरूरत नही है। बारिश के मौसम में कुछ मछलियों का मरना साधारण है। विभाग का तर्क है कि पानी का बहाव तेज होने और ऑक्सीजन की कमी के चलते मछलियों की मौत हो सकती है।
सुखना लेक में चार साल पहले भी मछलियों के मरने की खबरें सामने आईं थी। इसके बाद विभाग की ओर से मरी हुई मछलियों के नमूने लिए गए थे। मछलियों के मरने से मिनी क्रूज और बोटिंग को कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया था। पशुपालन एवं मत्स्य पालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. कंवरजीत सिंह का कहना है कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। पहाड़ों में काफी बारिश हुई है और वहां से पानी के साथ मलबा भी काफी बहकर आता है, इसलिए पानी में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। ऐसे में मछलियां मर सकती हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि वह अगले कुछ दिनों तक निगरानी रखेंगे। अगर कुछ भी असाधारण पाया जाता है तो मृत मछलियों के नमूने लेकर जांच की जाएगी। गौरतलब है कि पहाड़ियों से बारिश के दौरान काफी मात्रा में गाद रही है और यह सूखना लेक में भर रही है। जंगली घास को निकालने के लिए मुंबई से एक मशीन मंगवाई गई है जो घास को निकाल रही है। लेकिन पानी के कम होने के बाद ही लेक में से गाद निकालने का काम संभव होगा।
खतरे के निशान के करीब पहुंचा सुखना का जलस्तर
पहाड़ों पर हो रही बारिश की वजह से सुखना लेक के जलस्तर में शनिवार को 1162.10 फुट तक पहुंच गया, जो खतरे के निशान से महज 0.9 फुट की दूरी पर है। खतरे का निशान 1163 फुट पर है। ऐसे में अगर जलस्तर खतरे के निशान पर पहुंचा तो सुखना के फ्लड गेट को खोलने की नौबत आ जाएगी। यही कारण है कि लेक पर अधिकारियों की तैनाती के साथ ही हर घंटे के बाद जलस्तर बढ़ने की जानकारी ली जा रही है। यूटी प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि सुखना लेक के बढ़ते जलस्तर के चलते लेक पर विभाग के कर्मचारियों की पहले ही तैनाती कर दी गई है। पंजाब को भी इसे लेकर कई बार अलर्ट जारी किया गया है। पिछले वर्ष 23 अगस्त को भारी बारिश की वजह से सुखना लेक में जल स्तर खतरे के निशान पर पहुंच गया था। इसके बाद प्रशासन को सुखना के फ्लड गेट खोलने पड़े थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
सुखना लेक में चार साल पहले भी मछलियों के मरने की खबरें सामने आईं थी। इसके बाद विभाग की ओर से मरी हुई मछलियों के नमूने लिए गए थे। मछलियों के मरने से मिनी क्रूज और बोटिंग को कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया था। पशुपालन एवं मत्स्य पालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. कंवरजीत सिंह का कहना है कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। पहाड़ों में काफी बारिश हुई है और वहां से पानी के साथ मलबा भी काफी बहकर आता है, इसलिए पानी में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। ऐसे में मछलियां मर सकती हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि वह अगले कुछ दिनों तक निगरानी रखेंगे। अगर कुछ भी असाधारण पाया जाता है तो मृत मछलियों के नमूने लेकर जांच की जाएगी। गौरतलब है कि पहाड़ियों से बारिश के दौरान काफी मात्रा में गाद रही है और यह सूखना लेक में भर रही है। जंगली घास को निकालने के लिए मुंबई से एक मशीन मंगवाई गई है जो घास को निकाल रही है। लेकिन पानी के कम होने के बाद ही लेक में से गाद निकालने का काम संभव होगा।
विज्ञापन
खतरे के निशान के करीब पहुंचा सुखना का जलस्तर
पहाड़ों पर हो रही बारिश की वजह से सुखना लेक के जलस्तर में शनिवार को 1162.10 फुट तक पहुंच गया, जो खतरे के निशान से महज 0.9 फुट की दूरी पर है। खतरे का निशान 1163 फुट पर है। ऐसे में अगर जलस्तर खतरे के निशान पर पहुंचा तो सुखना के फ्लड गेट को खोलने की नौबत आ जाएगी। यही कारण है कि लेक पर अधिकारियों की तैनाती के साथ ही हर घंटे के बाद जलस्तर बढ़ने की जानकारी ली जा रही है। यूटी प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि सुखना लेक के बढ़ते जलस्तर के चलते लेक पर विभाग के कर्मचारियों की पहले ही तैनाती कर दी गई है। पंजाब को भी इसे लेकर कई बार अलर्ट जारी किया गया है। पिछले वर्ष 23 अगस्त को भारी बारिश की वजह से सुखना लेक में जल स्तर खतरे के निशान पर पहुंच गया था। इसके बाद प्रशासन को सुखना के फ्लड गेट खोलने पड़े थे।
विज्ञापन