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ट्विटर बम फोड़ने वाले इस IAS ने कायम की मिसाल, Whatsapp पर भेजा समन
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 11 Apr 2017 09:11 AM IST
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आईएएस अशोक खेमका
देश में पहली बार एक अनोखी मिसाल कायम हुई। ट्विटर बम फोड़कर राजनीति के गलियारों में अकसर खलबली मचाने वाले एक आईएएस ने यह काम किया। इसके बाद अब व्हाट्सऐप केवल चैटिंग का ही माध्यम नहीं रह गया, बल्कि कानून का एक मीडियम भी बन गया है।
दरअसल, हरियाणा के वित्त आयुक्त आईएएस अशोक खेमका की अदालत ने प्रॉपर्टी विवाद के एक केस में एक पक्ष को वाट्सऐप के जरिए समन भेजा है। यही नहीं डिलिवरी मैसेज को बतौर प्रमाण कोर्ट में पेश किया। देश में अपनी तरह का यह पहला मामला है। वहीं व्हाट्सऐप के जरिए हुई इस पहल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के सपने को उड़ान देने वाली मानी जा रही है।
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दरअसल, हरियाणा के वित्त आयुक्त आईएएस अशोक खेमका की अदालत ने प्रॉपर्टी विवाद के एक केस में एक पक्ष को वाट्सऐप के जरिए समन भेजा है। यही नहीं डिलिवरी मैसेज को बतौर प्रमाण कोर्ट में पेश किया। देश में अपनी तरह का यह पहला मामला है। वहीं व्हाट्सऐप के जरिए हुई इस पहल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के सपने को उड़ान देने वाली मानी जा रही है।
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ये है पूरा मामला
अशोक खेमका
- फोटो : अशोक खेमका
हरियाणा के हिसार जिले में एक गांव के तीन भाइयों के बीच संपत्ति का विवाद चल रहा है। मामला वित्त आयुक्त अशोक खेमका की कोर्ट में पहुंचा तो उन्होंने 6 अप्रैल को व्हाट्सऐप के जरिए एक पक्ष को पेशी के लिए समन भिजवाया।
बताया जा रहा है कि कोर्ट को व्हाट्सऐप पर समन इसलिए भेजना पड़ा, क्योंकि केस का एक पक्ष अपना गांव छोड़कर नेपाल की राजधानी काठमांडू रहने लगा है। वह जिस गांव में रहता था, उसका स्थानीय पता अदालत के पास अपडेट नहीं कराया गया।
दूसरे पक्ष को इसकी जानकारी भी नहीं थी। सिर्फ मोबाइल फोन नंबर होने की वजह से कोर्ट ने उसे व्हाट्सऐप के जरिए समन भिजवा दिया। हालांकि उस पक्ष ने कोर्ट में पेश होने से न सिर्फ इनकार कर दिया, बल्कि अपना काठमांडू का पता भी देने से मना कर दिया है।
बताया जा रहा है कि कोर्ट को व्हाट्सऐप पर समन इसलिए भेजना पड़ा, क्योंकि केस का एक पक्ष अपना गांव छोड़कर नेपाल की राजधानी काठमांडू रहने लगा है। वह जिस गांव में रहता था, उसका स्थानीय पता अदालत के पास अपडेट नहीं कराया गया।
दूसरे पक्ष को इसकी जानकारी भी नहीं थी। सिर्फ मोबाइल फोन नंबर होने की वजह से कोर्ट ने उसे व्हाट्सऐप के जरिए समन भिजवा दिया। हालांकि उस पक्ष ने कोर्ट में पेश होने से न सिर्फ इनकार कर दिया, बल्कि अपना काठमांडू का पता भी देने से मना कर दिया है।
समन की डिलिवरी रिपोर्ट के प्रिंटआउट को साक्ष्य माना जाएगा
आईएएस अशोक खेमका
- फोटो : file photo
कोर्ट ने अपने आदेश में ये भी कहा, स्थानीय पता जरूरी नहीं की हमेशा स्थानीय रहे, लेकिन ईमेल और मोबाइल फोन नंबर इसकी तुलना में ज्यादा स्थायी होते हैं। कानून कोई जीवाश्म जैसा नहीं है, ये जीवित है और इसे भी तकनीक के हिसाब से बदलना चाहिए। इसलिए फोन या ईमेल से भी समन भेजा जा सकता है।
ये भी कहा गया कि व्हाट्सएप मैसेंजर पर भेजे गए समन की डिलिवरी रिपोर्ट के प्रिंटआउट को साक्ष्य के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाएगा। मालूम हो कि हरियाणा के वरिष्ठ आईएएस अशोक खेमका देश के ईमानदार आईएएस ऑफिसर माने जाते हैं। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा के कथित जमीन घोटाले का पर्दाफाश किया था।
ये भी कहा गया कि व्हाट्सएप मैसेंजर पर भेजे गए समन की डिलिवरी रिपोर्ट के प्रिंटआउट को साक्ष्य के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाएगा। मालूम हो कि हरियाणा के वरिष्ठ आईएएस अशोक खेमका देश के ईमानदार आईएएस ऑफिसर माने जाते हैं। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा के कथित जमीन घोटाले का पर्दाफाश किया था।