फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Highcourt important decision in death of woman in accident

Highcourt: गृह प्रबंधक होती है महिला, मृत्यु की स्थिति में मुआवजा तय करने के लिए नौ हजार आय मानना उचित

Sun, 04 Aug 2024 08:02 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Sun, 04 Aug 2024 08:02 PM IST
सार

जालंधर निवासी महिला की हादसे में मौत के बाद मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल जालंधर ने उसे गृहिणी मानते हुए उसकी आय 4500 रुपये तय की थी। हाईकोर्ट ने इस मामले में अहम आदेश जारी कर मुआवजा राशि बढ़ाने का आदेश दिया है।

विज्ञापन
Highcourt important decision in death of woman in accident
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मोटर वाहन दुर्घटना में महिला की मौत की स्थिति में मुआवजा तय करने को लेकर हाईकोर्ट ने अहम आदेश जारी किया है। हाईकोर्ट ने कहा कि महिला गृह प्रबंधक होती है और ऐसे में उसकी मासिक आय नौ हजार मानी जानी चाहिए। इस आदेश में हाईकोर्ट ने मुआवजे की राशि में छह लाख रुपये की बढ़ोतरी की है।
विज्ञापन


जालंधर निवासी हरबंस लाल ने एडवोकेट विकास चतरथ के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए अपनी पत्नी सुनीता की वाहन हादसे में हुई मृत्यु के लिए मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल जालंधर की ओर से तय मुआवजा को चुनौती दी थी। सुनीता की 2016 में हादसे में मौत हो गई थी। ट्रिब्यूनल ने 2017 में अपना फैसला सुनाते हुए सुनीता की आय गृहिणी होने के नाते 4500 रुपये मानी थी। ट्रिब्यूनल ने कुल मिलाकर मुआवजे के तौर पर 7,44,000 तय किए थे।
विज्ञापन

ट्रिब्यूनल ने आय तय करने को त्रुटिपूर्ण माना

मुआवजा राशि को अपर्याप्त बताते हुए सुनीता के पति ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। हाई कोर्ट ने ट्रिब्यूनल की ओर से सुनीता की आय तय करने को त्रुटिपूर्ण माना है। हाईकोर्ट ने कहा कि एक महिला के उसके परिवार के प्रवृत्ति दी जाने वाली सेवाओं को पैसों में नहीं तोला जा सकता, हालांकि, गृहिणी की मौत से परिवार को हुए नुकसान की भरपाई के रूप में सम्मानजनक राशि तय करना आवश्यक हो जाता है। ट्रिब्यूनल ने महिला के परिवार में दिए गए योगदान के लिए उसकी मासिक आय 4500 रुपये तय की जो बहुत कम है। हाईकोर्ट ने इस राशि को बढ़ाकर प्रति माह नौ हजार रुपये मानने का निर्णय लिया। ऐसे में हाईकोर्ट ने पहले तय किए गए 7.44 लाख की मुआवजे की राशि में छह लाख रुपये और जोड़ने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed