{"_id":"6ac8009ee06f68041804570c","slug":"feet-danced-rhythms-resonated-and-folk-culture-shone-through-chandigarh-news-c-16-1-pkl1005-1144787-2026-10-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh News: थिरके कदम, गूंजे ताल और झलकी लोक संस्कृति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh News: थिरके कदम, गूंजे ताल और झलकी लोक संस्कृति
विज्ञापन
हरियाणवी लोक नृत्य और शास्त्रीय प्रस्तुतियों ने बांधा समांसंवाद न्यूज एजेंसी
चंडीगढ़। सेक्टर-23 के बाल भवन स्थित नवरंग थिएटर में वीरवार को हरियाणवी नृत्य और शास्त्रीय नृत्य का आयोजन हुआ। यह आयोजन चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी की ओर से हो रहा है। पांच दिवसीय कला महोत्सव के दूसरे दिन वीरवार को नृत्यों का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत शिव तांडव स्तोत्र और कथक फ्यूजन की प्रस्तुति से हुई। स्वाति सलूजा के शिष्यों ने कथक की शास्त्रीय गरिमा और आधुनिक शैली के मेल से दर्शकों को प्रभावित किया। इसके बाद अमरिंदर राणा की टीम ने पंजाब के पारंपरिक जिंदुआ और लुड्डी नृत्य की प्रस्तुति दी। दर्शकों ने तालियां बजाकर उत्साह बढ़ाया।
आरंभ डांस ग्रुप के कलाकारों ने हरियाणवी लोक नृत्य प्रस्तुत कर प्रदेश की लोक संस्कृति की झलक दिखाई। पारंपरिक वेशभूषा और लोक संगीत के साथ कलाकारों की प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान खींचा। कार्यक्रम का समापन गुड्डी रानी की टीम शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुति से हुआ। इसमें श्रीराम स्तुति और ब्रह्मानंद जी के पद प्रस्तुत किए गए। तबला और पढ़ंत पर डॉ. अमित गंगानी, गायन पर अभिषेक गंगानी, बांसुरी पर विनय चौहान और सितार पर डॉ. मनोज कुमार ने संगत की।
चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी की चेयरपर्सन डॉ. सुखमिंदर कौर बराड़, वाइस चेयरमैन डॉ. अमित गंगानी और सचिव राजिंदर कुमार ने कहा कि महोत्सव का उद्देश्य भारतीय लोक एवं शास्त्रीय कलाओं को प्रोत्साहित करना और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है।
विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। सेक्टर-23 के बाल भवन स्थित नवरंग थिएटर में वीरवार को हरियाणवी नृत्य और शास्त्रीय नृत्य का आयोजन हुआ। यह आयोजन चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी की ओर से हो रहा है। पांच दिवसीय कला महोत्सव के दूसरे दिन वीरवार को नृत्यों का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत शिव तांडव स्तोत्र और कथक फ्यूजन की प्रस्तुति से हुई। स्वाति सलूजा के शिष्यों ने कथक की शास्त्रीय गरिमा और आधुनिक शैली के मेल से दर्शकों को प्रभावित किया। इसके बाद अमरिंदर राणा की टीम ने पंजाब के पारंपरिक जिंदुआ और लुड्डी नृत्य की प्रस्तुति दी। दर्शकों ने तालियां बजाकर उत्साह बढ़ाया।
आरंभ डांस ग्रुप के कलाकारों ने हरियाणवी लोक नृत्य प्रस्तुत कर प्रदेश की लोक संस्कृति की झलक दिखाई। पारंपरिक वेशभूषा और लोक संगीत के साथ कलाकारों की प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान खींचा। कार्यक्रम का समापन गुड्डी रानी की टीम शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुति से हुआ। इसमें श्रीराम स्तुति और ब्रह्मानंद जी के पद प्रस्तुत किए गए। तबला और पढ़ंत पर डॉ. अमित गंगानी, गायन पर अभिषेक गंगानी, बांसुरी पर विनय चौहान और सितार पर डॉ. मनोज कुमार ने संगत की।
विज्ञापन
चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी की चेयरपर्सन डॉ. सुखमिंदर कौर बराड़, वाइस चेयरमैन डॉ. अमित गंगानी और सचिव राजिंदर कुमार ने कहा कि महोत्सव का उद्देश्य भारतीय लोक एवं शास्त्रीय कलाओं को प्रोत्साहित करना और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है।
विज्ञापन