फाइबर ऑप्टिक्स के जनक प्रो. नरिंदर सिंह कपानी नहीं रहे, विज्ञान जगत में शोक की लहर
पंजाब के मोगा में जन्मे फाइबर ऑप्टिक्स के जनक प्रो. नरिंदर सिंह कपानी का अमेरिका में निधन हो गया। वह 94 साल के थे। उनके निधन की सूचना से विज्ञान जगत में शोक की लहर फैल गई। पीयू, इमटेक समेत कई संस्थानों के वैज्ञानिकों ने कहा कि उनके जाने से विज्ञान जगत को बड़ी क्षति हुई है। पीयू ने उन्हें विज्ञान रत्न पुरस्कार दिया था लेकिन वह कार्यक्रम में पहुंच नहीं पाए थे।
प्रो. नरिंदर सिंह कपानी ने स्नातक की पढ़ाई आगरा विश्वविद्यालय से की। उसके बाद उन्होंने परास्नातक की पढ़ाई लंदन से की। वहीं से उन्होंने डॉक्टरेट की उपाधि ली। उन्होंने 1954 में फाइबर ऑप्टिक्स तकनीकी का विकास कर पूरी दुनिया में नया आयाम गढ़ दिया।
उनका नाम नोबेल पुरस्कार के लिए चला, लेकिन किसी कारणवश फाइनल नहीं हो पाया। उनके बाद फाइबर ऑप्टिक्स पर जापान के एक व्यक्ति ने काम किया तो उन्हें नोबेल पुरस्कार के लिए चुन लिया गया। विज्ञान जगत में इसकी आलोचना भी हुई। वह अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे।
कई कंपनियों के निदेशक मंडल में शामिल रहे। उन्होंने 1973 में कैप्ट्रॉन की स्थापना की। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में सिख चेयर को अपनी मां के नाम पर वित्त पोषित किया। अमेरिका की फार्च्यून पत्रिका ने दुनिया के दस सबसे प्रभावशाली शख्सियतों में प्रो. नरिंदर को शामिल किया था।
सिख धर्म का भी खूब प्रचार किया
मैं उनसे अमेरिका में मिला और उन्होंने मुझे बताया कि मैंने मानवता के लिए अपना काम किया है। उनकी आंखों में आंसू थे। उन्होंने मुझे अपना काम करने के लिए कहा और पुरस्कारों की कभी परवाह नहीं की। जब मुझे दो फीसदी वैश्विक वैज्ञानिकों में सूचीबद्ध होने का पुरस्कार मिला तो मैंने उन्हें बड़ी श्रद्धा के साथ याद किया। उन्होंने सिख धर्म का भी खूब प्रचार किया। -प्रो. स्वर्णजीत सिंह, इमटेक, चंडीगढ़।
कंप्यूटर से लेकर मोबाइल तक उन्हीं के कारण दौड़ रहे
प्रो. नरिंदर सिंह दुनिया के शीर्ष दस वैज्ञानिकों में शामिल रहे। फाइबर ऑप्टिक्स का आविष्कार करके उन्होंने दुनिया में क्रांति ला दी। आज कंप्यूटर से लेकर मेल, टेलीफोन आदि फाइबर के कारण चल रहे हैं। उनके कार्यों को कभी नहीं भुलाया जा सकेगा। उन्होंने कई फाउंडेशन संचालित करके विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप आदि प्रदान की। - प्रो. भूपिंदर सिंह भूप, फार्मास्यूटिकल विभाग, पीयू।
पीयू ने दिया था विज्ञान रत्न पुरस्कार
अप्रैल 2016 में उनसे अमेरिका में एक कार्यक्रम में मुलाकात हुई। वह मुख्य अतिथि थे। उस दौरान उनकी आयु 90 साल की रही थी और खुद गाड़ी चलाकर पहुंचे थे। वह फिट थे। दुनिया के प्रसिद्ध वैज्ञानिकों में एक थे। उनके घर भी मैं गया। पीयू ने उन्हें दीक्षांत समारोह में विज्ञान रत्न सम्मान से नवाजा। हालांकि वह यहां पहुंच नहीं पाए थे। उनका जाना पूरी दुनिया को खलेगा। -प्रो. रोनकी राम, डीन आर्टस, पीयू।
पीयू ने मानद स्कॉलर उपाधि के लिए बुलाया था
पीयू की ओर से प्रो. नरिंदर को मानद स्कॉलर के रूप में उपाधि के लिए आमंत्रित किया गया था, लेकिन तबीयत उनकी खराब होने के कारण नहीं आ पाए। दो बार फोन पर मैंने उनसे बात की। उन्होंने फाइबर ऑप्टिक्स पर काम करके पूरी दुनिया को नया रास्ता दिखाया। बड़े वैज्ञानिकों में से एक थे। उनके कार्यों को हमेशा याद किया जाता रहेगा। उन्होंने मानवता के लिए बड़ा काम किया। - प्रो. एके ग्रोवर, पूर्व वीसी पीयू।