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60 लाख की धोखाधड़ी में तरसेम और सुमित सिंगला बरी

Wed, 02 Mar 2016 12:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 02 Mar 2016 12:29 AM IST
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father and son acquitted in fraud case

पिछले साल अपने ही अपहरण के ड्रामे से चर्चा में आए खरड़ निवासी करण अरोड़ा द्वारा दायर धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश रचने की धाराओं में दर्ज केस अदालत में साबित न होने पर कोर्ट ने सेक्टर-35डी निवासी तरसेम सिंगला व उनके बेटे सुमित सिंगला को बरी कर दिया।

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संबंधित मामला 60 लाख रुपये की धोखाधड़ी से जुड़ा था। बचाव पक्ष के वकील एपीएस गुलियानी के अनुसार मामले में खास बात यह रही कि केस दर्ज करवाने के बाद करण सिर्फ एक बार अदालत में पेश हुआ उसके बाद वह कभी पेश ही नहीं हुआ। अभियोजन पक्ष के अनुसार करण अरोड़ा विदेश में है। हालांकि वह यह नहीं बता सके कि वह कहां है। वहीं एक अन्य शिकायतकर्ता नौशाद भी कोर्ट में गवाही देने नहीं आया।
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तत्कालीन ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट विजय जेम्स की कोर्ट में दायर शिकायत के बाद सेक्टर-19 थाना पुलिस ने तरसेम सिंगला और सुमित सिंगला के खिलाफ 12 अगस्त 2013 को केस दर्ज किया था। करण फार्म के मालिक खरड़ निवासी करण अरोड़ा और सेक्टर-20ए निवासी नौशाद अली मामले में शिकायतकर्ता थे। करण के अनुसार वह रिहायशी प्रापर्टी की तलाश कर रहे थे। इसी दौरान अगस्त 2012 में उनकी मुलाकात सुमित सिंगला से हुई।
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आरोप के अनुसार सुमित और तरसेम सिंगला ने उनसे कहा कि उन्हें पैसों की जरूरत है इसलिए वह अपना घर बेचना चाहते हैं। इसके बाद दोनों पक्षों में नौशाद अली के घर पर डील हुई। मकान बेचने के लिए 17 अगस्त 2012 को सेल एग्रीमेंट तैयार करवाया गया और टोकन मनी के तौर पर 60 लाख रुपये करण से लिए। मई 2013 में शिकायतकर्ता पक्ष को पता चला कि आरोपी पक्ष के खिलाफ सीबीआई ने आपराधिक केस दर्ज किया है।

इसके बाद शिकायतकर्ता पक्ष ने अपने रुपये वापस मांगे। इस पर सिंगला पिता-पुत्र की ओर से तीन चेक दिए जिनमें दो 25-25 लाख और एक 20 लाख रुपये का था। लेकिन बाद में पता चला कि उनके खाते में इतनी रकम है ही नहीं। तरसेम और सुमित सिंगला की अग्रिम जमानत याचिका सेशन कोर्ट और हाईकोर्ट से खारिज होने के बाद 18 नवंबर 2013 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

वहीं लेनदारी को लेकर चेक बाउंस का ही एक अन्य केस करण अरोड़ा ने तरसेम सिंगला के खिलाफ सितंबर 2013 में दर्ज करवाया था। उसमें अदालत तरसेम सिंगला को पिछले वर्ष 11 दिसंबर को बरी कर चुकी है।

खुद के अपहरण का किया था ड्रामा
यूटी पुलिस के आईपीएस समेत अन्य उच्च अधिकारियों से नजदीकी के कारण करण अरोड़ा काफी चर्चा में रहा है। वहीं काफी समय बाद वह पिछले साल दिसंबर में उस समय चर्चा में आया जब वह संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया। उसकी कार उसके घर के पास मिली थी। उस पर खून के छींटे थे और शीशे भी टूटे हुए थे। कई दिन तक लापता रहने के बाद वह अचानक संदिग्ध परिस्थितियों में खुद घर पहुंच गया।


पूछताछ में उसने पुलिस को बताया कि कुछ लोग उसका अपहरण कर उसे यूपी ले गए थे। पुलिस को इस पर शक हुआ तो सख्ती से पूछने पर उसने कबूल कर लिया कि वह तनाव में था और शहर से बाहर चला गया था। पुलिस को उसने बताया था कि वह एक दोस्त को चमकौर साहिब छोड़ने के बाद उसने घर के पास कार खड़ी की और उसके शीशे तोड़ डाले थे। इसके बाद वह मनाली के लिए निकल गया और दो दिन वहीं रहने के बाद पानीपत चला गया। वहां कुछ समय रुकने के बाद वह वापस घर आ गया था।

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