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हरियाणा: कहां बेची पराली, कृषि विभाग में देना होगा बिल, फिर मिलेगी प्रोत्साहन राशि

Thu, 22 Oct 2020 12:58 PM IST
ajay kumar मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Thu, 22 Oct 2020 12:58 PM IST
सार

  • पोर्टल पर किसानों को पंजीकरण भी करवाना होगा, विशेष कमेटी जांच भी करेगी
  • पराली प्रबंधन के नाम पर सरकार से मिलने वाले प्रोत्साहन राशि में गड़बड़ी रोकने को लिया फैसला
  • पराली प्रबंधन के लिए किसानों को प्रति एकड़ 1000 रुपये प्रोत्साहन राशि देगी हरियाणा सरकार

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Farmers will have to submit bill of stubble sell to the agriculture department
- फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

पराली प्रबंधन के लिए किसानों को सरकार की ओर से मिलने वाले इंसेंटिव (प्रोत्साहन राशि) में किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो, इसके लिए किसानों को पराली कहां बेची, इसका बिल पेश करना होगा। उसके बाद ही सरकार की प्रोत्साहन राशि के वे हकदार होंगे। दरअसल, इस बार सरकार पराली प्रबंधन को लेकर ज्यादा सख्त और गंभीर है। 

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पराली जलाने वाले किसानों पर जहां हजारों रुपये का मोटा जुर्माना लगाया जा रहा है, वहीं उन्हें पराली से ईंधन ब्लॉक (बॉयो फ़्यूल) बनाकर कमाई करने के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है। इन किसानों को सरकार प्रति एकड़ 1 हजार प्रोत्साहन राशि प्रदान करेगी। मगर इस राशि वितरण में किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी न हो। इसके लिए किसानों को कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी।
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इन शर्तों को पूरा करने के बाद मिलेगा इंसेंटिव

  • सरकारी इंसेंटिव उन्हीं किसानों को मिलेगा, जो अपनी पराली को आय के स्त्रोत के रूप में तैयार करेगा।
  • किसानों को इसके लिए विभाग के पोर्टल पर रजिस्टर्ड करवाना होगा। यह भी बताना होगा कि वे अपनी पराली से बनाए गए ईंधन ब्लाक को किसी नजदीकी इंडस्ट्री या पंचायत को बेच रहा है।
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  • किस इंडस्ट्री और पंचायत को अपने पराली से बनाए ईंधन ब्लॉक बेचे, उसका बिल भी कृषि विभाग में पेश करना होगा।
  • अगर किसानों ने अपने पराली ईंधन ब्लॉक तैयार कर ग्राम पंचायत की जमीन पर उसे स्टोर किया है तो ग्राम पंचायत को उसके ईंधन स्टॉक करने की संस्तुति करनी होगी।
  • पराली ईंधन ब्लॉक बेचने के बाद जो भी बिल किसान पेश करेगा उनको जिला स्तरीय एक्जीक्यूटिव कमेटी वेरिफाई करेगी। डीसी की अध्यक्षता वाली इस विशेष कमेटी में कृषि विभाग के अफसर भी इसके सदस्य होते हैं।

अब एक्स-सी-टू उपकरणों की ओर बढ़ने लगा रुझान

प्रदेश में धान उत्पादक किसानों का रुझान अब एक्स-सी-टू उपकरणों की ओर बढ़ रहा है। ये वो उपकरण हैं, जिनकी मदद से पराली से ईंधन ब्लाक तैयार होते हैं। बहुत कम ही किसान हैं, जो अब इन-सी-टू (वे उपकरण जिनसे पराली के अवशेष को खेतों में सड़ने के लिए जमींदोज किया जाता है) उपकरणों का इस्तेमाल पराली प्रबंधन के लिए कर रहे हैं। ऐसे उपकरणों से किसान को कोई खास आय नहीं होती। जबकि पराली के अवशेष जमीन में सड़ने में भी काफी समय लग जाता है। इसलिए किसान एक्स-सी-टू उपकरणों के इस्तेमाल की ओर बढ़ रहे हैं।

प्रदेश सरकार भी अब एक्स-सी-टू उपकरणों को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। इससे किसानों की भी आय बढ़ती है और साथ ही इंडस्ट्री की भी जरूरतें पूरी होती हैं। प्रदेश के करीब 15 जिलों में काफी किसान अपनी पराली अवशेष से ईंधन ब्लाक बनाकर उसे शुगर मिलों, गत्ता व पेपर मिलों समेत पैकेजिंग इकाइयों को उपलब्ध करवा रहे हैं। हरियाणा सरकार और कृषि विभाग के अफसरों के प्रयासों से ये अभी शुरुआत है लेकिन जल्द ऐसे जागरूक किसानों के लिए पराली अवशेष से होने वाली आय भी उनकी धान से होने वाली आमदनी में जोड़ी जाने लगेगी।  - डॉ. गिरीश  नागपाल, उप निदेशक, हरियाणा कृषि विभाग।

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