फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Farmers reached Ludhiana city Carrying with Thousands animals

1000 लावारिस जानवरों को लेकर लुधियाना में घुसे किसान, डीसी को जा रहे थे सौंपने, जाम की स्थिति

Thu, 06 Feb 2020 10:56 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना ( पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना ( पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Thu, 06 Feb 2020 10:56 PM IST
विज्ञापन
Farmers reached Ludhiana city Carrying with Thousands animals
ट्रालियों में आवारा जानवरों के लेकर जाते किसान नेता।

बेसहारा पशुओं की समस्या को लेकर वीरवार को भारतीय किसान यूनियन लक्खोवाल के पदाधिकारी एक हजार जानवर डीसी को सौंपने के लिए लुधियाना पहुंचे। सभी जानवरों को यूनियन नेताओं ने ट्रालियों में भरा हुआ था। इससे पहले की वह शहर में प्रवेश करते पुलिस ने समराला चौक पर उन्हें रोक दिया। इसके बाद यूनियन नेताओं ने समराला चौक पर ही धरना लगा दिया। 

विज्ञापन


मामले को निपटाने के लिए एसडीएम अमरजीत सिंह बैंस खुद यूनियन नेताओं से बात करने के लिए पहुंचे। उन्होंने किसान नेताओं को भरोसा दिया कि वह सभी जानवरों को गोशाला लेकर जाने के लिए तैयार हैं। इसके लिए कुछ देर इंतजार करना होगा। इसके बाद यूनियन नेता इन जानवरों को चंडीगढ़ रोड स्थित ग्लाडा ग्राउंड में छोड़कर लौट गए। ये सभी जानवर अब ग्लाडा सेक्टर 39, 32 एरिया में घुस गए हैं। 
विज्ञापन


यूनियन महासचिव हरिंदर सिंह लक्खोवाल ने बताया कि लावारिस जानवरों की समस्या को लेकर सरकार गंभीरता से  काम नहीं कर रही है। इससे जहां किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं वहीं आम लोग भी हादसों का शिकार बन रहे हैं। कई लोग इन जानवरों के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं। इस मामले को लेकर छह साल पहले भी उनकी यूनियन ने मुहिम को शुरू किया था। एक साल पहले सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को भी लावारिस जानवरों को सौंपने के लिए गए थे। उस समय उन्हें आश्वासन दिया गया था कि दो या तीन माह के अंदर इनका कोई हल किया जाएगा। 

विज्ञापन
विज्ञापन

Farmers reached Ludhiana city Carrying with Thousands animals

लक्खोवाल के अनुसार सरकार काऊ सेस के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये एकत्र कर रही है लेकिन इस समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। उनकी पंजाब से मांग है कि काऊ सेस से एकत्र होने वाला करोड़ों रुपये उनकी यूनियन को दिए जाए। वह पूरे सूबे में इन जानवरों को संभालने के लिए तैयार हैं। वहीं दिल्ली और यूपी की तर्ज पर पंजाब में भी बूचड़खाने खोलने चाहिए। 

सूबे भर में ऐसे पांच बूचड़खाने तो जरूर खुलने चाहिए। इससे सरकार को आमदन तो होगी ही साथ में इस समस्या का स्थायी हल भी निकलेगा। सरकार इस तरफ गौर नहीं कर रही है इसलिए उन्होंने 5 फरवरी तक समस्या के हल के लिए अल्टीमेटम दिया था।

आखिरकार वह वीरवार को बेसहारा जानवरों को लेकर निकले हैं जिन्हें डीसी को सौंपा जाएगा। सात फरवरी को फरीदकोट और 18 फरवरी को जालंधर में यूनियन की तरफ से इसी तरह जानवरों को पकड़कर डीसी को दिया जाएगा। इसके बाद यह मुहिम पूरे प्रदेश में चलाई जाएगी।

हर साल काऊ सेस के नाम पर एकत्र होता है 60 करोड़ रुपये
गोशाला बठिंडा के महामंत्री साधु राम कुसला बताते हैं कि प्रदेश भर में 364 गोशाला हैं। यहां पर विभिन्न संस्थाएं सैकड़ों गोवंश की सेवा कर रही हैं। पंजाब सरकार ने 19 अक्तूबर 2015 को काऊ सेस की शुरुआत की थी। सरकार ने नौ आइटम पर काऊ सेस लगाने की घोषणा की थी। इसमें बिजली, शराब, बीयर, एसी मैरिज पैलेस, नॉन एसी मैरिज पैलेस, तेल टैंकर, चार पहिया वाहन और दोपहिया वाहन शामिल हैं। प्रदेश भर से सरकार को लगभग 60 करोड़ से ज्यादा का काऊ सेस एक साल में एकत्र होता है लेकिन इसमें से बहुत कम हिस्सा गोशाला को मिलता है।

सिर्फ पांच आइटम पर मिलता है काऊ सेस
सरकार ने पूरे प्रदेश में चाहे नौ आइटम पर काऊ सेस लगाने की घोषणा की थी, जमीनी स्तर पर बात करे तो सिर्फ पांच आइटम से ही काऊ सेस मिल रहा है। नगर निगम लुधियाना के अधिकारियों के अनुसार उन्हें हर माह लगभग 30 लाख रुपये काऊ सेस के मिलते हैं। यह काऊ सेस नए वाहन, जन्म और मृत्यु सर्टिफिकेट, नक्शा पास और तेल टैंकर से मिल रहा है। इसके अलावा एक्साइज या फिर बिजली विभाग से काऊ सेस नहीं मिल रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed