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Farmers Protest: पंजाब-हरियाणा के किसानों का धरना खत्म, कृषि मंत्री और राज्यपाल से मिलने के बाद हुआ एलान

Tue, 28 Nov 2023 03:59 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 28 Nov 2023 03:59 PM IST
सार

19 तारीख को किसानों की मुख्यमंत्री के साथ पैनल मीटिंग होगी। इसमें विभाग के सारे अधिकारी मौजूद रहेंगे। मौके पर ही किसानों की मांगों को सुना जाएगा और उनको हल करने के लिए कार्रवाई की जाएगी। सीएम भगवंत मान पहले ही साफ कर चुके हैं कि किसानों से किसी प्रकार का धोखा नहीं होने दिया जाएगा।

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Farmers Protest in Mohali, meeting with governor today all update
कृषि मंत्री से मिलकर लौटते किसान। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब एवं हरियाणा के राज्यपालों के साथ बैठक और कृषि मंत्री से मुलाकात के बाद मोहाली और पंचकूला में तीन दिन से बैठे किसानों ने धरना खत्म कर दिया है। पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने किसानों को चंडीगढ़ में दर्ज तमाम केसों को वापस लेने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा किसानों से जुड़े अन्य मसलों के समाधान के लिए वे खुद राष्ट्रपति से बात करेंगे।

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पंजाब के कृषि मंत्री के साथ बैठक में तय हुआ कि सीएम भगवंत मान की 19 दिसंबर को किसानों के साथ बैठक करेंगे। अधिकारियों की मौजूदगी में होने वाली इस बैठक में किसानों के हर मसले पर विचार किया जाएगा।
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मंगलवार सुबह राज्यपाल की बैठक से पहले किसानों की मोहाली के धरनास्थल पर बैठक हुई। इसके बाद पंजाब सरकार ने किसानों को बैठक का न्योता दिया। साथ ही किसानों के 30 सदस्यीय दल को कड़ी सुरक्षा में बस में पंजाब भवन ले जाया गया। किसान संगठनों में भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां), बीकेयू (लाखोवाल) शामिल थे। 

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वहां पर किसानों की पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुडि्डयां से करीब 25 मिनट बैठक हुई। इसमें तय हुआ कि छह दिसंबर तक किसान अपनी मांगों से जुड़ा एक मांगपत्र तैयार कर सरकार को सौंपेंगे। इसके बाद 19 दिसंबर को मुख्यमंत्री भगवंत मान से उनकी बैठक होगी। इसमें संबंधित विभाग के सभी अधिकारी मौजूद रहेंगे।

इसके बाद किसानों का प्रतिनिधिमंडल राजभवन में राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित से मिला और उन्हें कहा कि किसानों पर यूटी पुलिस समेत रेलवे द्वारा दर्ज मामले रद्द किए जाएं, क्योंकि उन्हें पासपोर्ट बनवाने में दिक्कत आ रही है। इस पर उन्हें राज्यपाल ने आश्वासन देते कहा कि चंडीगढ़ उनके दायरे में आता है और वह डीजीपी को आदेश देते हैं कि किसानों पर दर्ज पर्चे नियमानुसार रद्द किए जाएं। इसके अलावा किसानों पर दर्ज अन्य केसों के लिए वह राष्ट्रपति को उनका मांगपत्र भेजेंगे।

वहीं, पंचकूला सेक्टर-5 धरनास्थल पर बैठे किसानों का 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल सोमवार को हरियाणा के राज्यपाल बण्डारू दत्तात्रेय से मिला। किसान नेता रतन मान ने बताया कि किसान 11 दिसंबर तक सरकार के रुख का इंतजार करेंगे। उसके बाद आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।

केंद्र सरकार से जुड़ीं हैं ये मांगें

किसानों की केंद्र सरकार से मांग थी कि सभी फसलों पर एमएसपी दी जाए। फसल खरीद गारंटी अधिनियम बनाया जाए। किसानों का सारा कर्ज माफ किया जाए। लखीमपुर खीरी के दोषियों को सजा दी जाएगी। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी को बर्खास्त कर दंडित किया जाना चाहिए। दिल्ली आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज मुकदमे रद्द किए जाएं।

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खामियों के जरिये बिजली संशोधन बिल लागू करना बंद किया जाए। 60 वर्ष से अधिक उम्र के सभी किसानों को 10 हजार रुपये मासिक पेंशन दी जाए। किसान आंदोलन को देशद्रोही कहना बंद किया जाए। कृषि कॉरपोरेटों को फसलें बेचने की सभी नीतियों को खत्म किया जाए। सार्वजनिक क्षेत्र को बहाल करें और निजीकरण की नीतियों को रोकें।

किसान बोले- सरकार गन्ने का मूल्य 450 रुपये दे

किसानों की पंजाब सरकार से जुड़ी प्रमुख मांगों में बाढ़ और ओलावृष्टि से नष्ट हुई फसलों का उचित मुआवजा, धान का विकल्प तलाशना, सब्जियों, मक्का, मूंगफली, गन्ना और अन्य फसलों की एमएसपी पर खरीद की गारंटी, गन्ने का समर्थन मूल्य 450 रुपये प्रति क्विंटल करने और गन्ना किसानों का बकाया भुगतान करना है। इसके अलावा अन्य मांगों में आबादकार किसानों से जमीन छीनना बंद करने व मालिकाना हक देना, चिप वाले मीटर लगाना बंद करने, पराली जलाने पर किसानों पर दर्ज मुकदमे रद्द करने, जमीनों पर की गई लाल प्रविष्टियां निरस्त करने और शहीद किसानों के परिवारों को मुआवजा और नौकरी देना शामिल हैं।

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