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किसानों ने बढ़ाई घेराबंदी: पंजाब में उम्मीदवारों की डगर मुश्किल, पार्टियों के पास नहीं सवालों का जवाब

Fri, 26 Apr 2024 03:39 PM IST
निवेदिता वर्मा विशाल पाठक, अमर उजाला, चंडीगढ़
विशाल पाठक, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 26 Apr 2024 03:39 PM IST
सार

पंजाब में सत्तारूढ़ पार्टी पुलिस के काफिले के साथ गांव, देहात और शहरों में घुस रही है, तो भाजपा अपने किसान मोर्चा के नेताओं के सहारे फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। कांग्रेस किसानी मुद्दे पर पूर्व की भाजपा-शिअद गठजोड़ सरकार और दावे कर सत्ता में आई आप पर हमला बोलकर लोगों के बीच पैठ बनाने के प्रयास में जुटी है। शिअद प्रदेश की पार्टी होने का हवाला देकर सूबे के पुराने मुद्दों को दोबारा उछालकर विश्वास कायम करने में जुटी है।

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Farmers protest against political parties candidates in loksabha election
शंभू में रेल ट्रैक पर बैठे किसान - फोटो : फाइल

विस्तार

पंजाब में किसानों की घेराबंदी के आगे प्रत्याशियों की चुनावी डगर मुश्किल बनती जा रही है। किसान प्रत्याशियों को हर मोर्चे पर घेरने के लिए उतारू हैं। गांवों-कस्बों से लेकर शहरों के अंदर भी किसान घेराबंदी कर प्रत्याशी से सवाल कर रहे हैं, जिनका जवाब देना राजनीतिक दलों के लिए मसीबत बन गया है। किसानों की मांग अब हर राजनीतिक दल के लिए गले की फांस बनती जा रही है। प्रदेश की सत्तारुढ़ पार्टी आप हो या फिर किसानी मुद्दे के भंवर से गुजरकर अलग-थलग हुई भाजपा और शिअद या फिर कांग्रेस। हर राजनीतिक दल के प्रत्याशी को जनता के बीच जाकर अपनी बात रखने से पहले प्लानिंग करनी पड़ रही है। 
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ये प्रत्याशी और नेता कर चुके किसानों के विरोध का सामना
फरीदकोट से भाजपा के प्रत्याशी हंसराज हंस, भाजपा से जालंधर के सुशील रिंकू, बठिंडा से आप के गुरमीत सिंह खुड्डियां और भाजपा से परमपाल कौर सिद्धू, पटियाला सीट से भाजपा की प्रत्याशी परनीत कौर, कांग्रेस के धर्मवीर गांधी और आप के डॉ. बलबीर सिंह, अमृतसर से भाजपा के प्रत्याशी तरनजीत सिंह संधू किसानों का चौतरफा विरोध झेल चुके हैं। 
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इसके अलावा मुख्यमंत्री भगवंत मान और सुखबीर बादल को भी विरोध झेलना पड़ा था। पंजाब में चारों प्रमुख दल आप, कांग्रेस, भाजपा और शिअद के इक्का-दुक्का प्रत्याशी ही हैं, जो अब तक किसानों के विरोध का सामना करने से बचे हैं। हालांकि, इन प्रत्याशियों को भी किसानों की भीड़ के काले झंडों का सामना करना पड़ा है। आप की मंत्री अनमोल गगन मान से तो किसान नेताओं ने उनके कार्यालय में ही सवाल-जवाब शुरू कर दिए थे, इसके बाद वह खरड़ में अपने पार्टी कार्यालय में नहीं दिख रही हैं।
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चंडीगढ़ में बैठकों के दौर के बाद भी पूरे नहीं हुए किसानों के ये मुद्दे 
किसानों ने केंद्र सरकार से स्वामीनाथन रिपोर्ट के अनुसार सभी 23 फसलों की एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग रखी थी। इसके अलावा किसानों और खेत मजदूरों की कर्जमाफी की मांग, लखीमपुर खीरी में जान गंवाने वाले किसानों को इंसाफ और आशीष मिश्रा की जमानत रद्द कर सभी दोषियों को सजा की मांग, लखीमपुर खीरी कांड में घायल सभी किसानों को वादे के मुताबिक 10 लाख रुपये मुआवजे की मांग, किसान आंदोलन के दौरान दर्ज केस रद्द करने की मांग, पिछले आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों के आश्रितों को नौकरी देने की मांग रखी थी।

केंद्र ने अनुबंध की शर्त पर एमएसपी की गारंटी का रखा था प्रस्ताव
चंडीगढ़ में बैठक के दौरान केंद्र ने मसूर, उड़द, अरहर, मक्की और कपास की फसल पर अनुबंध की शर्त पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी का प्रस्ताव रखा था। इस पर किसानों ने सभी फसलों पर एमएसपी की गारंटी की मांग को बरकरार रखा था। केंद्र के अनुबंध की शर्त पर एमएसपी की गारंटी के प्रस्ताव को किसानों ने खारिज कर दिया था। 

चंडीगढ़ में चौथे दौर की बैठक में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने धान और गेहूं के अलावा पांच फसलों पर एमएसपी देने की गारंटी दी थी। इसके लिए किसानों को भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ नैफेड और भारतीय कपास निगम सीसीआई से पांच साल का करार करने की शर्त रखी थी। केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने इस बैठक में कहा था कि अधिकतर मुद्दों पर सहमति बन गई, लेकिन स्थायी समाधान के लिए कमेटी जरूरी है।

शांतिपूर्ण विरोध जारी रहेगा
हमें सभी फसलों पर एमएसपी की गारंटी चाहिए, केंद्र सरकार अनुबंध की शर्त पर एमएसपी देने का प्रस्ताव रख रही है। दरअसल एमएसपी की नहीं, बल्कि खरीद की गारंटी है। किसानों की मांगें जब तक पूरी नहीं हो जाती, उनका शांतिपूर्ण विरोध जारी रहेगा। हमें दिल्ली जाने से रोका गया था, अब हम अपने हकों को लेकर नेताओं के पास जाकर उनसे सवाल करेंगे। -जगजीत सिंह डल्लेवाल, प्रधान, भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धूपुर

चुनाव का बहिष्कार करेंगे

जब तक सभी फसलों पर एमएसपी की गारंटी नहीं लागू होती, किसानों का विरोध जारी रहेगा। किसानों संगठनों ने लोकसभा चुनावों का बहिष्कार करने का फैसला किया है। जिस प्रकार नेताओं ने हमे अपनी मांगों को लेकर दिल्ली जाने से रोका, अब किसान इन नेताओं को उनके गांवों में घुसने से रोकेंगे। -सरवण सिंह पंधेर, नेता, संयुक्त किसान मोर्चा

मान ने पूरा नहीं किया एमएसपी का वादा 

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 23 फसलों के लिए एमएसपी प्रदान करने के अपने चुनाव पूर्व वादे को अब तक पूरा नहीं किया है। सीएम मान ने कहा कि वह एमएसपी प्रदान नहीं कर सकते, क्योंकि यह केंद्र सरकार को प्रदान करनी है। मान ने कहा था कि वह किसानों को केवल मुआवजा दे सकते हैं। राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले मान और पर्यटन मंत्री अनमोल गगन मान ने आप की सरकार बनने पर एमएसपी पर 23 फसलों की खरीद करने का वादा किया था। मान ने एमएसपी पर मूंग दाल की फसल खरीदने की प्रतिबद्धता जताई थी, लेकिन वह अपना वादा निभाने में पूरी तरह विफल रहे। नतीजतन, किसानों को कम कीमतों पर प्राइवेट प्लेयर्स को अपनी फसल बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा। -प्रताप सिंह बाजवा, नेता प्रतिपक्ष, पंजाब कांग्रेस

अब तक मुआवजा तक नहीं दे पाई सरकार

किसानों को एमएसपी देने का वादा तो दूर पंजाब सरकार किसानों को ओलावृष्टि और बीते वर्ष बाढ़ के कारण हुए फसली नुकसान का अब तक मुआवजा तक नहीं दे पाई है। इसके अलावा मंडियों में गेहूं पड़ा खराब हो रहा है, गेंहू की खरीद को लेकर सरकार की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। -सुखबीर बादल, अध्यक्ष, शिअद

वोट मांगने वाले हर प्रत्याशी से सवाल पूछेंगे किसान

भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धूपुर के जिला महासचिव एवं संयुक्त किसान मोर्चा गैर राजनीतिक (भारत) के सक्रिय नेता रण सिंह चट्ठा ने कहा कि लोकसभा चुनाव के लिए वोट मांगने के लिए आने वाले हर प्रत्याशी से गांवों में सवाल पूछे जाएंगे। संयुक्त किसान मोर्चा गैर राजनीतिक के बैनर तले इस अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाया जा रहा है। सवालों के पोस्टर गांवों के सार्वजनिक स्थानों पर लगाए जा रहे हैं। 

किसान नेता रण सिंह चट्ठा ने कहा कि सवालों का जवाब न देने वाले प्रत्याशियों के खिलाफ नारे लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि 13 फरवरी से गैर राजनीतिक संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में किसान पंजाब और हरियाणा की सीमाओं पर लगे मोर्चों पर अपनी जायज मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन केंद्र और राज्य सरकार अनदेखी कर रही है। 


रण सिंह चट्ठा ने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के इशारे पर हरियाणा सरकार की ओर से किसानों को दिल्ली जाने से रोका गया और प्रताड़ित भी किया गया। उन्होंने साफ किया कि अगर भाजपा का कोई नेता गांव में वोट मांगने आएगा तो वह खुद जिम्मेदार होंगे। पंजाब की मौजूदा भगवंत मान सरकार सहित कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल बादल समेत सभी पार्टियों ने अपने कार्यकाल के दौरान पंजाब के किसानों, मजदूरों और लोगों को धोखा दिया है, सभी का विरोध होगा।
 
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