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हरसिमरत के इस्तीफे के बाद भी निशाने पर अकाली दल, भाजपा संग गठबंधन पर उठे सवाल

Fri, 18 Sep 2020 08:47 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी/ अमर उजाला, पटियाला/बठिंडा (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी/ अमर उजाला, पटियाला/बठिंडा (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Fri, 18 Sep 2020 08:47 PM IST
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Farmers protest against agricultural ordinances in Patiala
किसान (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई

भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) ने अपने परिवारों की महिलाओं के साथ त्रिपड़ी के नजदीक पुडा ग्राउंड में शुक्रवार को धरना दिया। दिन-रात के इस धरने में किसानों ने पंजाब व केंद्र सरकारों के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए कृषि अध्यादेशों को वापस लेने, बिजली संशोधन एक्ट 2020 को वापस लेने समेत और कई मांगें उठाईं। 

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इस मौके किसान नेताओं जोगिंदर सिंह उगराहां, करनैल सिंह लंग, जसविंदर सिंह सोमा आदि ने कहा कि लोक पक्षीय बुद्धिजीवियों पर केंद्र की मोदी सरकार ने जो पर्चे दर्ज किए हैं, उन्हें तुरंत रद्द किया जाए। साथ ही जो बुद्धिजीवी जेलों में बंद हैं, उन्हें भी रिहा किया जाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से पास कृषि अध्यादेश किसानों व मजदूरों को तबाह कर देंगे। 
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इससे पंजाब का मंडी प्रबंध पूरी तरह से तहस-नहस हो जाएगा। राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर की सरकारी खरीद एजेंसियां मंडी से बाहर हो जाएंगी और किसानों को फसल की बिक्री के लिए कारपोरेट घरानों व बड़े प्राइवेट व्यापारियों के रहमो करम पर छोड़ दिया जाएगा। साथ ही बिजली संशोधन बिल 2020 के लागू होने से पंजाब के किसानों को मिलती मुफ्त बिजली की सुविधा, जो किसानों ने लंबे संघर्ष के जरिये प्राप्त की हुई है। वह धीरे-धीरे छीन ली जाएगी। किसानों को अपनी बिजली मोटरों के बिल भरने पड़ेंगे।

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‘भाजपा से वर्षों पुराना गठबंधन तोड़े अकाली दल’ 

खेती अध्यादेशों के विरोध में शुक्रवार को पातड़ां में क्रांतिकारी किसान यूनियन के प्रदेश प्रधान डॉ. दर्शन पाल की अगुवाई में पीएम का पुतला फूंककर प्रदर्शन किया गया। इस दौरान मांग की गई कि पंजाब से संबंधित सांसद इस्तीफे देकर वापस लौटें। केंद्र सरकार ने हमेशा पंजाब के साथ सौतेला व्यवहार किया है। अब यह कानून बनाकर किसानों के साथ अत्याचार किया जा रहा है। मौके पर अकाली दल से भी भाजपा के साथ अपने सालों पुराने गठबंधन को तोड़ने की मांग की गई।

किसान नेता डॉ. दर्शन पाल ने किसानों से आह्वान किया कि इन कानूनों के विरोध में गांव-गांव और हर जगह पर मोदी सरकार के खिलाफ रोष जताया जाए। 24 सितंबर तक यह कार्यक्रम करने के बाद 25 सितंबर को पूरे पंजाब में मुकम्मल बंद रखा जाएगा। इस दिन पंजाब में सड़क व रेल आवाजाही ठप रखी जाएगी। सारे ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में मुकम्मल बंद लागू करते हुए सेवाएं, व्यापार, दफ्तर, दुकानों व हर किस्म का कारोबार बंद रखा जाएगा।

बठिंडा: ‘हरसिमरत ने वोटों की खेती करने को दिया इस्तीफा’
केंद्र सरकार के कृषि अध्यादेशों के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले बठिंडा में मिनी सचिवालय के समीप धरना शुक्रवार को भी जारी रहा। किसानों ने केंद्र सरकार की अर्थी फूंककर अध्यादेशों को खारिज करने की मांग उठाई। किसान नेता शिंगारा सिंह मान, गुरदेव सिंह, सुखदेव सिंह ने कहा कि कृषि अध्यादेश किसानों के लिए लाभदायक है तो केंद्र एवं राज्य सरकार किसानों को इनके बारे में स्पष्ट क्यों नहीं करती। उन्होंने कहा कि अध्यादेशों से किसानों को बडे़ स्तर पर आर्थिक नुकसान होगा। केंद्र सरकार इस बारे में किसानों की बात तक सुनने को तैयार नहीं है।  

किसानों ने कहा कि अकाली दल प्रदेश में अपनी लोकप्रियता खो चुका है। केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने पंजाब में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए वोटों की खेती करने के मकसद से अपने पद से इस्तीफा दिया है। उन्होंने कहा कि अगर अकाली दल किसानों के हितों के लिए लड़ता तो सांसद सुखबीर बादल यह एलान कभी न करते कि भाजपा को समर्थन जारी रहेगा। किसानों ने कहा कि हरसिमरत कौर बादल का इस्तीफा राजनीतिक ड्रामा है। इसके बारे में आने वाले कुछ दिनों में खुलासा हो जाएगा।

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