पांच एकड़ में लगाई किन्नू की बाग, बीच में की नींबू-पपीता व गेंदे की खेती, लाखों में हो रही कमाई
- खेती के लिए पाल रखी हैं देसी गाय, आर्गेनिक खेती को बढ़ावा दे रहा युवा किसान
- फल और फूलों की मिश्रित खेती कर प्रति एकड़ हो रही लाखों की आमदनी
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फल और फूलों की मिश्रित खेती करके लाखों रुपये प्रति एकड़ की आमदनी गांव लालवास के प्रगतिशील युवा किसान अनिल कुमार बिश्नोई प्राप्त कर रहे हैं। अनिल ने पांच एकड़ में किन्नू के बाग लगा रखे हैं। जिसके बीच में बची भूमि पर वह नींबू, पपीता, गेंदे और चने की फसल भी करते हैं। जिससे उन्हें लाखों रुपये प्रति एकड़ की आमदनी हो रही है।
अनिल कुमार का कहना है कि वह आर्गेनिक खेती के साथ-साथ, गोबर, गोमूत्र आधारित जीवामृत खेती करते हैं। बागवानी अधिकारी अमजीत कुंडू भी अनिल कुमार की आधुनिक खेती व आय से प्रभावित हैं। जानकारी अनुसार रतिया के गांव लालवास निवासी अनिल कुमार बिश्नोई अपने पिता के साथ कई सालों से परंपरागत खेती कर रहे हैं।
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12वीं की पढ़ाई के बाद अनिल ने बागवानी की तरफ ध्यान देना शुरू किया तो पहले पांच एकड़ में किन्नू के बाग लगाए। किन्नू का फल 5 साल बाद लगता है। फरवरी 2015 में किन्नू के बाग लगाए, जिसकी फसल इस बार दीपावली तक आने की उम्मीद बनी है। अनिल कुमार को बागवानी अधिकारियों ने राय दी थी कि वह किन्नू के बाग के बीच में बची भूमि पर नींबू व पपीते के पौधे लगाए। अनिल ने उनकी राय से यहां नींबू व पपीते के पौधे लगा दिए।
सवा लाख का बेचा नींबू
पिछले तीन सालों से वह नींबू की फसल ले रहे हैं। इस बार अनिल को 30 रुपये प्रति किलो के हिसाब से नींबू का भाव मिला। जिससे करीब डेढ़ लाख रुपये नींबू की फसल से आमदनी हुई। पपीते से उसे 50 हजार रुपये की आमदनी अब तक हो चुकी है। दोनों ही फसलें उसने अढ़ाई- अढ़ाई एकड़ में बराबर लगा रखी है। नींबू की फसल अनिल ने तीसरी बार की है और इन्हें पंजाब के मानसा व हरियाणा की रतिया, फतेहाबाद की मंडियों में बेचते हैं।
सवा एकड़ में एक लाख का होगा चना
इसी किन्नू के ही बाग में वह चने की अगेती खेती कर रहे हैं। इस बार उसने अपने चने का भाव 80 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचना करार कर रखा है और उसके सौदे भी हो चुके हैं। अनिल कुमार का दावा है कि उसका सवा एकड़ में एक लाख रुपये का चना हो जाएगा।
गेंदे के फूलों की भी करते हैं बिजाई
इसी किन्नू के बाग में नींबू, पपीता के साथ वह सीजन में गेंदे के फूल की बिजाई भी करते हैं। एक तो विवाह - शादियों व धार्मिक कार्यक्रम में फूलों से लोकल ही अच्छी आमदनी हो जाती है। दूसरा यह है कि गेंदे के फूल पर आने वाले कीट किन्नू की फसल के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। इससे किन्नू पर लगने वाले हानिकारक कीटों को गेंदे के फूलों पर आने वाले कीट खा जाते हैं।
खेती के लिए पाली देसी गाय
अनिल कुमार ने दावा किया है कि उन्होंने खेती के लिए देसी गाय पाल रखी है, जिसके गोबर व गोमूत्र से जीवामृत तैयार करते हैं। उसके बाद गाजियाबाद विश्वविद्यालय से डिकंपोजर लाकर खेत की पराली इत्यादि को आग नहीं लगाते हैं। खेत में धान व अन्य पराली को डिकंपोजर के साथ ही खेत में दबा देते हैं।
उनका दावा है कि वह आर्गेनिक खेती करते हैं और अति आवश्यक ना हो तो तब तक वह किसी कीटनाशक का प्रयोग नहीं करते हैं। बागवानी अधिकारी अमरजीत कुंडू ने कहा कि किन्नू की फसल अक्तूबर में आती है। अनिल कुमार ने अपने खेत में किन्नू के साथ नींबू व पपीता भी लगा रखे हैं। जिससे उनकी आमदनी कई गुणा बढ़ गई है। कुंडू ने कहा कि अमरजीत से प्रेरणा लेकर अन्य किसानों को भी ऐसी खेती की ओर ध्यान देना चाहिए।