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किसान ने दो एकड़ में की तरबूज-टमाटर और तोरई की खेती, लॉकडाउन में हुई लाखों की कमाई

Mon, 01 Jun 2020 02:36 PM IST
ajay kumar नरेश बैनीवाल, चोपटा (हरियाणा)
नरेश बैनीवाल, चोपटा (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Mon, 01 Jun 2020 02:36 PM IST
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Haryana farmer earning through vegetable farming during lockdown
सब्जी की खेती से किसान ने बढ़ाई आमदनी।

किसान के पास जमीन थोड़ी हो और परिवार का पालन पोषण इसी पर निर्भर हो तो परंपरागत किसानी से आमदनी कम होने पर मुश्किल उठानी पड़ती है। उसमें भी सूखा या अकाल पड़ने पर परंपरागत खेती से आमदनी कम हो जाती है और आर्थिक स्थिति बिगड़ जाती है। लेकिन गांव नाथूसरी कलां के किसान ईश्वर सिंह कड़वासरा ने हौसला हारने की बजाए टमाटर, तर, तोरी, तरबूज, मिर्च आदि मौसमी सब्जियों की खेती कर कमाई का जरिया खोजा।

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मात्र छठी कक्षा तक पढ़े किसान ईश्वर सिंह ने घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने के लिए 8 वर्ष पहले 4 एकड़ भूमि में से दो एकड़ में स्ट्राबेरी, गेंदे व गुलाब के पौधे व मौसमी सब्जियां टमाटर, घीया, तरकाकड़ी, तरबूज, तोरी व टिंडे की सब्जियां लगाकर खेती शुरू कर दी। इससे फूल, स्ट्राबेरी व सब्जियां बेचकर परंपरागत कृषि के साथ अतिरिक्त आमदन शुरू हो गई। इस बार वैश्विक महामारी कोरोना के कारण देश में लॉकडाउन के चलते स्ट्राबेरी से कोई फायदा नहीं हुआ लेकिन तरबूज, टमाटर, तोरी, मिर्च आदि की बिक्री बढ़ने से काफी लाभ हुआ। 
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परंपरागत खेती में कमाई कम होने के बाद सब्जी से कमाई शुरू की
आठ वर्ष पहले परंपरागत खेती में कमाई कम होने के बाद सब्जी से कमाई शुरू की। किसान ईश्वर सिंह ने बताया कि फसलों पर ज्यादा खर्च मंदे भाव के कारण परंपरागत खेती में तो बचत कम होने लगी। उसने छठी तक पढ़ाई करने के बाद सोचा कि गांव में परंपरागत खेती के साथ-साथ अन्य तरीकों से ही कमाई की जा सकती है।

अपने परिवार के साथ मिलकर खेती के साथ-साथ दो एकड़ में स्ट्राबेरी व बाद में उसी दो एकड़ में सब्जियां लगाई। जिससे उसको अतिरिक्त आमदनी होने लगी। इसके बाद गेंदे व गुलाब के पौधे भी लगाए, जिससे उसे हर वर्ष ज्यादा आमदनी शुरू हो गई। उसने बताया कि उसके चार एकड़ भूमि में खाने के लिए गेहूं व सरसों कपास, नरमें आदि की खेती करता है।

इस बार उसने एक एकड़ में तरबूज, आधा एकड़ में टमाटर, आधा एकड़ में तोरी, दो कनाल में हरी मिर्च की खेती की जिसे अब तक 3 लाख रुपये से अधिक की कमाई की है। उसने बताया कि इन सब्जियों में कभी रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं किया। हमेशा गोबर की खाद व जैविक खाद का प्रयोग किया है और कीटनाशक भी ऑर्गेनिक प्रयोग करते हैं। 

चोपटा में विकसित हो फूलों व सब्जी की मंडी
ईश्वर कड़वासरा ने बताया कि उसके क्षेत्र के आसपास सब्जी या स्ट्राबेरी, फूलों व फलों की मंडी न होने के कारण अन्य स्थानों पर ले जाकर बेचने में यातायात खर्च ज्यादा आता है तथा बचत कम होती है। इस बार लॉकडाउन के चलते स्ट्राबेरी से कोई फायदा नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि अब तो आसपास के किसानों का रुझान भी सब्जी लगाने की ओर बढ़ने लगा है, जिससे परंपरागत खेती के साथ अतिरिक्त कमाई होने लगी है। उसका कहना है कि अगर सब्जी की मंडी चोपटा में स्थापित हो जाए तो यातायात खर्च कम होने से बचत ज्यादा हो जाएगी। 

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