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पंजाब की एक ऐसी जेल, जहां 251 कैदी एचआईवी पॉजिटिव
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 04 Jun 2016 12:37 PM IST
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पंजाब की फरीदकोट जेल में एचआईवी पॉजीटिव कैदी
- फोटो : फाइल फोटो
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पंजाब में फरीदकोट जेल के 251 कैदी एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं। यह सभी कैदी ड्रग लेने के आदी भी हैं। यहीं पर बाल अपराधियों के लिए बने आब्जर्वेशन होम भी एक बाल अपराधी एचआईपी पॉजिटिव पाया गया है। यहां अधिकतर बाल अपराधी भी नशे के आदी हैं।
इस मामले में वीरवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए पंजाब सरकार को 4 अगस्त के लिए नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। जस्टिस एसएस सारों ने यह नोटिस जस्टिस लीजा गिल की ओर से हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस को लिखे पत्र पर संज्ञान लेते हुए जारी किया है।
जस्टिस लीजा गिल फरीदकोट की इंस्पेक्टिंग जज हैं और उन्होंने इस साल 17 व 18 मार्च को फरीदकोट जेल का दौरा किया था। उस दौरान उनके सामने यह मामला आया कि जेल में कैदियों के खून की जांच करने पर 251 कैदी एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं।
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जेल प्रबंधकों ने जस्टिस लीजा गिल को बताया कि जेल में इतनी बड़ी तादाद में एचआईवी पॉजिटिव कैदियों के इलाज में भी परेशानी आ रही है और कैदियों के खून की जांच के लिए फरीदकोट में कोई उचित व्यवस्था भी नहीं है। जेल प्रबंधन की ओर से खून के नमूनों की जांच के लिए बठिंडा एआरटी ले जाया जाता है।
जस्टिस लीजा गिल ने पत्र में लिखा कि फरीदकोट जेल में अधिकतर कैदी ड्रग्स के आदी हैं, जिससे यह बात भी साफ हो जाती है कि कैदियों को जेल में ही ड्रग्स उपलब्ध हो रही है। उन्होंने लिखा कि जेल में लगाए गए सीसीटीवी बेहद खस्ताहाल हैं।
जस्टिस लीजा गिल ने पत्र में फरीदकोट जेल के ऑब्जर्वेशन होम का जिक्र भी किया, जहां बाल अपराधियों के बीच कई बच्चे ड्रग्स के आदी पाए गए हैं। इन्हीं के बीच एक बाल अपराधी एचआईवी पॉजिटिव भी पाया गया है।
जस्टिस लीजा गिल ने एक्टिंग चीफ जस्टिस से मांग की कि अगर जेल भेजे जाने से पहले ही कैदियों का ब्लड टेस्ट करवा लिया जाए और यह पता चल जाए कि कैदी एचआईवी पॉजिटिव है तो उनका सही उपचार कराया जा सकता है।
इससे बाकी कैदियों को भी इस घातक रोग से बचाया जा सकता है। पत्र में उन्होंने यह मांग भी रखी कि फरीदकोट में एचआईवी रोग के लिए ब्लड सैंपल की जांच की सुविधा उपलब्ध करवाई जाए और जेल में हाई डेफिनिशन कैमरे लगाए जाएं ताकि जेल के भीतर ड्रग की आमद पर नजर रखी जा सके।
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इस मामले में वीरवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए पंजाब सरकार को 4 अगस्त के लिए नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। जस्टिस एसएस सारों ने यह नोटिस जस्टिस लीजा गिल की ओर से हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस को लिखे पत्र पर संज्ञान लेते हुए जारी किया है।
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जस्टिस लीजा गिल फरीदकोट की इंस्पेक्टिंग जज हैं और उन्होंने इस साल 17 व 18 मार्च को फरीदकोट जेल का दौरा किया था। उस दौरान उनके सामने यह मामला आया कि जेल में कैदियों के खून की जांच करने पर 251 कैदी एचआईवी पॉजिटिव पाए गए हैं।
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जेल प्रबंधकों ने जस्टिस लीजा गिल को बताया कि जेल में इतनी बड़ी तादाद में एचआईवी पॉजिटिव कैदियों के इलाज में भी परेशानी आ रही है और कैदियों के खून की जांच के लिए फरीदकोट में कोई उचित व्यवस्था भी नहीं है। जेल प्रबंधन की ओर से खून के नमूनों की जांच के लिए बठिंडा एआरटी ले जाया जाता है।
जस्टिस लीजा गिल ने पत्र में लिखा कि फरीदकोट जेल में अधिकतर कैदी ड्रग्स के आदी हैं, जिससे यह बात भी साफ हो जाती है कि कैदियों को जेल में ही ड्रग्स उपलब्ध हो रही है। उन्होंने लिखा कि जेल में लगाए गए सीसीटीवी बेहद खस्ताहाल हैं।
जस्टिस लीजा गिल ने पत्र में फरीदकोट जेल के ऑब्जर्वेशन होम का जिक्र भी किया, जहां बाल अपराधियों के बीच कई बच्चे ड्रग्स के आदी पाए गए हैं। इन्हीं के बीच एक बाल अपराधी एचआईवी पॉजिटिव भी पाया गया है।
जस्टिस लीजा गिल ने एक्टिंग चीफ जस्टिस से मांग की कि अगर जेल भेजे जाने से पहले ही कैदियों का ब्लड टेस्ट करवा लिया जाए और यह पता चल जाए कि कैदी एचआईवी पॉजिटिव है तो उनका सही उपचार कराया जा सकता है।
इससे बाकी कैदियों को भी इस घातक रोग से बचाया जा सकता है। पत्र में उन्होंने यह मांग भी रखी कि फरीदकोट में एचआईवी रोग के लिए ब्लड सैंपल की जांच की सुविधा उपलब्ध करवाई जाए और जेल में हाई डेफिनिशन कैमरे लगाए जाएं ताकि जेल के भीतर ड्रग की आमद पर नजर रखी जा सके।