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Hindi News ›   Chandigarh ›   New revelation in case of promotion of 11 policemen by forging signature of former punjab DGP 

फर्जी हस्ताक्षर मामले में नया खुलासा: पुलिसकर्मियों की पदोन्नति के अलावा आरोपियों ने दो सिपाहियों की कराई थी भर्ती

Thu, 20 Jan 2022 02:30 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Thu, 20 Jan 2022 02:30 AM IST
सार

एसआईटी ने मोहाली साइबर सेल में तैनात निरीक्षक सतवंत सिंह और बर्खास्त चल रहे उपनिरीक्षक सरबजीत को गिरफ्तार कर लिया है। पूरे मामले का मास्टरमाइंड उपनिरीक्षक हरविंदर सिंह अभी फरार चल रहा है।

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New revelation in case of promotion of 11 policemen by forging signature of former punjab DGP 
चंडीगढ़ पुलिस। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब के तत्कालीन डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय के फर्जी हस्ताक्षर कर 11 पुलिसकर्मियों की पदोन्नति मामले में एक और खुलासा हुआ है। आरोपियों ने डीजीपी के फर्जी हस्ताक्षर कर दो सिपाहियों को भी भर्ती करवाया है। इस मामले में एसआईटी ने मोहाली साइबर सेल में तैनात निरीक्षक सतवंत सिंह और बर्खास्त चल रहे उपनिरीक्षक सरबजीत को गिरफ्तार कर लिया है। पूरे मामले का मास्टरमाइंड उपनिरीक्षक हरविंदर सिंह अभी फरार चल रहा है। पुलिस दोनों आरोपियों को गुरुवार को जिला अदालत में पेश करेगी। फर्जी हस्ताक्षर मामले में मोहाली फेज-6 निवासी संदीप कुमार (55), मनी कटोच (33), चंडीगढ़ सेक्टर-39 निवासी बहादुर सिंह (52), मोहाली के थ्रीबीटू निवासी सरबजीत सिंह (47) और फाजिल्का निवासी सतवंत सिंह (48) को एसआईटी गिरफ्तार कर चुकी है।

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आरोपी सतवंत सिंह मोहाली क्राइम ब्रांच सहित कई थानों का प्रभारी भी रह चुका है। मास्टरमाइंड हरविंदर सिंह ने ही 11 पुलिसकर्मियों की पदोन्नति करने की बात की थी। एसआईटी की जांच में सामने आया है कि डीजीपी के फर्जी हस्ताक्षर से पंजाब पुलिस में दो सिपाही भी भर्ती हुए हैं। हरविंदर सिंह की गिरफ्तारी के बाद पता चलेगा कि किन दो सिपाहियों को फर्जी हस्ताक्षर करके भर्ती किया गया था। साथ ही अब तक कितने सिपाहियों को फर्जी हस्ताक्षर के माध्यम से पदोन्नत और भर्ती कराया गया है। वहीं, इस मामले में पुलिस को अमित गुप्ता नाम के युवक पर भी शक है। अमित पुलिस विभाग में नहीं है, लेकिन वह डीजीपी के साथ खुद के अच्छे संबंध बताता था। गिरफ्तार आरोपी संदीप ने मनी कटोच की मदद से खुद के लैपटॉप से फर्जी सूची टाइप की थी। बहादुर सिंह ने डिस्पैच रजिस्टर पर इस सूची की एंट्री की थी। सरबजीत सिंह के घर पर मीटिंग हुई थी, उसने डीजीपी के साथ खुद के अच्छे लिंक बताए थे।

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कार, फर्जी सूची और लैपटॉप टीम ने अपने कब्जे में लिया

एसआईटी को आरोपी संदीप कुमार से लैपटॉप और आरोपियों के मोबाइल फोन भी बरामद हुए हैं। इसके अलावा टीम ने सीपीयू, जाली ऑर्डर की कॉपी और डिस्पैच रजिस्टर भी कब्जे में लिया है। पुलिस ने आरोपी मनी कटोच के कब्जे से कार बरामद की है। संदीप कुमार के खिलाफ मोहाली फेस-8 में पीसी एक्ट के तहत केस दर्ज है। जबकि, सरबजीत सिंह के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट का केस दर्ज है।

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चार महीने में सिपाही से बन गया उपनिरीक्षक, बेटे को भी करवाया भर्ती

आरोपी हरविंदर सिंह खुद को डीजीपी के फर्जी हस्ताक्षर कर कई बार पदोन्नति ले चुका है। चार महीने में वह सिपाही से उपनिरीक्षक बन गया था। उसने खुद के बेटे को भी डीजीपी के फर्जी हस्ताक्षर कर पंजाब पुलिस में सिपाही के रैंक पर भर्ती करवा दिया था। इसके अलाव एक और सिपाही को भी इसी तरह भर्ती करवाया था। इस मामले की जांच आरोपी की गिरफ्तारी के बाद होगी।

तीनों आरोपी चार दिन के रिमांड पर

एसआईटी ने बुधवार को पंजाब पुलिस मुख्यालय में जीबी ब्रांच के सुपरिंटेंडेंट संदीप कुमार, ई-1 ब्रांच में तैनात बहादुर सिंह और हाल ही में अमृतसर से 13 बटालियन सेक्टर-1 चंडीगढ़ ट्रांसफर हुए हवलदार मनी कटोच को जिला अदालत में पेश किया। जहां से आरोपियों को चार दिन के रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस चारों से पूछताछ कर रही है।

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