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सोनीपतः फर्जी प्रमाणपत्र से दाखिला लेने वाले पशुपालन विभाग के तत्कालीन उपनिदेशक गिरफ्तार
Sun, 15 Mar 2020 02:25 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, सोनीपत
अमर उजाला, सोनीपत
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sun, 15 Mar 2020 02:25 PM IST
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तत्कालीन उपनिदेशक गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
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फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाकर यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने का आरोपी जिला पशुपालन विभाग के तत्कालीन उपनिदेशक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। डिग्री मिलने के 29 साल बाद उन पर सिटी थाना में मुकदमा दर्ज किया गया था। मुकदमा उनके विभाग की महिला चिकित्सक की शिकायत पर दर्ज हुआ था।
महिला चिकित्सक ने अपनी शिकायत एडीजीपी सीआईडी को दी थी। जिस पर सीआईडी व सीएम फ्लाइंग की टीम ने जांच कर मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए थे। पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश किया, जहां उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
पशुपालन विभाग की महिला चिकित्सक डॉ. रितू ने एडीजीपी सीआईडी को भेजी शिकायत में आरोप लगाया था कि उनके विभाग के उप निदेशक डॉ.जसवंत सिंह ने सामान्य श्रेणी से होते हुए अनुसूचित जाति जनजाति का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर बीवीएससी एएच (पशु चिकित्सक) की डिग्री हासिल की है। उसी डिग्री के आधार पर हरियाणा सरकार में नौकरी पाई है। साथ उन्होंने मामले में हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के तत्कालीन रजिस्ट्रार की भूमिका की भी जांच की मांग की थी।
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पहले राजस्थान व फिर हरियाणा सरकार में की नौकरी
आरोप है कि फर्जी जातिप्रमाण पत्र के आधार पर मिली डिग्री के सहारे ही डॉ. जसवंत सिंह ने पहले राजस्थान में पशु चिकित्सक की नौकरी पाई थी। वहां से 2003 में छोडक़र आ गए और बाद में 2004 में हरियाणा सरकार में एसडीओ के पद पर नियुक्त हुए। उसके बाद डिप्टी डायरेक्टर के पद तक पहुंच गए थे।
सीएम फ्लाइंग ने मामले की जांच कर उनके पास भेजी थी। जिस पर मुकदमा दर्ज कर लिया था। मामले में कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। उसे अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
- रवि कुमार, थाना प्रभारी सिटी सोनीपत
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महिला चिकित्सक ने अपनी शिकायत एडीजीपी सीआईडी को दी थी। जिस पर सीआईडी व सीएम फ्लाइंग की टीम ने जांच कर मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए थे। पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश किया, जहां उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
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पशुपालन विभाग की महिला चिकित्सक डॉ. रितू ने एडीजीपी सीआईडी को भेजी शिकायत में आरोप लगाया था कि उनके विभाग के उप निदेशक डॉ.जसवंत सिंह ने सामान्य श्रेणी से होते हुए अनुसूचित जाति जनजाति का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर बीवीएससी एएच (पशु चिकित्सक) की डिग्री हासिल की है। उसी डिग्री के आधार पर हरियाणा सरकार में नौकरी पाई है। साथ उन्होंने मामले में हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के तत्कालीन रजिस्ट्रार की भूमिका की भी जांच की मांग की थी।
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पहले राजस्थान व फिर हरियाणा सरकार में की नौकरी
आरोप है कि फर्जी जातिप्रमाण पत्र के आधार पर मिली डिग्री के सहारे ही डॉ. जसवंत सिंह ने पहले राजस्थान में पशु चिकित्सक की नौकरी पाई थी। वहां से 2003 में छोडक़र आ गए और बाद में 2004 में हरियाणा सरकार में एसडीओ के पद पर नियुक्त हुए। उसके बाद डिप्टी डायरेक्टर के पद तक पहुंच गए थे।
सीएम फ्लाइंग ने मामले की जांच कर उनके पास भेजी थी। जिस पर मुकदमा दर्ज कर लिया था। मामले में कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। उसे अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
- रवि कुमार, थाना प्रभारी सिटी सोनीपत
अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवाया
डॉ. रितू ने आरोप लगाया था कि डॉ.जसवंत सिंह ने सामान्य जाति से होते हुए धोखाधड़ी कर फर्जी तरीके से अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि आरटीआई में इसका खुलासा हुआ था। उन्होंने बताया था कि बीवीएससी एएच (पशु चिकित्सक) की डिग्री लेने के लिए सामान्य श्रेणी के छात्र को 12वीं में 50 फीसदी अंक होने चाहिए। जबकि डॉ. जसवंत के अंक कम थे।
जिस पर उन्होंने जून, 1986 में फर्जी कागजात देकर फर्जी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र बनवा लिया था। जिसके आधार पर उन्होंने दाखिला ले लिया था। उन्होंने 1991 में डिग्री प्राप्त कर ली थी। बाद में 1993 में एमवीएससी की डिग्री भी ले ली थी। उनके खिलाफ 1996 में एक शिकायत दी गई थी। जिस पर रजिस्ट्रार कार्यालय के स्टाफ ने मिलभगत कर उनका बचाव कर लिया था।
महिला चिकित्सक ने आरोप लगाया था कि मामले की जांच की जाए। अगर सामान्य श्रेणी के होते हुए अनुसूचित जाति का प्रमाण से डिग्री कर नौकरी पाई है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। जिस पर सीआईडी व सीएम फ्लाइंग ने जांच कर मुकदमा दर्ज करने के लिए सिर्टी थाना पुलिस को भेज दिया था।
28 जनवरी को पुलिस ने मामले में डॉ.जसंवत के खिलाफ भादसं की धारा 120बी, 201, 420, 467, 468 व 471 के तहत मुकदमा दर्ज किया था। अब मामले में कार्रवाई करते हुए सिटी थाना की कोर्ट काम्पलेक्स चौकी में नियुक्त एएसआई बिजेंद्र सिंह की टीम ने आरोपी डॉ.जसवंत दहिया को गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
जिस पर उन्होंने जून, 1986 में फर्जी कागजात देकर फर्जी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र बनवा लिया था। जिसके आधार पर उन्होंने दाखिला ले लिया था। उन्होंने 1991 में डिग्री प्राप्त कर ली थी। बाद में 1993 में एमवीएससी की डिग्री भी ले ली थी। उनके खिलाफ 1996 में एक शिकायत दी गई थी। जिस पर रजिस्ट्रार कार्यालय के स्टाफ ने मिलभगत कर उनका बचाव कर लिया था।
महिला चिकित्सक ने आरोप लगाया था कि मामले की जांच की जाए। अगर सामान्य श्रेणी के होते हुए अनुसूचित जाति का प्रमाण से डिग्री कर नौकरी पाई है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। जिस पर सीआईडी व सीएम फ्लाइंग ने जांच कर मुकदमा दर्ज करने के लिए सिर्टी थाना पुलिस को भेज दिया था।
28 जनवरी को पुलिस ने मामले में डॉ.जसंवत के खिलाफ भादसं की धारा 120बी, 201, 420, 467, 468 व 471 के तहत मुकदमा दर्ज किया था। अब मामले में कार्रवाई करते हुए सिटी थाना की कोर्ट काम्पलेक्स चौकी में नियुक्त एएसआई बिजेंद्र सिंह की टीम ने आरोपी डॉ.जसवंत दहिया को गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।