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नई शिक्षा नीति का विशेषज्ञों ने किया स्वागत, बोले- अब मजबूती से धरातल में उतारना बेहद जरूरी
Sun, 02 Aug 2020 10:31 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sun, 02 Aug 2020 10:31 AM IST
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वेबिनार में हिस्सा लेते शिक्षा विशेषज्ञ
- फोटो : अमर उजाला
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34 साल बाद आई नई शिक्षा नीति का विशेषज्ञों ने जोरदार स्वागत किया है। यह शिक्षा नीति स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा के कॉलेजों व विश्वविद्यालयों को मजबूत करेगी। साथ ही शिक्षा को सहज व सरल बनाएगी। सभी चीजों को समाहित करते हुए यह मातृभाषा, स्थानीय भाषा के प्रति प्रेम जगाने के साथ-साथ संस्कारी बनाएगी और युवाओं को देशभक्ति की ओर ले जाएगी।
यही नहीं रोजगार के रास्ते भी छात्र के 18 साल पूरे होते ही खोल देगी। लेकिन यह तभी होगा जब पूरी तरह इस नीति को धरातल पर उतारा जाएगा। पूरी ईमानदारी के साथ हर कड़ी काम करेगी। यह बात शनिवार को अमर उजाला के वेबिनार में विशेषज्ञों ने कही। वेबिनार का विषय ‘नई शिक्षा नीति कितनी फायदेमंद व क्या होंगी चुनौतियां’ था।
उन्होंने कहा कि नीति से जुड़े नेता, अफसर, शिक्षक, अभिभावक, स्कूल संचालकों को मिलकर काम करना होगा। हालांकि सवाल संसाधनों की कमी का भी सामने खड़ा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी पूर्ति समय रहते हो जाएगी। क्योंकि कुल जीडीपी का छह फीसदी हिस्सा इसी पर खर्च होगा। लगभग डेढ़ फीसदी हिस्सा इस बार बढ़ाया गया है।
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यही नहीं रोजगार के रास्ते भी छात्र के 18 साल पूरे होते ही खोल देगी। लेकिन यह तभी होगा जब पूरी तरह इस नीति को धरातल पर उतारा जाएगा। पूरी ईमानदारी के साथ हर कड़ी काम करेगी। यह बात शनिवार को अमर उजाला के वेबिनार में विशेषज्ञों ने कही। वेबिनार का विषय ‘नई शिक्षा नीति कितनी फायदेमंद व क्या होंगी चुनौतियां’ था।
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उन्होंने कहा कि नीति से जुड़े नेता, अफसर, शिक्षक, अभिभावक, स्कूल संचालकों को मिलकर काम करना होगा। हालांकि सवाल संसाधनों की कमी का भी सामने खड़ा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी पूर्ति समय रहते हो जाएगी। क्योंकि कुल जीडीपी का छह फीसदी हिस्सा इसी पर खर्च होगा। लगभग डेढ़ फीसदी हिस्सा इस बार बढ़ाया गया है।
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किसी पर जबरदस्ती नहीं थोपी जाएगी भाषा
नई शिक्षा नीति हर किसी के सुझाव के बाद बनाई गई है। यह नीति बच्चों से लेकर युवाओं को संस्कारी व देशभक्त बनाएगी। मातृभाषा में पढ़ाई होने से बच्चों को जल्द समझ में आएगी। किसी पर जबरदस्ती भाषा थोपी नहीं जाएगी। कुल जीडीपी का छह फीसदी हिस्सा इस पर खर्च होने से संसाधनों की पूर्ति होगी। टीचर-स्टूडेंट्स रेश्यो ठीक होगा। बार-बार विद्यार्थियों को प्रवेश के लिए परीक्षाएं नहीं देनी होंगी। रेगूलेटरी अथॉरिटी के कारण भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सकेगा। निजी व सरकारी शिक्षण संस्थानों के गुणवत्ता के एक मानक होंगे। इसमें समझौता नहीं हो सकेगा।
- डॉ. सुभाष शर्मा, पीयू फेलो एवं सेंटर फॉर इकोनॉमिक पॉलिसी एंड रिसर्च के डायरेक्टर
आत्मनिर्भरता की बात कर रहे, पर विदेशी विश्वविद्यालयों को बुला रहे
शिक्षा नीति में बदलाव जरूरी था। इस नीति का स्वागत करते हैं, लेकिन इस नीति के तहत विद्यार्थियों को मिलने वाले एक साल के सर्टिफिकेट व दो साल के डिप्लोमा की वैल्यू क्या होगी, यह देखना होगा। आत्मनिर्भरता की हम बात करते हैं, लेकिन इस नीति के तहत हम विदेशी विश्वविद्यालयों को भी न्यौता दे रहे हैं। यह विश्वविद्यालय शिक्षकों को अधिक पैसे देकर नौकरी पर रखेंगे, लेकिन उन शिक्षकों के जाने से विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता गिर जाएगी। विदेशी शिक्षण संस्थान फीस भी मोटी लेंगे और एजुकेशन सिस्टम को नुकसान पहुंचाएंगे। जेंडर स्टडीज का बिंदु नीति से गायब है। साथ ही संसाधनों की भी भारी कमी है, इसकी पूर्ति का खाका सामने नहीं रखा।
- प्रो. मुहम्मद खालिद, पीयू ईवनिंग स्टडीज एवं पुटा के पूर्व अध्यक्ष
धरातल पर शत-प्रतिशत उतारी जाए नीति
नई शिक्षा नीति वाकई बेहतरीन लाई गई है। कुल जीडीपी का छह फीसदी हिस्सा इस पर खर्च होगा तो संसाधनों की पूर्ति होगी। वोकेशनल कोर्सेज के जरिये छात्र शुरू से ही प्रशिक्षित हो सकेंगे। चीन आदि देश यहां निवेश करने जा रहे हैं। ऐसे में उन्हें नौकरी मिल जाएगी। साथ ही यह शिक्षा नीति देश, समाज व मातृभाषा के प्रति प्रेम जगाएगी, लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि इस नीति का कार्यान्वयन पूरी तरह से होना चाहिए। हर कड़ी को इसके लिए काम करना होगा। तभी सफलता मिल पाएगी।
- प्रो. एसके मेहता, रसायन विज्ञान विभाग पीयू एवं सैफ-सीआईएल लैब के पूर्व निदेशक
- डॉ. सुभाष शर्मा, पीयू फेलो एवं सेंटर फॉर इकोनॉमिक पॉलिसी एंड रिसर्च के डायरेक्टर
आत्मनिर्भरता की बात कर रहे, पर विदेशी विश्वविद्यालयों को बुला रहे
शिक्षा नीति में बदलाव जरूरी था। इस नीति का स्वागत करते हैं, लेकिन इस नीति के तहत विद्यार्थियों को मिलने वाले एक साल के सर्टिफिकेट व दो साल के डिप्लोमा की वैल्यू क्या होगी, यह देखना होगा। आत्मनिर्भरता की हम बात करते हैं, लेकिन इस नीति के तहत हम विदेशी विश्वविद्यालयों को भी न्यौता दे रहे हैं। यह विश्वविद्यालय शिक्षकों को अधिक पैसे देकर नौकरी पर रखेंगे, लेकिन उन शिक्षकों के जाने से विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता गिर जाएगी। विदेशी शिक्षण संस्थान फीस भी मोटी लेंगे और एजुकेशन सिस्टम को नुकसान पहुंचाएंगे। जेंडर स्टडीज का बिंदु नीति से गायब है। साथ ही संसाधनों की भी भारी कमी है, इसकी पूर्ति का खाका सामने नहीं रखा।
- प्रो. मुहम्मद खालिद, पीयू ईवनिंग स्टडीज एवं पुटा के पूर्व अध्यक्ष
धरातल पर शत-प्रतिशत उतारी जाए नीति
नई शिक्षा नीति वाकई बेहतरीन लाई गई है। कुल जीडीपी का छह फीसदी हिस्सा इस पर खर्च होगा तो संसाधनों की पूर्ति होगी। वोकेशनल कोर्सेज के जरिये छात्र शुरू से ही प्रशिक्षित हो सकेंगे। चीन आदि देश यहां निवेश करने जा रहे हैं। ऐसे में उन्हें नौकरी मिल जाएगी। साथ ही यह शिक्षा नीति देश, समाज व मातृभाषा के प्रति प्रेम जगाएगी, लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि इस नीति का कार्यान्वयन पूरी तरह से होना चाहिए। हर कड़ी को इसके लिए काम करना होगा। तभी सफलता मिल पाएगी।
- प्रो. एसके मेहता, रसायन विज्ञान विभाग पीयू एवं सैफ-सीआईएल लैब के पूर्व निदेशक
प्रेक्टिकल पर जोर देना अच्छी बात, छात्र जल्द समझेंगे
च्वाइस बेस क्रेडिट सिस्टम देश में पहले से लागू था, लेकिन नीति के आने से अब और प्रभावी होगा। हर विद्यार्थी अपने मनपसंद के विषय पढ़ सकेगा। थ्योरी की बजाय इस नीति में प्रेक्टिकल पर अधिक जोर दिया गया है। प्रयोग करने से विद्यार्थी या बच्चे हर चीज जल्दी समझते हैं। ऐसे में वह ज्ञानवान बनेंगे और कार्यों में कुशल होंगे। काम की वैल्यू समझेंगे और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेंगे। स्किल डवलपमेंट योजना के तहत फंड बढ़ा है और इस नीति के तहत और फंड बढ़ेगा। एक अच्छी बात ये है कि बच्चे की नींव इससे मजबूत होगी। वह अपनी भाषा में पढ़ाई कर सकेंगे। हर चीज उन्हें आसानी से समझ में आएगी।
- प्रो. हरीश कुमार, स्किल डवलपमेंट सेंटर पीयू के निदेशक एवं इंजीनियरिंग विभाग में शिक्षक
पलायन रुकेगा.. देश में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
सोसाइटी व एजुकेशन का जुड़ाव धीरे-धीरे कम हुआ तो सरकार ने इसे समझा और उस पर काम किया। फ्यूचर को देखते हुए यह नीति बनाई गई जो युवाओं का बेहतर भविष्य बनाएगी। इससे पलायन रुकेगा। देश में ही रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। अच्छे शिक्षकों को अपने विकास के लिए भी समय दिया जाएगा। साथ ही यह नीति आईआईटी व आईआईएम जैसे शिक्षण संस्थानों की तरह अन्य संस्थानों को संसाधन मुहैया कराने का काम करेगी। पांच साल के अंदर नीति के लिए जो भी सुझाव आएंगे तो वह भी इसमें शामिल होंगे।
- डॉ. प्रियतोष शर्मा, हिस्ट्री विभाग पीयू
पॉलिसी अच्छी.. संसाधनों की पूर्ति पर करना होगा काम
पॉलिसी अच्छी है, लेकिन इसका कार्यान्वयन कैसे होगा, यह चुनौती है। रिसर्च व इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए संसाधन चाहिए। हर शिक्षण संस्थान में संसाधनों की कमी है। शिक्षक तक नहीं हैं। ऐसे में इसकी पूर्ति कैसे होगी। इस पर काम करना चाहिए था। चीन की तरह आर्थिक शक्ति बनना है तो एजुकेशन पर हमें और ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। जिस कॉलेज में तीन हजार से अधिक विद्यार्थी होंगे वही चल पाएंगे। इस कारण ग्रामीण व कस्बों वाले कॉलेजों पर खतरा मंडराएगा। गरीब वर्गों के विद्यार्थी शिक्षा कैसे ग्रहण कर पाएंगे। आईआईएम व आईआईटी जैसे संस्थानों को मल्टीडिसिप्लेनरी बना दिया गया तो उनकी गुणवत्ता या साख खतरे में होगी।
- डॉ. कुलविंदर सिंह, यूबीएस विभाग पीयू
- प्रो. हरीश कुमार, स्किल डवलपमेंट सेंटर पीयू के निदेशक एवं इंजीनियरिंग विभाग में शिक्षक
पलायन रुकेगा.. देश में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
सोसाइटी व एजुकेशन का जुड़ाव धीरे-धीरे कम हुआ तो सरकार ने इसे समझा और उस पर काम किया। फ्यूचर को देखते हुए यह नीति बनाई गई जो युवाओं का बेहतर भविष्य बनाएगी। इससे पलायन रुकेगा। देश में ही रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। अच्छे शिक्षकों को अपने विकास के लिए भी समय दिया जाएगा। साथ ही यह नीति आईआईटी व आईआईएम जैसे शिक्षण संस्थानों की तरह अन्य संस्थानों को संसाधन मुहैया कराने का काम करेगी। पांच साल के अंदर नीति के लिए जो भी सुझाव आएंगे तो वह भी इसमें शामिल होंगे।
- डॉ. प्रियतोष शर्मा, हिस्ट्री विभाग पीयू
पॉलिसी अच्छी.. संसाधनों की पूर्ति पर करना होगा काम
पॉलिसी अच्छी है, लेकिन इसका कार्यान्वयन कैसे होगा, यह चुनौती है। रिसर्च व इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए संसाधन चाहिए। हर शिक्षण संस्थान में संसाधनों की कमी है। शिक्षक तक नहीं हैं। ऐसे में इसकी पूर्ति कैसे होगी। इस पर काम करना चाहिए था। चीन की तरह आर्थिक शक्ति बनना है तो एजुकेशन पर हमें और ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। जिस कॉलेज में तीन हजार से अधिक विद्यार्थी होंगे वही चल पाएंगे। इस कारण ग्रामीण व कस्बों वाले कॉलेजों पर खतरा मंडराएगा। गरीब वर्गों के विद्यार्थी शिक्षा कैसे ग्रहण कर पाएंगे। आईआईएम व आईआईटी जैसे संस्थानों को मल्टीडिसिप्लेनरी बना दिया गया तो उनकी गुणवत्ता या साख खतरे में होगी।
- डॉ. कुलविंदर सिंह, यूबीएस विभाग पीयू
पांच साल में बहुत कुछ मिलने वाला है बच्चों को
एचआरडी का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय करने का प्रस्ताव बेहतर है। साथ ही सरकार ने टारगेट सेट करके नीति को लागू किया है। हर पांच साल में देश के बच्चों को बहुत कुछ मिलने वाला है। पहले वाली शिक्षा नीति टारगेट लेकर नहीं चली गई। नई शिक्षा नीति बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा में ला सकेगी। स्टूडेंट्स अधिक से अधिक विषयों की तैयारी कर पाएंगे। एक विद्यार्थी एक साल स्नातक में पढ़कर सर्टिफिकेट प्राप्त करेगा और नौकरी पा लेगा जबकि उसके पास पैसे और आ जाएंगे तो वह फिर से स्नातक के बचे वर्षों की पढ़ाई कर लेगा। यही नहीं विदेशी विद्यार्थियों को भी यह नीति देश में और खींचकर लाएगी। भारत को पूरी तरह आत्मनिर्भर यह नीति बनाएगी।
- डॉ. अरुण सिंह ठाकुर, यूआईएचटीएम विभाग पीयू
वेबिनार के सवाल-जवाब
सवाल: ऑल इंडिया सर्वे ऑफ हायर एजुकेशन के 2018-19 के आंकड़ों के अनुसार उच्च शिक्षा तक मात्र 26.3 प्रतिशत युवा ही पहुंच रहे हैं, जबकि देश की साक्षरता 74.04 प्रतिशत है। दोनों में इस अंतर को दूर करने की नई शिक्षा नीति में व्यवस्था की गई है?
- अनुज सिंह, नेशनल को-ऑर्डिनेटर, एनएसयूआई सोशल मीडिया
जवाब : शिक्षा नीति बनाने में देरी के कारण यह अंतर आया है। 34 सालों बाद बनी नई शिक्षा नीति में उच्च शिक्षा को लेकर कई बिंदुओं को शामिल किया गया है। हाल ही में किए गए कई सर्वे में इस अंतर में कमी आई है। नई नीति के तहत होने वाले बदलाव से और भी अंतर कम होगा, हालांकि इस कार्य में अभी समय लेगा।
- डॉ. अरुण सिंह ठाकुर, यूआईएचटीएम विभाग पीयू
वेबिनार के सवाल-जवाब
सवाल: ऑल इंडिया सर्वे ऑफ हायर एजुकेशन के 2018-19 के आंकड़ों के अनुसार उच्च शिक्षा तक मात्र 26.3 प्रतिशत युवा ही पहुंच रहे हैं, जबकि देश की साक्षरता 74.04 प्रतिशत है। दोनों में इस अंतर को दूर करने की नई शिक्षा नीति में व्यवस्था की गई है?
- अनुज सिंह, नेशनल को-ऑर्डिनेटर, एनएसयूआई सोशल मीडिया
जवाब : शिक्षा नीति बनाने में देरी के कारण यह अंतर आया है। 34 सालों बाद बनी नई शिक्षा नीति में उच्च शिक्षा को लेकर कई बिंदुओं को शामिल किया गया है। हाल ही में किए गए कई सर्वे में इस अंतर में कमी आई है। नई नीति के तहत होने वाले बदलाव से और भी अंतर कम होगा, हालांकि इस कार्य में अभी समय लेगा।
सवाल : पहले से ही केंद्र और राज्यों के बीच शिक्षा नीति को लेकर तनातनी रहती है। नई शिक्षा नीति में कई ऐसे बदलाव किए गए हैं, जिनसे शिक्षा नीति का केंद्रीकरण होते दिख रहा है। राज्यों के विरोध से युवाओं के भविष्य पर खतरा मंडरा सकता है।
- अनुज सिंह, छात्र, पीयू
जवाब : हां, कुछ बिंदुओं पर टकराव की संभावना बनी हुई है। लेकिन युवाओं के भविष्य को देखते हुए केंद्र और राज्य कोई भी गलत फैसला नहीं लेंगे। राज्यों को भी युवाओं के भविष्य को लेकर किए गए बेहतर विकल्पों को चुनना होगा।
सवाल : अभी कुछ राज्यों में अंग्रेजी या अन्य स्थानीय भाषा में पढ़ाई करना अनिवार्य किया गया है, नई शिक्षा नीति में इसमें सुधार की संभावना रखी गई है?
- समीर महाजन, शिक्षाविद
जवाब : नई शिक्षा नीति में सेक्शन- 22 में यह लिखा है कि अब अंग्रेजी या अन्य किसी भाषा की छात्र के लिए अनिवार्यता नहीं होगी। छात्र अपनी मर्जी से राष्ट्रभाषा या अपनी लोकल भाषा में पढ़ाई कर पाएगा। छात्र की यदि किसी क्षेत्र में खास रुचि है तो उसके लिए प्रेक्टिकल की भी सुविधा स्कूलों में की जाएगी।
सवाल : नई शिक्षा नीति के तहत छात्र पढ़कर किस उम्र तक कमाना शुरू कर देगा।
- कर्नल सतीश चंद्र सूद, चंडीगढ़
जवाब : पैसे कमाने की कोई उम्र नहीं होती। कोई इंटर के बाद ही नौकरी पा लेता है तो कोई पीएचडी करने के बाद भी नौकरी नहीं पा पाता। यह अपने हुनर पर निर्भर करता है। फिर भी नीति के तहत 18 साल की आयु में आते-आते युवा नौकरी पा सकेंगे।
- अनुज सिंह, छात्र, पीयू
जवाब : हां, कुछ बिंदुओं पर टकराव की संभावना बनी हुई है। लेकिन युवाओं के भविष्य को देखते हुए केंद्र और राज्य कोई भी गलत फैसला नहीं लेंगे। राज्यों को भी युवाओं के भविष्य को लेकर किए गए बेहतर विकल्पों को चुनना होगा।
सवाल : अभी कुछ राज्यों में अंग्रेजी या अन्य स्थानीय भाषा में पढ़ाई करना अनिवार्य किया गया है, नई शिक्षा नीति में इसमें सुधार की संभावना रखी गई है?
- समीर महाजन, शिक्षाविद
जवाब : नई शिक्षा नीति में सेक्शन- 22 में यह लिखा है कि अब अंग्रेजी या अन्य किसी भाषा की छात्र के लिए अनिवार्यता नहीं होगी। छात्र अपनी मर्जी से राष्ट्रभाषा या अपनी लोकल भाषा में पढ़ाई कर पाएगा। छात्र की यदि किसी क्षेत्र में खास रुचि है तो उसके लिए प्रेक्टिकल की भी सुविधा स्कूलों में की जाएगी।
सवाल : नई शिक्षा नीति के तहत छात्र पढ़कर किस उम्र तक कमाना शुरू कर देगा।
- कर्नल सतीश चंद्र सूद, चंडीगढ़
जवाब : पैसे कमाने की कोई उम्र नहीं होती। कोई इंटर के बाद ही नौकरी पा लेता है तो कोई पीएचडी करने के बाद भी नौकरी नहीं पा पाता। यह अपने हुनर पर निर्भर करता है। फिर भी नीति के तहत 18 साल की आयु में आते-आते युवा नौकरी पा सकेंगे।