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High Court: पत्नी की सैलरी ज्यादा, पति पहुंचा हाई कोर्ट, अदालत का फैसला- जिम्मेदारी से नहीं भाग सकता Husband
Thu, 07 Nov 2024 10:55 AM IST
अंकेश ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Thu, 07 Nov 2024 10:55 AM IST
सार
पत्नी की सैलरी ज्यादा है। पति के साथ विवाद के चलते दोनों अलग रहते हैं। पति ने अदालत को बताया कि उसकी एक बेटी है, जो उसकी पत्नी के साथ रहती है। उसका वेतन 22 हजार है जबकि पत्नी की सैलरी 34500 रुपये है।
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि पत्नी उससे अधिक कमाती है यह दलील देकर पति अपने बच्चे के प्रति नैतिक और पारिवारिक जिम्मेदारी से नहीं भाग सकता। हाईकोर्ट ने मोगा की फैमिली कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसके तहत पिता को प्रतिमाह बेटे के गुजारा भत्ता के रूप में सात हजार रुपये भुगतान करने को कहा गया था।
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याचिका दाखिल करते हुए पिता ने हाईकोर्ट को बताया कि उसका उसकी पत्नी के साथ विवाद चल रहा है। उसकी एक बेटी है, जो उसकी पत्नी के साथ रहती है। बेटी की कस्टडी के लिए उसने अदालत में याचिका दाखिल की है। यह विचाराधीन है। इसी बीच उसकी पत्नी ने बेटी के गुजारे के लिए फैमिली कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। मोगा की फैमिली कोर्ट ने आदेश दिया था कि याची बेटी के गुजारे के लिए प्रतिमाह सात हजार रुपये का भुगतान करेगा।
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याची ने कहा कि वह प्राइवेट नौकरी करता है और उसका वेतन केवल 22 हजार रुपये है। इस वेतन में उसे अपने पूरे परिवार का गुजारा करना पड़ता है, जबकि याची की पत्नी सरकारी नौकरी करती है और उसका वेतन 34500 रुपये है। याची की पत्नी याची से अधिक कमाती है और ऐसे में वह बेटी को अच्छी परवरिश दे सकती है।
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ऐसे में फैमिली कोर्ट के आदेश को रद्द किया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चे माता-पिता दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी होते हैं। पिता का यह नैतिक व पारिवारिक दायित्व होता है कि वह अपने बच्चों का भरण पोषण उसी अनुरूप करे, जिस प्रकार उसकी जीवनशैली है। पत्नी अधिक कमाती है यह दलील देकर वह अपने दायित्व से नहीं भाग सकता। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने पिता की अपील को खारिज कर दिया।