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Haryana: 76 साल से पहली उड़ान की बाट जोह रहा हरियाणा... यहां विमान नहीं, केवल दावे ही हवा में उड़े
Tue, 16 Apr 2024 03:49 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 16 Apr 2024 03:49 PM IST
सार
आर्थिक तरक्की की राह में जिस तरह से हरियाणा आगे बढ़ा है, उसके मुताबिक एयरपोर्ट अब राज्य की जरूरत बन गया है। राज्य के पुर्नगठन के बाद से ही हरियाणा में नागरिक उड्डयन विभाग की स्थापना हो गई थी। इसके बावजूद इस क्षेत्र में हरियाणा कोई खास कामयाबी हासिल नहीं कर सका। हालांकि भाजपा शासित राज्य सरकार ने हिसार और अंबाला को उड्डयन के क्षेत्र में स्थापित करने के लिए काफी प्रयास किए। सरकार ने अप्रैल 2024 से उड़ानें शुरू करने का दावा किया था, मगर एयरपोर्ट का काम अब भी पेंडिंग है। इन कामों को पूरा होने में कम से कम पांच महीने का वक्त और लग सकता है।
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Flight
- फोटो : iStock
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विस्तार
आजादी के 76 साल बाद भी हरियाणा को अपनी पहली उड़ान का इंतजार है। हरियाणा के किसी शहर से अंतरराष्ट्रीय तो दूर, देश के किसी दूसरे शहर में जाने के लिए भी फ्लाइट शुरू नहीं हो पाई।
पिछले एक दशक में हवाई सफर कराने, हरियाणा के अपने एयरपोर्ट इत्यादि का मुद्दा दावों व भाषणों में खूब गूंजा। कई बार काम पूरा करने की डेडलाइन दी गई। पिछले डेढ़ साल में चार बार एयरपोर्ट से पहली फ्लाइट शुरू करने की तारीख भी तय की गई लेकिन आज तक एक भी विमान हिसार में नहीं उतर पाया जो हरियाणा के सपनों पंख लगा सके। आजादी के इतने सालों बाद भी हरियाणा के लोगों को अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय उड़ानों के लिए चंडीगढ़ या दिल्ली जाना पड़ता है। इससे न सिर्फ उनका समय बर्बाद होता है बल्कि आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
राज्य सरकार के नए नागरिक उड्डयन मंत्री कमल गुप्ता का कहना है कि राज्य सरकार अपने इस ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए काफी गंभीर है। हिसार से उड़ानों की शुरुआत में अभी कुछ समय और लग सकता है। वहीं, विपक्ष का आरोप है कि जो प्रोजेक्ट हरियाणा में आने भी थे, वह भी राज्य से चले गए। जिस एयरपोर्ट के बनाने का दावा किया जा रहा, वह भी खोखला साबित हुआ है। हालांकि पिछले सात दशकों में राज्य में कांग्रेस और भाजपा दोनों ने सत्ता का नेतृत्व किया है। इसलिए लोकसभा चुनाव में दोनों दलों के उम्मीदवारों को जनता के सामने उड़ानें नहीं शुरू होने का कारण स्पष्ट करना होगा। हिसार व अंबाला में लोगों की चुनावी चर्चाओं में इस पर खूब बात भी हो रही है।
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हिसार एयरपोर्ट : काम अधूरा होने कारण लाइसेंस तक नहीं मिल पाया
हिसार एयरपोर्ट में काम तीन चरणों में पूरा होना है। सरकार ने अप्रैल से आठ रूटों पर उड़ानें शुरू करने का दावा किया था। इसके लिए एलायंस एयर के साथ समझौता भी किया। इस समझौते के तहत दिल्ली, चंडीगढ़, जयपुर, अहमदाबाद, जम्मू, कुल्लू, धर्मशाला और देहरादून की फ्लाइट शुरू होनी थी, मगर एयरपोर्ट का काम पूरा नहीं हो सका।
एयरपोर्ट की हवाई पट्टी पर फाइनल लेयर डालने का काम अभी रहता है। ट्रैफिक कंट्रोल टॉवर के निर्माण का काम भी पड़ा है। अभी केवल बेसलाइन का काम चल रहा है। पिछले दिनों केंद्रीय नागरिक उड्डयन विभाग की टीम हिसार एयरपोर्ट का निरीक्षण करने आई थी, जिसमें बचे हुए कार्यों को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए थे। इन कामों के पूरे होने होने के बाद हिसार एयरपोर्ट को लाइसेंस प्रदान किया जाएगा। लाइसेंस की प्रक्रिया के बाद एयरपोर्ट से उड़ानें शुरू हो सकेंगी।
अंबाला एयरपोर्ट : आधा काम ही हो पाया
भारत सरकार की आरसीएस (रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम) उड़ान योजना के तहत अंबाला छावनी में डोमेस्टिक एयरपोर्ट का निर्माण 16.50 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। इसके लिए अंबाला एयरफोर्स स्टेशन से लगी 20 एकड़ भूमि रक्षा मंत्रालय की ओर से सिविल एविएशन विभाग को दी गई है, जिस पर पीडब्ल्यूडी की ओर निर्माण कार्य किया जा रहा है। पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन रितेश अग्रवाल के अनुसार, टर्मिनल का 50 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया गया है। शेष कार्य अगले पांच माह में पूरा हो जाएगा। इसके बाद सिविल एविएशन विभाग इसका परीक्षण करेगी। सरकार का दावा है कि हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले परिचालन शुरू कर दिया जाएगा।
इन परियोजनाओं पर काम भी अधूरा
गुरुग्राम में हेली हब
दिल्ली से सटे गुरुग्राम में हेली हब बनाने की तैयारी है। यह देश का सबसे बड़ा हेली हब होगा। इससे पूरे उत्तर भारत को हेलीकॉप्टर टैक्सी सर्विस, प्राइवेट चार्टर, मेडिकल एंबुलेंस जैसी सुविधाएं देने का दावा किया जा रहा है। हेली हब के निर्माण के लिए पवनहंस लिमिटेड, भारत सरकार और हरियाणा सरकार के मध्य समझौता हो चुका है। हेली हब के लिए हरियाणा के नागरिक उड्डययन विभाग ने 30 एकड़ जमीन लेकर भारत सरकार को सौंप दी है।
आठ जिलों में हेलीपैड
हरियाणा सरकार ने राज्य के आठ शहरों में स्थायी हेलीपैड के निर्माण करने पर विचार कर रही है। इसके लिए राज्य सरकार व्यावहारिकता का अध्ययन करवा रही है। पिछले दिनों बजट के दौरान सीएम ने इसका परियोजना का उल्लेख भी किया था। उनके मुताबिक जींद, झज्जर, कैथल, पलवल, यमुनानगर, रोहतक, कुरुक्षेत्र और सोनीपत में स्थायी हेलीपैड का निर्माण करवाया जाएगा।
तीन जिलों में हवाई पट्टियां
तीन जिलों नूंह, यमुनानगर और रोहतक में नई हवाई पट्टियां भी विकसित की जानी है। सरकार ने दावा किया कि ई-भूमि के माध्यम से भूमि की पहचान की जाएगी और उसकी खरीद की प्रकिया साल 2024-25 में शुरू की जाएगी।
हरियाणा की मौजूदा स्थिति
हरियाणा के हिसार और करनाल में दो विमानन प्रशिक्षण केंद्र हैं। वर्तमान में भिवानी, करनाल, नारनौल और पिंजौर में चार नागरिक हवाई पट्टियां हैं। राज्य में एकमात्र हवाई अड्डा हिसार में स्थित है। दो रक्षा हवाई अड्डे सिरसा और अंबाला में हैं। हरियाणा नागरिक उड्डयन संस्थान के दो उड्डयन केंद्र यानी करनाल और पिंजौर में है। दोनों ही जगह फ्लाइंग ट्रेनिंग दी जाती है।
फ्लाइट से ये होगा फायदा
-फ्लाइट के लिए चंडीगढ़ व दिल्ली नहीं जाना पड़ेगा।
-अंबाला में एयरपोर्ट बनने से पंचकूला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र और करनाल में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।
-पर्यटकों को आसपास के राज्य खासतौर पर पहाड़ी क्षेत्रों में आवागमन आसान होगा।
-हिसार में रक्षा उद्योग को विकसित करने में मदद मिलेगी।
जेवर एयरपोर्ट पहले हरियाणा में ही बनना था। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा इसे लेकर आए थे, मगर भाजपा सरकार ने इसे हरियाणा के बाहर शिफ्ट कर दिया। यदि यह एयरपोर्ट रोहतक में बनता तो आज हरियाणा की स्थिति कुछ और होती। लोगों को रोजगार मिलता और तरक्की के नए रास्ते खुलते। हिसार और अंबाला एयरपोर्ट बनाने के सिर्फ दावे हैं। यह परियोजनाएं सिरे नहीं चढ़ेंगी। भाजपा को सिर्फ पब्लिसिटी करना आता है। - आफताब अहमद, उपनेता विपक्ष व कांग्रेस विधायक
एयरपोर्ट को लेकर तेजी से काम चल रहा है। इतने बड़े प्रोजेक्ट दिनों में पूरे नहीं होते। हर एक काम चरण दर चरण पूरा होता है। हर एक चरण के पूरा होने के बाद उसकी सुरक्षा जांच होती है। हिसार एयरपोर्ट को इंटरनेशनल मानकों के अनुसार तैयार कराया जा रहा है। यह इंडिया का सबसे अधिक जमीन वाला एयरपोर्ट होगा। ऐसे में समय लगना स्वाभाविक है। उम्मीद कर रहे हैं कि चार से पांच महीने में यहां से फ्लाइट शुरू होंगी। - डॉ. कमल गुप्ता, नागरिक उड्डयन मंत्री, हरियाणा
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पिछले एक दशक में हवाई सफर कराने, हरियाणा के अपने एयरपोर्ट इत्यादि का मुद्दा दावों व भाषणों में खूब गूंजा। कई बार काम पूरा करने की डेडलाइन दी गई। पिछले डेढ़ साल में चार बार एयरपोर्ट से पहली फ्लाइट शुरू करने की तारीख भी तय की गई लेकिन आज तक एक भी विमान हिसार में नहीं उतर पाया जो हरियाणा के सपनों पंख लगा सके। आजादी के इतने सालों बाद भी हरियाणा के लोगों को अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय उड़ानों के लिए चंडीगढ़ या दिल्ली जाना पड़ता है। इससे न सिर्फ उनका समय बर्बाद होता है बल्कि आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
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राज्य सरकार के नए नागरिक उड्डयन मंत्री कमल गुप्ता का कहना है कि राज्य सरकार अपने इस ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए काफी गंभीर है। हिसार से उड़ानों की शुरुआत में अभी कुछ समय और लग सकता है। वहीं, विपक्ष का आरोप है कि जो प्रोजेक्ट हरियाणा में आने भी थे, वह भी राज्य से चले गए। जिस एयरपोर्ट के बनाने का दावा किया जा रहा, वह भी खोखला साबित हुआ है। हालांकि पिछले सात दशकों में राज्य में कांग्रेस और भाजपा दोनों ने सत्ता का नेतृत्व किया है। इसलिए लोकसभा चुनाव में दोनों दलों के उम्मीदवारों को जनता के सामने उड़ानें नहीं शुरू होने का कारण स्पष्ट करना होगा। हिसार व अंबाला में लोगों की चुनावी चर्चाओं में इस पर खूब बात भी हो रही है।
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हिसार एयरपोर्ट : काम अधूरा होने कारण लाइसेंस तक नहीं मिल पाया
हिसार एयरपोर्ट में काम तीन चरणों में पूरा होना है। सरकार ने अप्रैल से आठ रूटों पर उड़ानें शुरू करने का दावा किया था। इसके लिए एलायंस एयर के साथ समझौता भी किया। इस समझौते के तहत दिल्ली, चंडीगढ़, जयपुर, अहमदाबाद, जम्मू, कुल्लू, धर्मशाला और देहरादून की फ्लाइट शुरू होनी थी, मगर एयरपोर्ट का काम पूरा नहीं हो सका।
एयरपोर्ट की हवाई पट्टी पर फाइनल लेयर डालने का काम अभी रहता है। ट्रैफिक कंट्रोल टॉवर के निर्माण का काम भी पड़ा है। अभी केवल बेसलाइन का काम चल रहा है। पिछले दिनों केंद्रीय नागरिक उड्डयन विभाग की टीम हिसार एयरपोर्ट का निरीक्षण करने आई थी, जिसमें बचे हुए कार्यों को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए थे। इन कामों के पूरे होने होने के बाद हिसार एयरपोर्ट को लाइसेंस प्रदान किया जाएगा। लाइसेंस की प्रक्रिया के बाद एयरपोर्ट से उड़ानें शुरू हो सकेंगी।
अंबाला एयरपोर्ट : आधा काम ही हो पाया
भारत सरकार की आरसीएस (रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम) उड़ान योजना के तहत अंबाला छावनी में डोमेस्टिक एयरपोर्ट का निर्माण 16.50 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। इसके लिए अंबाला एयरफोर्स स्टेशन से लगी 20 एकड़ भूमि रक्षा मंत्रालय की ओर से सिविल एविएशन विभाग को दी गई है, जिस पर पीडब्ल्यूडी की ओर निर्माण कार्य किया जा रहा है। पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन रितेश अग्रवाल के अनुसार, टर्मिनल का 50 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया गया है। शेष कार्य अगले पांच माह में पूरा हो जाएगा। इसके बाद सिविल एविएशन विभाग इसका परीक्षण करेगी। सरकार का दावा है कि हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले परिचालन शुरू कर दिया जाएगा।
इन परियोजनाओं पर काम भी अधूरा
गुरुग्राम में हेली हब
दिल्ली से सटे गुरुग्राम में हेली हब बनाने की तैयारी है। यह देश का सबसे बड़ा हेली हब होगा। इससे पूरे उत्तर भारत को हेलीकॉप्टर टैक्सी सर्विस, प्राइवेट चार्टर, मेडिकल एंबुलेंस जैसी सुविधाएं देने का दावा किया जा रहा है। हेली हब के निर्माण के लिए पवनहंस लिमिटेड, भारत सरकार और हरियाणा सरकार के मध्य समझौता हो चुका है। हेली हब के लिए हरियाणा के नागरिक उड्डययन विभाग ने 30 एकड़ जमीन लेकर भारत सरकार को सौंप दी है।
आठ जिलों में हेलीपैड
हरियाणा सरकार ने राज्य के आठ शहरों में स्थायी हेलीपैड के निर्माण करने पर विचार कर रही है। इसके लिए राज्य सरकार व्यावहारिकता का अध्ययन करवा रही है। पिछले दिनों बजट के दौरान सीएम ने इसका परियोजना का उल्लेख भी किया था। उनके मुताबिक जींद, झज्जर, कैथल, पलवल, यमुनानगर, रोहतक, कुरुक्षेत्र और सोनीपत में स्थायी हेलीपैड का निर्माण करवाया जाएगा।
तीन जिलों में हवाई पट्टियां
तीन जिलों नूंह, यमुनानगर और रोहतक में नई हवाई पट्टियां भी विकसित की जानी है। सरकार ने दावा किया कि ई-भूमि के माध्यम से भूमि की पहचान की जाएगी और उसकी खरीद की प्रकिया साल 2024-25 में शुरू की जाएगी।
हरियाणा की मौजूदा स्थिति
हरियाणा के हिसार और करनाल में दो विमानन प्रशिक्षण केंद्र हैं। वर्तमान में भिवानी, करनाल, नारनौल और पिंजौर में चार नागरिक हवाई पट्टियां हैं। राज्य में एकमात्र हवाई अड्डा हिसार में स्थित है। दो रक्षा हवाई अड्डे सिरसा और अंबाला में हैं। हरियाणा नागरिक उड्डयन संस्थान के दो उड्डयन केंद्र यानी करनाल और पिंजौर में है। दोनों ही जगह फ्लाइंग ट्रेनिंग दी जाती है।
फ्लाइट से ये होगा फायदा
-फ्लाइट के लिए चंडीगढ़ व दिल्ली नहीं जाना पड़ेगा।
-अंबाला में एयरपोर्ट बनने से पंचकूला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र और करनाल में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।
-पर्यटकों को आसपास के राज्य खासतौर पर पहाड़ी क्षेत्रों में आवागमन आसान होगा।
-हिसार में रक्षा उद्योग को विकसित करने में मदद मिलेगी।
जेवर एयरपोर्ट पहले हरियाणा में ही बनना था। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा इसे लेकर आए थे, मगर भाजपा सरकार ने इसे हरियाणा के बाहर शिफ्ट कर दिया। यदि यह एयरपोर्ट रोहतक में बनता तो आज हरियाणा की स्थिति कुछ और होती। लोगों को रोजगार मिलता और तरक्की के नए रास्ते खुलते। हिसार और अंबाला एयरपोर्ट बनाने के सिर्फ दावे हैं। यह परियोजनाएं सिरे नहीं चढ़ेंगी। भाजपा को सिर्फ पब्लिसिटी करना आता है। - आफताब अहमद, उपनेता विपक्ष व कांग्रेस विधायक
एयरपोर्ट को लेकर तेजी से काम चल रहा है। इतने बड़े प्रोजेक्ट दिनों में पूरे नहीं होते। हर एक काम चरण दर चरण पूरा होता है। हर एक चरण के पूरा होने के बाद उसकी सुरक्षा जांच होती है। हिसार एयरपोर्ट को इंटरनेशनल मानकों के अनुसार तैयार कराया जा रहा है। यह इंडिया का सबसे अधिक जमीन वाला एयरपोर्ट होगा। ऐसे में समय लगना स्वाभाविक है। उम्मीद कर रहे हैं कि चार से पांच महीने में यहां से फ्लाइट शुरू होंगी। - डॉ. कमल गुप्ता, नागरिक उड्डयन मंत्री, हरियाणा