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रोबोटिक्स, डांस और स्पेशल आवाज से किया मनोरंजन
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चंडीगढ़। एक ओर युवाओं जैसी ऊर्जा के साथ डांस से प्रेरणा देते रीना व इंदरजीत सिंह तो दूसरी ओर अपने मोटे होने के बावजूद डांस का चैलेंज स्वीकार करने वाले 14 वर्षीय अक्षत और रोबोटिक्स की दुनिया में अपना जलवा दिखाने वाले डॉ. अमित पांडे। यह सब था टेडेक्स चंडीगढ़ के द फ्यूचर रिइमेजिंड इवेंट में। एक ऐसी टॉक जो न सिर्फ ऊर्जा से भरपूर बल्कि ऑडियंस को चार घंटे तक बांधे रखा। इस टेडेक्स टाक में अपनी स्पेशल अपीयरेंस का तड़का लगाया साराभाई वर्सेज साराभाई के लीड कैरेक्टर राजेश कुमार ने, जिन्होंने अपनी स्पेशल आवाज के साथ दर्शकों का मनोरंजन किया। टेडेक्स चंडीगढ़ के इस इवेंट का आयोजन टैगोर थियेटर में किया गया।
इस मौके पर टेडएक्स चंडीगढ़ के आयोजक प्रतिका मेहता ने कहा कि इस आयोजन के दौरान इतने शानदार आइडिया की शेयरिंग एक बड़ी बात है। इस मौके पर आरएन पराशर ने कहा कि अब जरूरी है कि अपने विचारों को शब्दों, आइडिया और कार्य में परिणीत किया जाए। साराभाई वर्सेज साराभाई के हीरो राजेश कुमार ने कहा कि जब उनको साराभाई का कैरेक्टर दिया गया तो उसके लिए आवाज नहीं मिल पा रही थी। एक दिन वह सुबह के समय फ्रेश होने गए और वहीं से उनको यह नया कैरेक्टर मिला। इस मौके पर जस्सा अहलूवालिया, डेनियल फिजरगेराल्ड भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि फ्यूचर के रोबोट कुछ अलग होंगे। अमित कुमार पांडे एक नई ऊर्जा के साथ आए और उन्होंने कहा कि ह्यूमनोएड रोबोट का भविष्य बेहतरीन है। उन्होंने कहा कि यह रोबोट समाजिक दायित्व निभाएंगे। इस दौरान वक्तओं ने अपने अनुभव शेयर किए।
लिंगभेद ठीक नहीं, सबको मिले समान अधिकार
मैं एक मामले में फंस गया था। एक लाइट प्वाइंट से मुड़ते हुए अचानक एक लड़की की स्कूटी सामने आ गई। उसने मेरे ऊपर तमाम फालतू के आरोप लगा दिए। जब आपने गलती न की हो तो उस समय आपके और आपके परिवार के ऊपर क्या गुजरेगी यह शायद आपको मालूम नहीं। मेरे पिता को हार्ट अटैक पड़ गया। मेरी जॉब चली गई। चार साल बाद मैं इस परेशानी से उबरा। अब मैं ठीक हूं। मुझे ऐसा लगता है कि कोई भी किसी पर बिना बात के आरोप लगाकर चला जाएगा। ऐसे में अब मैं कई मंच पर अपना एक्सपीरिएंस साझा करता हूं और उसके साथ ही मेरा कहना है कि महिला हो या पुरुष दोनों को समान अधिकार होने चाहिए। जेंडर के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।
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-सर्वजीत सिंह बेदी, ग्राफिक डिजाइनर
अनुबंध गौर से पढ़ें वरना हो सकती है दिक्कत
मैं एक वकील हूं। मैंने कई देखा है कि कई जगह जो लिखित में अनुबंध किए जाते हैं उसके बारे में किसी को जानकारी नहीं होती कि इसमें क्या लिखा है। यही बात मुझको बार बार सताती थी। मैंने इसका हल निकाला और जो उपभोक्ता से संबंधित अनुबंध होते थे उनको मैंने सरल भाषा में बदला। मैंने आम आदमी और ग्रामीणों के लिए कांट्रेक्ट की ऑडियो रिकार्डिंग तैयार की। इसके साथ ही लंबे कांट्रेक्ट के लिए मैंने ग्राफिक्स और प्रेजेंटेशन तैयार की। इससे आम आदमी आसानी से कांट्रेक्ट को समझ लेता है। मेरा कहना है कि कोई भी महत्वपूर्ण अनुबंध सभी को पढ़ लेना चाहिए। यदि आप उसको नहीं पढ़ते हैं तो आपको भविष्य में परेशानी हो सकती है।
-अनिरुद्ध रस्तोगी, एडवोकेट
ठान लो तो कुछ भी मुश्किल नहीं
मेरी उम्र बेशक 14 साल है पर मैंने जो कुछ अब तक सीखा उसको मैं आम लोगों के साथ साझा करना चाहता हूं। इसकी शुरुआत वास्तव में मेरे जीवन से ही हुई। मैं थोड़ा मोटा हूं और मुझे डांस का शौक है पर लोग चिढ़ाते थे कि मैं कैसे डांस कर सकता हूं। मैंने डांस सीखा। डांस सीखने से मेरे आत्मविश्वास को बल मिला और अब मेरा मानना है कि दुनिया में कुछ भी ऐसा नहीं है जो कि असंभव हो। मेरा मानना है कि ज्यादा से ज्यादा खुश रहना चाहिए और दूसरों को भी खुशी देनी चाहिए।
-अक्षित सिंह, मुंबई
हेल्दी फूड को प्रमोट करें
मैं एक शेफ हूं। एक शेफ तो खाना बनाते हैं पर मेरा काम जरा अलग है। मैं खाना बनाने के साथ ही उसको आम लोगों को बताता हूूं कि कैसे आसानी से खाने को बनाया जा सकता है। ज्यादा से ज्यादा हेल्दी फूड को मैं प्रचारित कर रहा हूं। वास्तव में छोटे बच्चों में खाने के प्रति रुचि कम हो रही है और इसका ध्यान रखते हुए मैने अपने सोशल मीडिया में ऐसे व्यंजन तैयार किए हैं जिसको बच्चे लालायित होकर न सिर्फ बना सकते हैं बल्कि चाव के साथ खाएंगे भी। मसलन, मैने दो रोटी के बीच सब्जियां भरकर पिज्जा तैयार करवा डाला। इसको बच्चों ने खूब पसंद किया।
-संजोत कीट, शेफ
पर्यावरण विद हूं मैं
मैं 12 वर्ष की हूं और क्लाइमेट एक्टिविस्ट हूं। मुझे इसकी प्रेरणा घर से मिली। मैंने ग्लोबल वार्मिंग को लेकर 2017 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की थी। इसके बाद वर्ष 2019 में यूनाइटेड नेशंस में पंद्रह बच्चों के साथ मिलकर याचिका डाली। मेरा मानना है कि चेंज धीरे धीरे आता है। मैंने एक शुरुआत की है और इसके रिजल्ट आएंगे। मैं बड़ी होकर पर्यावरणविद् बनना चाहती हूं।
-रिधिमा, क्लाइमेट एक्टिविस्ट
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इस मौके पर टेडएक्स चंडीगढ़ के आयोजक प्रतिका मेहता ने कहा कि इस आयोजन के दौरान इतने शानदार आइडिया की शेयरिंग एक बड़ी बात है। इस मौके पर आरएन पराशर ने कहा कि अब जरूरी है कि अपने विचारों को शब्दों, आइडिया और कार्य में परिणीत किया जाए। साराभाई वर्सेज साराभाई के हीरो राजेश कुमार ने कहा कि जब उनको साराभाई का कैरेक्टर दिया गया तो उसके लिए आवाज नहीं मिल पा रही थी। एक दिन वह सुबह के समय फ्रेश होने गए और वहीं से उनको यह नया कैरेक्टर मिला। इस मौके पर जस्सा अहलूवालिया, डेनियल फिजरगेराल्ड भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि फ्यूचर के रोबोट कुछ अलग होंगे। अमित कुमार पांडे एक नई ऊर्जा के साथ आए और उन्होंने कहा कि ह्यूमनोएड रोबोट का भविष्य बेहतरीन है। उन्होंने कहा कि यह रोबोट समाजिक दायित्व निभाएंगे। इस दौरान वक्तओं ने अपने अनुभव शेयर किए।
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लिंगभेद ठीक नहीं, सबको मिले समान अधिकार
मैं एक मामले में फंस गया था। एक लाइट प्वाइंट से मुड़ते हुए अचानक एक लड़की की स्कूटी सामने आ गई। उसने मेरे ऊपर तमाम फालतू के आरोप लगा दिए। जब आपने गलती न की हो तो उस समय आपके और आपके परिवार के ऊपर क्या गुजरेगी यह शायद आपको मालूम नहीं। मेरे पिता को हार्ट अटैक पड़ गया। मेरी जॉब चली गई। चार साल बाद मैं इस परेशानी से उबरा। अब मैं ठीक हूं। मुझे ऐसा लगता है कि कोई भी किसी पर बिना बात के आरोप लगाकर चला जाएगा। ऐसे में अब मैं कई मंच पर अपना एक्सपीरिएंस साझा करता हूं और उसके साथ ही मेरा कहना है कि महिला हो या पुरुष दोनों को समान अधिकार होने चाहिए। जेंडर के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।
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-सर्वजीत सिंह बेदी, ग्राफिक डिजाइनर
अनुबंध गौर से पढ़ें वरना हो सकती है दिक्कत
मैं एक वकील हूं। मैंने कई देखा है कि कई जगह जो लिखित में अनुबंध किए जाते हैं उसके बारे में किसी को जानकारी नहीं होती कि इसमें क्या लिखा है। यही बात मुझको बार बार सताती थी। मैंने इसका हल निकाला और जो उपभोक्ता से संबंधित अनुबंध होते थे उनको मैंने सरल भाषा में बदला। मैंने आम आदमी और ग्रामीणों के लिए कांट्रेक्ट की ऑडियो रिकार्डिंग तैयार की। इसके साथ ही लंबे कांट्रेक्ट के लिए मैंने ग्राफिक्स और प्रेजेंटेशन तैयार की। इससे आम आदमी आसानी से कांट्रेक्ट को समझ लेता है। मेरा कहना है कि कोई भी महत्वपूर्ण अनुबंध सभी को पढ़ लेना चाहिए। यदि आप उसको नहीं पढ़ते हैं तो आपको भविष्य में परेशानी हो सकती है।
-अनिरुद्ध रस्तोगी, एडवोकेट
ठान लो तो कुछ भी मुश्किल नहीं
मेरी उम्र बेशक 14 साल है पर मैंने जो कुछ अब तक सीखा उसको मैं आम लोगों के साथ साझा करना चाहता हूं। इसकी शुरुआत वास्तव में मेरे जीवन से ही हुई। मैं थोड़ा मोटा हूं और मुझे डांस का शौक है पर लोग चिढ़ाते थे कि मैं कैसे डांस कर सकता हूं। मैंने डांस सीखा। डांस सीखने से मेरे आत्मविश्वास को बल मिला और अब मेरा मानना है कि दुनिया में कुछ भी ऐसा नहीं है जो कि असंभव हो। मेरा मानना है कि ज्यादा से ज्यादा खुश रहना चाहिए और दूसरों को भी खुशी देनी चाहिए।
-अक्षित सिंह, मुंबई
हेल्दी फूड को प्रमोट करें
मैं एक शेफ हूं। एक शेफ तो खाना बनाते हैं पर मेरा काम जरा अलग है। मैं खाना बनाने के साथ ही उसको आम लोगों को बताता हूूं कि कैसे आसानी से खाने को बनाया जा सकता है। ज्यादा से ज्यादा हेल्दी फूड को मैं प्रचारित कर रहा हूं। वास्तव में छोटे बच्चों में खाने के प्रति रुचि कम हो रही है और इसका ध्यान रखते हुए मैने अपने सोशल मीडिया में ऐसे व्यंजन तैयार किए हैं जिसको बच्चे लालायित होकर न सिर्फ बना सकते हैं बल्कि चाव के साथ खाएंगे भी। मसलन, मैने दो रोटी के बीच सब्जियां भरकर पिज्जा तैयार करवा डाला। इसको बच्चों ने खूब पसंद किया।
-संजोत कीट, शेफ
पर्यावरण विद हूं मैं
मैं 12 वर्ष की हूं और क्लाइमेट एक्टिविस्ट हूं। मुझे इसकी प्रेरणा घर से मिली। मैंने ग्लोबल वार्मिंग को लेकर 2017 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की थी। इसके बाद वर्ष 2019 में यूनाइटेड नेशंस में पंद्रह बच्चों के साथ मिलकर याचिका डाली। मेरा मानना है कि चेंज धीरे धीरे आता है। मैंने एक शुरुआत की है और इसके रिजल्ट आएंगे। मैं बड़ी होकर पर्यावरणविद् बनना चाहती हूं।
-रिधिमा, क्लाइमेट एक्टिविस्ट