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निजीकरण के खिलाफ कर्मचारियों ने की रैली
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प्रदर्शन करते कर्मचारी।
- फोटो : CHANDIGARH
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चंडीगढ़। सेक्टर-17 के ब्रिज मार्केट में सोमवार को कर्मचारियों ने हड़ताल कर रैली की। यह हड़ताल केंद्रीय ट्रेड यूनियनों व अखिल भारतीय राज्य कर्मचारी फेडरेशन के आह्वान पर की गई। कर्मचारी नेताओं ने केंद्रीय ट्रेड यूनियन की ओर से प्रमाणित 12 सूत्रीय मांगपत्र पर चर्चा की और केंद्र सरकार की कर्मचारी और मजदूर विरोधी नीतियों की आलोचना की।
इस दौरान सार्वजनिक क्षेत्र का निजीकरण रद्द करने, नेशनल मोनेटाइजेशन पाइप लाइन रद्द करने, वर्ष 2004 के बाद भर्ती कर्मचारियों को पुरानी पेंशन बहाल करने, न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि कर कम से कम वेतन 26 हजार रुपये करने, डेलीवेज ओर वर्कचार्ज ठेके पर काम करने वाले सभी प्रकार के कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की मांग की। इसके अलावा पक्का होने तक बराबर काम के लिए बराबर वेतन लागू करने, मनरेगा कर्मचारियों की वेतन में वृद्धि करने, खाली पड़े पदों को भरने की मांग की गई।
रैली में भारतीय जीवन बीमा निगम, प्रशासन और नगर निगम के कर्मचारी, जल प्रबंधन, पीएसआईसी, डाक विभाग, सड़क, बागवानी, जलापूर्ति, बिजली भारतीय बाल कल्याण परिषद तथा अन्य संगठनों के बड़ी संख्या में कर्मचारी पहुंचे। इसकी अध्यक्षता सीटू नेता कुलदीप सिंह, फेडरेशन के प्रधान रघबीर चंद, एलआईसी के राजीव सहगल व अमरीक सिंह ने की। मंच का संचालन सीटू के प्रधान गुरदीप सिंह ने किया। रैली को सीटू पंजाब के महासचिव चंद्रशेखर, फेडरेशन ऑफ यूटी इंप्लाइज एंड वर्कर्स के महासचिव गोपाल दत्त जोशी, पंजाब स्टेट एक्सपोर्ट कारपोरेशन के तारा सिंह, एलआईसी से किरणदीप सिंह, जलापूर्ति से राजेंद्र कटोच सहित अन्य विभागों के कर्मचारी नेताओं ने संबोधित किया।
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बिजली कर्मचारियों पर एस्मा लगाने की निंदा
रैली में एक विशेष प्रस्ताव पास कर चंडीगढ़ में बिजली कर्मचारियों पर एस्मा लगाने की निंदा की गई। कर्मचारियों पर दर्ज मुकदमा वापस लेने के अलावा कारण बताओ नोटिस रद्द करने, निलंबित कर्मचारियों को बहाल करने, निकाले गए ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों को नौकरी पर बहाल करने की मांग की गई।
हड़ताल की वजह से चलीं कम बसें
हड़ताल के कारण आईएसबीटी-17 पर हर रोज की तरह चलने वाली बसों की संख्या में काफी कमी आई। आईएसबीटी-17 के एसएस गुरराज सिंह ने बताया कि हर रोज 700 से लेकर 750 बसों का परिचालन होता है। हड़ताल के कारण हरियाणा रोडवेज की बसें कम चलीं। सीटीयू की बसें लांगरूट और लोकल दोनों रूट पर सामान्य दिनों की तरह परिचालन हुआ है। यमुनानगर रूट पर बसें कम चलीं। उस रूट पर पैसेंजरों को परेशानी हुई। जानकारी के अनुसार दिल्ली रूट पर हर रोज हरियाणा रोडवेज की 101 बसें चलती है, लेकिन हड़ताल के कारण 60 बसें ही चलीं।
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इस दौरान सार्वजनिक क्षेत्र का निजीकरण रद्द करने, नेशनल मोनेटाइजेशन पाइप लाइन रद्द करने, वर्ष 2004 के बाद भर्ती कर्मचारियों को पुरानी पेंशन बहाल करने, न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि कर कम से कम वेतन 26 हजार रुपये करने, डेलीवेज ओर वर्कचार्ज ठेके पर काम करने वाले सभी प्रकार के कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की मांग की। इसके अलावा पक्का होने तक बराबर काम के लिए बराबर वेतन लागू करने, मनरेगा कर्मचारियों की वेतन में वृद्धि करने, खाली पड़े पदों को भरने की मांग की गई।
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रैली में भारतीय जीवन बीमा निगम, प्रशासन और नगर निगम के कर्मचारी, जल प्रबंधन, पीएसआईसी, डाक विभाग, सड़क, बागवानी, जलापूर्ति, बिजली भारतीय बाल कल्याण परिषद तथा अन्य संगठनों के बड़ी संख्या में कर्मचारी पहुंचे। इसकी अध्यक्षता सीटू नेता कुलदीप सिंह, फेडरेशन के प्रधान रघबीर चंद, एलआईसी के राजीव सहगल व अमरीक सिंह ने की। मंच का संचालन सीटू के प्रधान गुरदीप सिंह ने किया। रैली को सीटू पंजाब के महासचिव चंद्रशेखर, फेडरेशन ऑफ यूटी इंप्लाइज एंड वर्कर्स के महासचिव गोपाल दत्त जोशी, पंजाब स्टेट एक्सपोर्ट कारपोरेशन के तारा सिंह, एलआईसी से किरणदीप सिंह, जलापूर्ति से राजेंद्र कटोच सहित अन्य विभागों के कर्मचारी नेताओं ने संबोधित किया।
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बिजली कर्मचारियों पर एस्मा लगाने की निंदा
रैली में एक विशेष प्रस्ताव पास कर चंडीगढ़ में बिजली कर्मचारियों पर एस्मा लगाने की निंदा की गई। कर्मचारियों पर दर्ज मुकदमा वापस लेने के अलावा कारण बताओ नोटिस रद्द करने, निलंबित कर्मचारियों को बहाल करने, निकाले गए ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों को नौकरी पर बहाल करने की मांग की गई।
हड़ताल की वजह से चलीं कम बसें
हड़ताल के कारण आईएसबीटी-17 पर हर रोज की तरह चलने वाली बसों की संख्या में काफी कमी आई। आईएसबीटी-17 के एसएस गुरराज सिंह ने बताया कि हर रोज 700 से लेकर 750 बसों का परिचालन होता है। हड़ताल के कारण हरियाणा रोडवेज की बसें कम चलीं। सीटीयू की बसें लांगरूट और लोकल दोनों रूट पर सामान्य दिनों की तरह परिचालन हुआ है। यमुनानगर रूट पर बसें कम चलीं। उस रूट पर पैसेंजरों को परेशानी हुई। जानकारी के अनुसार दिल्ली रूट पर हर रोज हरियाणा रोडवेज की 101 बसें चलती है, लेकिन हड़ताल के कारण 60 बसें ही चलीं।