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आपातकाल: जब देश बन गया था खुली जेल, सब्जियों की टोकरियों में भेजे संदेश; यातनाओं की याद से आज भी कांपती है रूह
Wed, 25 Jun 2025 08:24 AM IST
निवेदिता वर्मा
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 25 Jun 2025 08:24 AM IST
सार
आपातकाल के दाैरान चंडीगढ़ के 21 नेताओं को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से 18 पर मीसा लगा। बुड़ैल जेल में दिए गए बिजली के करंट, सब्जियों की टोकरियों में भेजे गए संदेश और भेष बदलकर चलाया गया आंदोलन। इतना ही नहीं उस समय ऐसी यातनाएं दी गईं जिनकी याद आते ही आज भी रूह कांप उठती है।
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देशराज टंडन और पुरुषोतम महाजन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
25 जून 1975, भारत के लोकतंत्र का सबसे काला दिन, जब आपातकाल लागू हुआ और देश एक खुली जेल में बदल गया। आज इस तानाशाही फैसले को 50 साल पूरे हो रहे हैं, लेकिन चंडीगढ़ में उस दौर की यादें आज भी जिंदा हैं।
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आपातकाल की 50वीं बरसी पर देसराज टंडन, पुरुषोत्तम महाजन और सत्यपाल जैन ने उन भयावह दिनों की दास्तां साझा की।