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Chandigarh News: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बुजुर्ग दंपती से 38 लाख की ठगी

Fri, 16 Jan 2026 02:43 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 16 Jan 2026 02:43 AM IST
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Elderly couple duped of Rs 38 lakh in the name of digital arrest
संवाद न्यूज एजेंसी
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चंडीगढ़। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर बुजुर्ग दंपती से 38 लाख रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने एक महिला समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि ठगी का पूरा नेटवर्क चेन्नई से संचालित हो रहा था और गिरोह का मुख्य सरगना एक चीनी नागरिक के संपर्क में था। ठगी की रकम को क्रिप्टो करेंसी में बदलकर आगे ट्रांसफर करने की तैयारी थी।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में फिरोजपुर की वीना रानी व सतनाम सिंह, फाजिल्का के सुखदीप सिंह उर्फ सुख व धर्मेंद्र सिंह उर्फ लड्डी, चंडीगढ़ सेक्टर-45 का मुकेश उर्फ प्रिंस व चेन्नई का फजल उर्फ राकी शामिल हैं। फजल को इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। पुलिस ने चेन्नई में दबिश देकर उसे उसके किराए के कमरे से गिरफ्तार किया। वह टेलीग्राम के जरिए विदेशी चीनी नागरिक से संपर्क में था और वहीं से उसे निर्देश मिलते थे।
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केजीएफ फिल्म से प्रभावित होकर बना राकी
साइबर क्राइम थाना पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामले का खुलासा किया। इंस्पेक्टर इरम रिजवी ने बताया कि मुख्य आरोपी फजल, केजीएफ फिल्म से इतना प्रभावित था कि उसने खुद को राकी कहना शुरू कर दिया और उसी नाम से साइबर ठगी का सरगना बन गया।
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डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर वसूले 38 लाख
मामले में रायपुर खुर्द निवासी पीड़ित कृष्ण चंद ने शिकायत दी थी कि 7 जनवरी को उनके मोबाइल पर एक कॉल आई। कॉलर ने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताया और कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल अवैध लेनदेन में हुआ है। इसके बाद वीडियो कॉल के जरिए जांच का डर दिखाकर उन्हें डिजिटल अरेस्ट में रखा गया। मानसिक दबाव में आकर पीड़ित ने अलग-अलग खातों में 38 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
खातों से मिला सुराग, रकम को किया गया होल्ड
शिकायत मिलते ही पुलिस ने बैंकों से संपर्क कर रकम होल्ड कराई। जांच में पता चला कि सेक्टर-8 स्थित एक बैंक खाते से 4.50 लाख रुपये निकाले गए थे, जो वीना रानी के नाम पर था। लोकेशन ट्रेस कर उसे सेक्टर-32 से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने गिरोह के अन्य सदस्यों के नाम उजागर किए जिसके बाद बुड़ैल और सेक्टर-45 में छापा मारकर अन्य आरोपियों को पकड़ा गया।

क्रिप्टो करेंसी में बदली जाती थी ठगी की रकम
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि ठगी की रकम पहले बैंक खातों में जमा कराई जाती थी, फिर नकद निकालकर यूएसडीटी (क्रिप्टो करेंसी) में कन्वर्ट कर दी जाती थी। इस पूरे नेटवर्क को चेन्नई से फजल नियंत्रित करता था। पुलिस ने आरोपियों से मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंक दस्तावेज, नकदी, एटीएम कार्ड और चेकबुक बरामद कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजे हैं। पुलिस का कहना है कि जांच में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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