टीके की दोनों डोज जरूरी: 145 स्वयंसेवकों पर हुआ ट्रायल, नौ ही आए संक्रमण की चपेट में, नहीं दिखे गंभीर लक्षण
पीजीआई में हुए ट्रायल की प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर व कम्युनिटी मेडिसिन एंड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की डॉ. मधु गुप्ता ने कहा कि हालांकि संक्रमण से बचाव के लिए केवल टीका लगवाना ही जरूरी नहीं है। टीका लगवाने के बाद भी मास्क, सैनिटाइजेशन व सामाजिक दूरी के मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित होना चाहिए, तभी यह टीका अपना असली काम कर पाएगा।
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चंडीगढ़ पीजीआई में हुए वैक्सीन के ट्रायल रिपोर्ट से साबित हो चुका है कि कोरोना संक्रमण से बचाव में टीके का अहम रोल है। पीजीआई में सीरम इंस्टीट्यूट की वैक्सीन कोविशील्ड के हुए मानव परीक्षण में शामिल 145 स्वयंसेवक में महज नौ ही टीका लगवाने के बाद संक्रमण की चपेट में आए हैं। वहीं संक्रमित होने के बावजूद उनमें इसका कोई गंभीर लक्षण सामने नहीं आया। इससे यह साबित होता है कि टीके की दोनों खुराक लगवाने के बाद शरीर पर कोरोना संक्रमण का असर न के बराबर होता है।
पीजीआई में हुए ट्रायल की प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर व कम्युनिटी मेडिसिन एंड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की डॉ. मधु गुप्ता का कहना है कि ट्रायल के परिणाम के आधार पर एक बात साफ हो चुकी है कि संक्रमण से बचाव में टीके का रोल बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसलिए जितनी जल्दी हो सके लोग टीका लगवाकर खुद को संक्रमण से बचाव के लिए सुरक्षित कर लें।
उन्होंने बताया कि ट्रायल के दौरान टीका लगाने के बावजूद स्वयंसेवकों से संक्रमण से बचाव के सभी मानकों का कड़ाई से पालन करवाया गया। इसलिए आम जनता भी इस बात का पूरा ख्याल रखें कि संक्रमण से बचाव के लिए केवल टीका लगवाना ही जरूरी नहीं है। टीका लगवाने के बाद भी मास्क, सैनिटाइजेशन व सामाजिक दूरी के मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित होना चाहिए, तभी यह टीका अपना असली काम कर पाएगा।
ऐसे शुरू हुआ ट्रायल और आया सकारात्मक परिणाम
पीजीआई में वैक्सीन के मानव परीक्षण के लिए चुने गए 145 स्वयंसेवकों को 25 सितंबर 2020 को पहली व 24 अक्तूबर को दूसरी खुराक दी जा चुकी है। दोनों खुराक लेने के बाद उसका 6 महीने का फॉलोअप भी पूरा हो चुका है। डॉ. मधु गुप्ता ने बताया कि फॉलोअप के बाद यह निष्कर्ष सामने आया है कि वैक्सीन कोरोना से बचाव में बेहद कारगर है, क्योंकि ट्रायल में शामिल 145 स्वयंसेवकों में से महज 9 ही अब तक कोरोना संक्रमित हुए हैं। उनमें से भी किसी में कोरोना का भयावह रूप सामने नहीं आया। सभी एसिंप्टोमेटिक मरीजों की श्रेणी में शामिल है जिससे यह भी पुष्ट हो रहा है कि वैक्सीन की शरीर को कोरोना संक्रमण की गंभीरता से बचाने में कारगर भूमिका है।
ट्रायल में 18 से 80 साल तक के स्वयंसेवक शामिल
डॉ. मधु ने बताया कि पीजीआई में हुए ट्रायल में सबसे पहले 400 स्वयंसेवकों का पंजीकरण किया गया था, जिसमें से 200 की स्क्रीनिंग की गई। इसके बाद 145 स्वयंसेवकों को वैक्सीन की पहली व दूसरी खुराक लगाई गई। 145 स्वयंसेवक में 18 साल से 80 साल तक के लोग शामिल थे। डॉ. मधु का कहना है कि ट्रायल में शामिल सभी स्वयंसेवकों पर वैक्सीन का सकारात्मक परिणाम सामने आया है।
देशभर के 1400 स्वयंसेवक ट्रायल में हुए शामिल
उन्होंने बताया कि पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट की वैक्सीन का पीजीआई समेत देश के 17 सेंटरों में 1400 स्वयंसेवक पर ट्रायल किया गया। इन सेंटरों में दिल्ली एम्स, पुणे एबीजे मेडिकल कॉलेज, पटना में राजेंद्र मैमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आरएमआरआईएमएस), जोधपुर में एम्स, गोरखपुर में नेहरू अस्पताल, विशाखापत्तनम में आंध्र मेडिकल कॉलेज और मैसूर में जेएसएस एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च भी शामिल हैं। इन सभी सेंटरों से सकारात्मक रिपोर्ट ही सामने आ रही है।
ट्रायल में इनकी भूमिका भी रही अहम
वैक्सीन के ट्रायल में पीजीआई कम्युनिटी मेडिसिन के साथ वायरोलॉजी, फार्मोकोलॉजी, इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट के विशेषज्ञों को शामिल किया गया था। इन विशेषज्ञों के सहयोग से ही पीजीआई में ट्रायल की प्रक्रिया पूरी हुई।