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Chandigarh News: डीएमसी में सीएमई के दौरान पेरिटोनियल डायलिसिस पर रहा माहिरों का विशेष फोकस
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लुधियाना। दयानंद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (डीएमसी एंड एच) के नेफ्रोलॉजी विभाग की ओर से पीडी कॉन्क्लेव–माहिरों से सीखें विषय पर एक दिवसीय सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस शैक्षणिक कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य पेरिटोनियल डायलिसिस (पीडी) को लेकर चिकित्सकों में जागरूकता बढ़ाना, नवीनतम जानकारी साझा करना और इसके व्यावहारिक पक्ष को सशक्त करना रहा।
कार्यक्रम का आयोजन नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. विकास मक्कर के मार्गदर्शन में किया गया। आयोजन में डॉ. सिमरन कौर (एसोसिएट प्रोफेसर), डॉ. तनिश धीर (असिस्टेंट प्रोफेसर), वरिष्ठ रेजिडेंट्स तथा नर्सिंग स्टाफ का सक्रिय सहयोग रहा।
सीएमई का उद्घाटन डीएमसी एंड एच मैनेजिंग सोसाइटी के कोषाध्यक्ष मुकेश वर्मा ने किया। इस अवसर पर प्रिंसिपल डॉ. जीएस वांडर, डीन अकादमिक्स डॉ. संदीप कौशल और पीएमसी सदस्य डॉ. प्रीतपाल सिंह भी उपस्थित रहे। सोसाइटी के सचिव बिपिन गुप्ता ने नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के शैक्षणिक कार्यक्रम चिकित्सकों को क्रॉनिक किडनी डिजीज के आधुनिक और प्रभावी उपचार विकल्पों से अपडेट रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। डॉ. जीएस वांडर ने कहा कि यह सीएमई अकादमिक दृष्टि से बेहद समृद्ध रही, जिससे युवा चिकित्सकों और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिला। उन्होंने बदलते चिकित्सा परिदृश्य में निरंतर शिक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया।
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बेहतर क्लिनिकल परिणाम
कॉन्क्लेव के दौरान देश के विभिन्न अस्पतालों से आए विशेषज्ञ नेफ्रोलॉजिस्टों ने पेरिटोनियल डायलिसिस के लाभ, बेहतर क्लिनिकल परिणाम, रोगी चयन और भारतीय परिस्थितियों में आने वाली चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही पीडी को अधिक सुलभ और किफायती बनाने की रणनीतियों पर भी मंथन किया गया। कार्यक्रम का समापन संवादात्मक पैनल चर्चा के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों के सवालों के समाधान किए गए। सीएमई के लिए पीएमसी द्वारा चार क्रेडिट घंटे निर्धारित किए गए।
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कार्यक्रम का आयोजन नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. विकास मक्कर के मार्गदर्शन में किया गया। आयोजन में डॉ. सिमरन कौर (एसोसिएट प्रोफेसर), डॉ. तनिश धीर (असिस्टेंट प्रोफेसर), वरिष्ठ रेजिडेंट्स तथा नर्सिंग स्टाफ का सक्रिय सहयोग रहा।
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सीएमई का उद्घाटन डीएमसी एंड एच मैनेजिंग सोसाइटी के कोषाध्यक्ष मुकेश वर्मा ने किया। इस अवसर पर प्रिंसिपल डॉ. जीएस वांडर, डीन अकादमिक्स डॉ. संदीप कौशल और पीएमसी सदस्य डॉ. प्रीतपाल सिंह भी उपस्थित रहे। सोसाइटी के सचिव बिपिन गुप्ता ने नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के शैक्षणिक कार्यक्रम चिकित्सकों को क्रॉनिक किडनी डिजीज के आधुनिक और प्रभावी उपचार विकल्पों से अपडेट रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। डॉ. जीएस वांडर ने कहा कि यह सीएमई अकादमिक दृष्टि से बेहद समृद्ध रही, जिससे युवा चिकित्सकों और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिला। उन्होंने बदलते चिकित्सा परिदृश्य में निरंतर शिक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया।
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बेहतर क्लिनिकल परिणाम
कॉन्क्लेव के दौरान देश के विभिन्न अस्पतालों से आए विशेषज्ञ नेफ्रोलॉजिस्टों ने पेरिटोनियल डायलिसिस के लाभ, बेहतर क्लिनिकल परिणाम, रोगी चयन और भारतीय परिस्थितियों में आने वाली चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही पीडी को अधिक सुलभ और किफायती बनाने की रणनीतियों पर भी मंथन किया गया। कार्यक्रम का समापन संवादात्मक पैनल चर्चा के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों के सवालों के समाधान किए गए। सीएमई के लिए पीएमसी द्वारा चार क्रेडिट घंटे निर्धारित किए गए।