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विदेश जाने से पहले हो जाएं सावधान, आप की भी जेब हो सकती है खाली...पढ़ें पूरी खबर

Sat, 08 Sep 2018 01:03 PM IST
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Updated Sat, 08 Sep 2018 01:03 PM IST
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Due to dollar effect food to air tickets are expensive
डॉलर - फोटो : डेमो
विदेश जाने से पहले आपकों सावधान करने वाली खबर है। अब विदेश जाने के लिए आपकी जेब भी खाली हो सकती है। इसका असर खान-पान में भी पड़ने लगा है। रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर है, ऐसे में विदेशों में पढ़ाई करने जाने वाले स्टूडेंट्स को सबसे ज्यादा मार पड़ी है। डॉलर महंगा होने से इनका खर्च बढ़ गया है। हर साल करीब साढ़े पांच लाख छात्र पढ़ाई के लिए विदेश जाते हैं।
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इनमें से 50 फीसदी अमेरिका, 25 फीसदी कनाडा, 15 फीसदी यूके और 10 फीसदी ऑस्ट्रेलिया को चुनते हैं। रुपये में आई गिरावट का असर लगभग इन सारे देश की करेंसी पर देखने को मिल रहा हैं। हालात यह है कि कनाडा व ऑस्ट्रेलिया की वन वे एयर टिकट 1 लाख 45 हजार रुपये में बिक रही है। जबकि आम तौर पर इसका दाम 40 हजार रुपये है। 
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बता दें कि करीब एक वर्ष में रुपये ने यूएस डॉलर में 11 फीसदी, पाउंड में 9 फीसदी, कनेडियन डॉलर में 10 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की है। ऐसे में करेंसी में बदलाव और सामान्य महंगाई को मिलाकर देखें तो ट्यूशन फीस, रेंटल और बोर्डिंग पर सालाना 3 से 5 लाख का खर्च बढ़ गया है। मसलन जहां एक वर्ष पहले अमेरिका में अंडरग्रेजुएट कोर्स के लिए फीस, रेंटल और बोर्ड का कुल खर्च सालाना 20 से 40 लाख रुपये तक जाता था, वह बढ़कर  अब 25 से 45 लाख रुपये हो गया है।
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इसी तरह कनाडा, यूके और ऑस्ट्रेलिया में भी सालाना 5 लाख तक खर्च बढ़ गया है। अब ऑस्ट्रेलिया में अक्तूबर में सेमेस्टर शुरू होने जा रहा है, जिसके लिए विद्यार्थी पूरी तैयारी कर रहे हैं, लेकिन डॉलर ने उनकी कमर तोड़ दी है। ऑस्ट्रेलिया में ट्यूशन फीस से लेकर घर का किराया व बाकी खर्च महंगे हो गए हैं। कनाडा में जनवरी का दाखिला फुल हो चुका है और मई 2019 की तैयारियां चल रही हैं।  

एक साल की 12 लाख रुपये की फीस 

Due to dollar effect food to air tickets are expensive
सांकेतिक चित्र - फोटो : Getty images
हाल ही में 1.45 लाख की टिकट लेकर गुरकीरत सिंह कनाडा स्टडी के लिए गया है और उसकी टिकट भी वन वे थी। गुरकीरत का कहना है कि उसके पास कोई अन्य ऑप्शन ही नहीं थी। सिर्फ कनाडा में 1.5 लाख छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा लेने जा चुके हैं। हर विद्यार्थी अपनी 1 साल की 12 लाख रुपये की फीस भरता है। 2 लाख रुपये अपने खर्च के साथ लेकर जाता है।

इसके बाद अगले साल पहले सेमेस्टर के 6 लाख फिर अपने माता-पिता से मंगवाता है। उसके बाद वह स्वयं काम करके अपने अगले डेढ़ साल की फीस और अन्य खर्च निकालने लगता है। ऐसे में हर विद्यार्थी के साथ 20 लाख रुपये भारतीय करेंसी कनाडा जाती है और अब तक 30 हजार करोड़ रुपये भारतीय करेंसी कनाडा जा चुकी है। 

अभिभावकों को लेना पड़ रहा कर्ज
एजुकेशन कंसलटेंट त्रिवेदी ओवरसीज के एमडी सुकांत का कहना है कि कई अभिभावकों को बैंक से कर्ज लेना पड़ रहा है। कनाडा ने तो एक मुश्त एक साल की फीस का नियम लागू कर दिया है, यानी जिस विद्यार्थी को दाखिला मई 2019 में मिलता है, उससे फीस मई 2020 तक की जमा कराई जाएगी। कनाडा का डॉलर जहां पहले 49 रुपये था, वह अब 55 क्रास कर गया है। इससे फीस में वृद्धि हो गई है।

क्या कहती हैं यात्री
सवा लाख रुपये में कनाडा की एयर टिकट लेकर 6 सितंबर को जाने वाली ऐश्वर्या उप्पल का कहना है कि पहले तो सीजन के कारण एयरलाइंस ने टिकट महंगी कर दी, ऊपर से डॉलर ने अतिरिक्त बोझ डाल दिया। ऐसे में उसे वन वे की टिकट ही सवा लाख रुपये में मिली है।

एजेंसी का कहना है 
एयर कारपोरेट के एमडी रमन कुमार का कहना है कि टिकटों का सारा लेनदेन अमेरिकन डॉलर में होता है। चूंकि डालर के रेट बढ़ गए हैं, इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एयर टिकटें महंगी हुई हैं। फिर इनदिनों विदेशों में पढ़ने वाले बच्चों का सेशन शुरू होता है। इस कारण भी एयरलाइन की टिकटें अधिक महंगी हो जाती हैं।
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