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नेहा शौरी हत्याकांड: जांच से निराश परिवार, पिता बोले- सरकार और प्रशासन तथ्यों को तोड़-मरोड़ रहे
Wed, 03 Apr 2019 09:48 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली(पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली(पंजाब)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 03 Apr 2019 09:48 AM IST
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डॉ. नेहा शौरी
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ड्रग इंस्पेक्टर डॉ. नेहा शौरी हत्याकांड की अब तक की जांच से परिवार निराश है। डॉ. नेहा के पिता कैप्टन केके शौरी ने जांच पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाए हैं। वे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए पीएमओ के संपर्क में हैं। उन्होंने मामले में हाईपावर कमेटी और सीबीआई की पैरलल जांच की मांग की है। कैप्टन शौरी का आरोप है कि जांच करते हुए तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है। वह पीएमओ से संपर्क बनाए हुए हैं।
सेना के पूर्व अधिकारी व कैप्टन केके शौरी प्रधानमंत्री से मिलकर पंजाब सरकार की उस लापरवाही का मुद्दा उठाना चाहते हैं, जिसके चलते नेहा की हत्या हुई है। उन्होंने बताया कि इसमें सेना के कई पूर्व अधिकारी उनका सहयोग कर रहे हैं। प्रधानमंत्री की चुनावी व्यस्तता के कारण फिलहाल उन्हें समय नहीं मिल सका है। लेकिन मामले में लापरवाही कहां हुई यह तभी सामने आ सकता है, जब हाईपावर कमेटी और सीबीआई समानांतर जांच करें।
डॉ. नेहा शौरी को दफ्तर में घुसकर बलविंदर ने गोली मार दी थी। बलविंदर ने आनन-फानन में आर्म्स लाइसेंस हासिल किया और हथियार खरीदने के बाद उसकी एंट्री भी नहीं करवाई। पूरी प्रक्रिया में प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कैप्टन शौरी का कहना है कि सरकार व प्रशासन खुद को बचाने के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़ रहे हैं। एक ईमानदार अधिकारी की हत्या की जांच को पुलिस जबरन पारिवारिक संबंधों पर टिकाने का प्रयास कर रही है, इससे पूरा परिवार आहत है।
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सेना के पूर्व अधिकारी व कैप्टन केके शौरी प्रधानमंत्री से मिलकर पंजाब सरकार की उस लापरवाही का मुद्दा उठाना चाहते हैं, जिसके चलते नेहा की हत्या हुई है। उन्होंने बताया कि इसमें सेना के कई पूर्व अधिकारी उनका सहयोग कर रहे हैं। प्रधानमंत्री की चुनावी व्यस्तता के कारण फिलहाल उन्हें समय नहीं मिल सका है। लेकिन मामले में लापरवाही कहां हुई यह तभी सामने आ सकता है, जब हाईपावर कमेटी और सीबीआई समानांतर जांच करें।
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डॉ. नेहा शौरी को दफ्तर में घुसकर बलविंदर ने गोली मार दी थी। बलविंदर ने आनन-फानन में आर्म्स लाइसेंस हासिल किया और हथियार खरीदने के बाद उसकी एंट्री भी नहीं करवाई। पूरी प्रक्रिया में प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कैप्टन शौरी का कहना है कि सरकार व प्रशासन खुद को बचाने के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़ रहे हैं। एक ईमानदार अधिकारी की हत्या की जांच को पुलिस जबरन पारिवारिक संबंधों पर टिकाने का प्रयास कर रही है, इससे पूरा परिवार आहत है।
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बलविंदर की केमिस्ट शॉप पर नशीली दवाओं की बिक्री की रहती थी चर्चा
डॉ. नेहा शौरी को गोली मारने वाला बलविंदर काफी रिजर्व नेचर का व्यक्ति था। यह कहना है बलविंदर को जानने वालों का। उसके साथ काम कर चुके कुछ लोगों का तो यह भी कहना है कि अपनी रिजर्व नेचर के चलते उसे नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा था। मोरिंडा के लोगों का कहना है कि दस साल पहले उसके सिमरन मेडिकल हॉल नामक स्टोर पर नशीली दवाओं की बिक्री की चर्चा रहती थी।
नशीली व प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री के चलते जोनल लाइसेंसिंग अथॉरिटी डॉ. नेहा शौरी ने वर्ष 2009 में उसकी केमिस्ट शॉप का लाइसेंस रद्द कर दिया था। बलविंदर के एक पारिवारिक मित्र ने बताया कि उसके मेडिकल स्टोर पर आसपास के गांवों के कई युवा आते थे, लेकिन बलविंदर से किसी ने कभी पूछताछ नहीं की।
नाम न छापने की शर्त पर एक व्यक्ति ने बताया कि वह बलविंदर सिंह को पिछले तीन साल से जानता था, वह किसी से घुल मिल नहीं पाता था। कुराली के चौधरी अस्पताल में काम करने वाले एक कर्मचारी ने बताया कि बलविंदर यहां काम करता था, लेकिन वह कभी किसी से बातचीत नहीं करता था। इसी अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ ने बताया कि बलविंदर के रिजर्व नेचर के कारण उसे नौकरी से भी निकाल दिया गया था।
वहीं, चौधरी अस्पताल के मालिक डॉ. राजिंदर सिंह का कहना है कि बलविंदर को अंडर परफॉर्मेंस के चलते हटाया गया था। बलविंदर सिंह की बीएएमएस की डिग्री की वैधता को लेकर उठ रहे सवाल पर डॉ. राजिंदर सिंह का कहना था कि उसकी डिग्री पंजाब आयुर्वेद विभाग के पास रजिस्टर्ड थी।
नशीली व प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री के चलते जोनल लाइसेंसिंग अथॉरिटी डॉ. नेहा शौरी ने वर्ष 2009 में उसकी केमिस्ट शॉप का लाइसेंस रद्द कर दिया था। बलविंदर के एक पारिवारिक मित्र ने बताया कि उसके मेडिकल स्टोर पर आसपास के गांवों के कई युवा आते थे, लेकिन बलविंदर से किसी ने कभी पूछताछ नहीं की।
नाम न छापने की शर्त पर एक व्यक्ति ने बताया कि वह बलविंदर सिंह को पिछले तीन साल से जानता था, वह किसी से घुल मिल नहीं पाता था। कुराली के चौधरी अस्पताल में काम करने वाले एक कर्मचारी ने बताया कि बलविंदर यहां काम करता था, लेकिन वह कभी किसी से बातचीत नहीं करता था। इसी अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ ने बताया कि बलविंदर के रिजर्व नेचर के कारण उसे नौकरी से भी निकाल दिया गया था।
वहीं, चौधरी अस्पताल के मालिक डॉ. राजिंदर सिंह का कहना है कि बलविंदर को अंडर परफॉर्मेंस के चलते हटाया गया था। बलविंदर सिंह की बीएएमएस की डिग्री की वैधता को लेकर उठ रहे सवाल पर डॉ. राजिंदर सिंह का कहना था कि उसकी डिग्री पंजाब आयुर्वेद विभाग के पास रजिस्टर्ड थी।