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डॉ. स्वप्ना 48 की उम्र में 45 देश की सुन्दरियों को पछाड़ बनीं विजेता

Thu, 07 Oct 2021 12:45 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 07 Oct 2021 12:45 AM IST
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Dr. Swapna became the winner at the age of 48, beating the beauties of 45 country
सेक्टर- 17 के ताज होटल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इंटरनेशनल ब्यूटी ख़िताब जितने के बाद डॉ. स्वप्?
चंडीगढ़। 48 साल की उम्र में चेहरे पर 18 साल वाली चमक लिए अपनी हाजिर-जवाबी से लोगों को आकर्षित करने वाली ओडिशा की डॉ. स्वप्ना मिश्रा मिसेज क्लासिक इंटरनेशनल-2021 का खिताब जीता है। मौजूदा समय में वह मोहाली के एक निजी अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत हैं।
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उनका कहना है कि यह खिताब पाना किसी सपने से कम नहीं है। 20 साल से बतौर डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रही स्वप्ना ने अपने इस सपने को मेहनत, लगन और सूझबूझ से हकीकत में बदलकर विश्व में देश का मान बढ़ाया है। उन्होंने बुधवार को अपनी इस जीत के सफर को साझा किया।
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उन्होंने बताया कि 28 सितंबर से 2 अक्तूबर तक एस्टोनिया तेलिन में आयोजित मिसेज क्लासिक यूनिवर्स ब्यूटी पेजेंट में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया। इसमें उन्होंने 45 देश की सुन्दरियों से आगे निकलकर ताज जीता। यह खिताब जीतने वाली वह पहली भारतीय महिला हैं। डॉ. स्वप्ना आगे अपने डॉक्टरी पेशे के साथ ही घरेलू हिंसा की रोकथाम व योग के प्रति जागरूकता पर काम करना चाहती हैं।
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योग की विविधि मुद्राओं का किया समावेश
रोबोटिक व लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. स्वप्ना ने प्रतियोगिता में अपने योगिनी स्वरूप से सबको बेहद आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि विभिन्न वर्ग में हुई प्रतियोगिताओं में भारतीय परिधान की प्रस्तुति के लिए योगिनी के स्वरूप को दर्शाने का निर्णय लिया। इसने इस सफलता में अहम भूमिका निभाई। योगिनी स्वरूप में माथे पर छाप-तिलक लगाए, गेरुआ वस्त्र धारण किए, गले में रूद्र की माला पहने योग की विभिन्न अवस्थाओं को दर्शाया। वहीं नृत्य प्रतियोगिता में कोविड पर आधारित प्रस्तुति देकर सबसे ज्यादा अंक प्राप्त किए।

भारतीय नारी सब पर भारी
डॉ. स्वप्ना ने प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल के बारे में बताया कि वे अजनबियों के रूप में हर क्षण आस-पास मौजूद रहते थे। प्रतिभागियों के बोलने, हंसने, चलने, उठने-बैठने, खाने जैसी प्रत्येक हकरत पर उनकी पैनी नजर होती थी। उनके अभिवादन का अंदाज, साड़ी का पहनावा और भारतीय संस्कृति से जुड़ी अभिव्यक्ति ने निर्णायक मंडल के साथ ही प्रतिभागियों पर भी गहरी छाप छोड़ी।
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