पद्म भूषण न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के पितामह का निधन, दुनिया ने माना था काबिलियत का लोहा
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पीजीआई के न्यूरोलाजी डिपार्टमेंट के पितामह व पद्म भूषण प्रो. जगजीत सिंह चोपड़ा नहीं रहे। वे ब्रेन स्ट्रोक से पीड़ित थे और पिछले एक महीने से पीजीआई के आईसीयू में दाखिल थे। शुक्रवार शाम करीब साढ़े सात बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनकी एक बेटी और एक बेटा है। प्रो. चोपड़ा का नाम न सिर्फ भारत में बल्कि विश्व के कई देशों में प्रसिद्ध है।
उन्होंने पीजीआई के न्यूरोलाजी डिपार्टमेंट की स्थापना की थी। सेक्टर-32 के गवर्नमेंट कालेज की बिल्डिंग निर्माण में उनका अहम रोल रहा। वे मेडिकल कालेज के पहले डायरेक्टर प्रिंसिपल भी रहे थे। उनका जन्म लाहौर में हुआ था। पटियाला के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद वे आगे की पढ़ाई के लिए यूके गए।
उसके बाद वहां से वापस आए और पीजीआई ज्वाइन किया। उनकी मौत की सूचना से पीजीआई के डॉक्टर दुखी हो गए। इस दौरान एक शोक सभा का आयोजन किया गया। इसमें पीजीआई डायरेक्टर प्रो. जगतराम सहित सभी डिपार्टमेंट के एचओडी शामिल रहे।
अनुशासन व समय पाबंद थे
प्रो. जगजीत सिंह की पहचान एक अनुशासन प्रिय और समय पाबंद के तौर पर थी। वे अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं करते थे। उनके साथ काम कर चुके डॉक्टरों ने बताया कि एक बार एक सफाई कर्मी सफाई कर रहा था। वह प्रो. चोपड़ा को दिखा रहा था कि देखिए कितनी सफाई है। प्रो. चोपड़ा कुर्सी पर चढ़ गए और मेज पर पड़ी धूल को दिखाकर बोले, देखो कितनी सफाई है।
चाहे कॉलेज का वार्षिक समारोह हो या कोई सेमिनार हो। हर कार्यक्रम की छोटी से छोटी बातों पर गौर करते थे और खुद ही निगरानी रखते थे। डॉक्टरों को पता चल गया था कि प्रो. चोपड़ा सफाई पसंद भी हैं तो डॉक्टर अपनी मेज और कमरे को साफ रखते थे, लेकिन प्रो. चोपड़ा मानते थे कि जिसकी मेज पर कोई कागज या फाइल नहीं है तो इसका मतलब है कि उसका मन रिसर्च और पढ़ाई में नहीं लगता।
साल 2017 में मिला था पद्म भूषण
डॉ. जेएस चोपड़ा का न्यूरोसाइंस में काफी नाम है। उनके 235 से ज्यादा साइंटिफिक पेपर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जनरल में प्रकाशित हो चुके हैं। साल 2008 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया था। वर्ल्ड फेडरेशन आफ न्यूरोलाजी की ओर से उन्हें लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड दिया गया। वे इंडियन अकेडमी ऑफ न्यूरोलाजी के फाउंडर प्रेसिडेंट भी रहे हैं। उन्हें पाकिस्तान की न्यूरोलॉजिकल सोसाइटी की ओर से भी सम्मानित किया गया था।