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दिव्यांग खिलाड़ियों को मिले समान्य खिलाड़ियों जैसा सम्मान
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चंडीगढ़। अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस पर सेक्टर- 27 स्थित प्रेस क्लब में एक संवाद सत्र आयोजित किया गया। इसका आयोजन उन पैरा एथलीटों के बारे में चर्चा करने के लिए किया गया था, जिन्होंने राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर विभिन्न खेलों में अच्छा प्रदर्शन करते हुए मेडल झटके। इन खिलाड़ियों को अपने खेल के सफर में किन चुनौतियों और कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, इसके बारे में बताया गया। संवाद सत्र सत्र सामाजिक कार्यकर्ता रेणु माथुर और पैरा एथलीट की मां सरोज बिश्नोई की उपस्थिति में आयोजित हुआ। इस दौरान सरोज बिश्नोई ने कहा कि एक मां के रूप में अपने बच्चे को विभिन्न चुनौतियों से गुजरते देखा है। पैरा एथलीटों की अक्सर उपेक्षा की जाती है और उन्हें सामान्य एथलीटों समान दर्जा नहीं दिया जाता है। समाज को इन पैरा एथलीटों का भी सम्मान करना चाहिए।
पैैैरा दिव्यांग एथलीटों में 11 वर्षीय छवि बधिर ने ताइक्वांडो में राष्ट्रीय स्तर पर रजत पदक जीता है। वहीं, जन्म से ही मूक बधिर12 साल के हरप्रीत ने ओपन नेशनल और स्टेट लेवल पर ताइक्वांडो में रजत और कांस्य पदक जीता है। 16 वर्ष की उषा जन्म से नेत्रहीन हैं। खेल की सभी श्रेणियों में बहुत अच्छा प्रदर्शन करती है। उन्होंने राज्य स्तर पर रजत और कांस्य पदक जीता है। जन्म से ही नेत्रहीन सलीम (16 वर्ष) ने एथलेटिक्स में स्प्रिंट दौड़ में राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर रजत और कांस्य पद जीता है। 37 वर्षीय जीतन बिश्नोई मस्तिष्क पक्षाघात के साथ पैदा हुए। इसके बावजूद ताइक्वांडो और स्प्रिंट दौंड में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलीट हैं। इस मौके पर रेणु माथुर ने कहा कि हमें इन पैरा एथलीटों को समान करना चाहिए। पैरा एथलीटों और उनके माता-पिता की इच्छा शक्ति और दृढ़ संकल्प से प्रेरित होना चाहिए।
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पैैैरा दिव्यांग एथलीटों में 11 वर्षीय छवि बधिर ने ताइक्वांडो में राष्ट्रीय स्तर पर रजत पदक जीता है। वहीं, जन्म से ही मूक बधिर12 साल के हरप्रीत ने ओपन नेशनल और स्टेट लेवल पर ताइक्वांडो में रजत और कांस्य पदक जीता है। 16 वर्ष की उषा जन्म से नेत्रहीन हैं। खेल की सभी श्रेणियों में बहुत अच्छा प्रदर्शन करती है। उन्होंने राज्य स्तर पर रजत और कांस्य पदक जीता है। जन्म से ही नेत्रहीन सलीम (16 वर्ष) ने एथलेटिक्स में स्प्रिंट दौड़ में राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर रजत और कांस्य पद जीता है। 37 वर्षीय जीतन बिश्नोई मस्तिष्क पक्षाघात के साथ पैदा हुए। इसके बावजूद ताइक्वांडो और स्प्रिंट दौंड में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलीट हैं। इस मौके पर रेणु माथुर ने कहा कि हमें इन पैरा एथलीटों को समान करना चाहिए। पैरा एथलीटों और उनके माता-पिता की इच्छा शक्ति और दृढ़ संकल्प से प्रेरित होना चाहिए।
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