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पराली प्रबंधन : प्रदेश के 67 गांव रेड और 402 यलो जोन में, जिला व राज्यस्तरीय एक्शन प्लान तैयार

Wed, 17 Jul 2024 05:49 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 17 Jul 2024 05:49 AM IST
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District and state level action plan prepared in 67 villages of the state in red and 402 yellow zones
-जिला, ब्लाॅक और गांव स्तर पर तैनात किए जाएंगे नोडल अधिकारी
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-हरसेक से रखी जाएगी निगरानी, ग्राम सचिव और पटवारी भी रहेंगे

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश सरकार ने साल 2024-25 के लिए पराली प्रबंधन को लेकर अपना एक्शन प्लान तैयार कर लिया है। राज्यस्तरीय और जिला स्तरीय अलग-अलग प्लान तैयार किए गए हैं। इस बार पिछले डाटा के आधार पर प्रदेश के 67 गांवों को रेड और 402 गांवों को यलो जोन में रखा गया है। रेड जोन में सबसे अधिक फतेहाबाद जिले के 33 और जींद के 13 गांव शामिल हैं। इन गांवों में पराली जलाने से रोकने के लिए सरकार ने सख्त निगरानी और जुर्माने का प्रावधान किया है। साथ ही किसानों को जागरूक किया जाएगा। हर बार की तरह हरसेक (हरियाणा अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र) के सैटेलाइट के माध्यम से पराली जलने की घटनाओं पर नजर रखी जाएगी। साथ ही फील्ड में जिला, ब्लाॅक और गांव स्तर पर नोडल अधिकारी तैनात किए जाएंगे। रेड जोन में अतिरिक्त निदेशक और संयुक्त निदेशक स्तर के दो अधिकारियों और यलो जोन में एक अधिकारी की तैनाती की जाएगी।
40.43 लाख टन पराली का प्रबंधन चुनौती
प्रदेश में, 2024 में धान का कुल अनुमानित क्षेत्रफल 38.87 लाख एकड़ है। इससे 81.08 लाख मीट्रिक टन (एमटी) फसल अवशेष उत्पन्न होने की संभावना है। इनमें से बासमती का क्षेत्रफल 19.49 लाख एकड़ और गैर बासमती का क्षेत्रफल 19.38 लाख एकड़ है। इनसे क्रमशः 40.65 लाख मीट्रिक टन और 40.43 लाख मीट्रिक टन फसल अवशेष पैदा होंगे। आमतौर पर किसान बासमती धान की पराली को नहीं जलाता। केवल मोटे धान की पराली को ही जलाता है। ऐसे में सरकार के सामने 40.43 लाख मीट्रिक टन पराली को जलाने से रोकना चुनौती है।
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पिछले आंकड़ों के आधार पर तय होते हैं जोन
हरियाणा अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र द्वारा पिछले साल की एक्टिव फायर लोकेशन के आधार पर जुटाए आंकड़ों के आधार पर कृषि विभाग ने गांवों को रेड और यलो जोन में बांटा है। जिन गांवों में छह या इससे अधिक स्थानों पर पराली जलाई गई, उन्हें रेड जोन में रखा गया है। जिन गांवों में दो से पांच के बीच स्थानों पर पराली जलाई गई, उन्हें यलो जोन में शामिल किया गया है। ग्रीन जोन में 6435 गांवों को रखा गया है, यहां पर पराली जलाने के मामले नहीं हैं।
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2022-23 में किस जिले में कितने गांव रेड व यलो जोन में रहे
रेड जोन यलो जोन
जिला 2022 2023 2022 2023
करनाल 10 2 54 24

कैथल 36 4 107 63

जींद 24 13 72 58

कुरुक्षेत्र 6 2 65 24

फतेहाबाद 49 33 74 76

सिरसा 11 5 56 28

अंबाला 2 1 45 42

हिसार 3 3 22 19

रोहतक 2 2 13 11

पलवल 2 1 9 12
झज्जर 0 1 0 2
यमुनानगर 0 0 30 18
भिवानी 0 0 1 3

पानीपत 1 0 18 3
सोनीपत 1 0 16 16

फरीदाबाद 0 0 0 2
चरखीदादरी 0 0 0 1
गुरुग्राम 0 0 0 0

पंचकूला 0 0 0 0
रेवाड़ी 0 0 0 0
मेवात 0 0 0 0
कुल 147 67 582 402



कोट
पराली प्रबंधन को लेकर प्रदेश सरकार ने पुख्ता प्रबंध किए हैं। हमारा प्रयास है कि किसान पराली को जलाने के बजाय पराली प्रबंधन करके पैसे कमाएं। पराली जलाने से रोकने के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है और निगरानी के लिए मजबूत प्रणाली बनाई गई है।
-कंवरपाल गुर्जर, कृषि मंत्री, हरियाणा सरकार।
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