{"_id":"5ddf747d8ebc3e54e95ec132","slug":"disrespect-of-heritage-furniture-created-by-lee-coubuzier","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"चंडीगढ़ को दुनिया में जिसने दिलाई पहचान, वही यूटी सचिवालय में बना कबाड़, जानिए मामला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चंडीगढ़ को दुनिया में जिसने दिलाई पहचान, वही यूटी सचिवालय में बना कबाड़, जानिए मामला
Thu, 28 Nov 2019 12:48 PM IST
खुशबू गोयल
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 28 Nov 2019 12:48 PM IST
विज्ञापन
हेरिटेज फर्नीचर
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ली कार्बूजिए और पियरे जेनरे निर्मित हेरिटेज फर्नीचर ने चंडीगढ़ को दुनियाभर में नई पहचान दी है। लेकिन अपने ही घर में करोड़ों रुपए की हेरिटेज फर्नीचर की कद्र करने वाला कोई नहीं है। यह बात और भी गंभीर हो जाती है जब यूटी सचिवालय में ही हेरिटेज फर्नीचर को कबाड़ बनाया जा रहा हो। अधिकारियों के नाक तले शहर की धरोहर खराब हो रही है और सभी आंख मूंदे बैठे हैं।
यूटी सचिवालय में शहर के एडवाइजर समेत तमाम अधिकारी बैठते हैं, लेकिन प्रेस रूम के सामने खुले में पड़े हेरिटेज फर्नीचर की तरफ किसी का ध्यान नहीं गया। अगर इधर नजरे इनायत की होती तो शहर के इस धरोहर की ऐसी हालत नहीं होती। जानकारी के अनुसार करोड़ों रुपये का यह हेरिटेज फर्नीचर यहां कई महीनों से फेंका हुआ है।
बीते दिनों शहर की हेरिटेज कमेटी ने दौरा किया और पाया कि खुले में कबाड़ की तरह पड़ा यह फर्नीचर हेरिटेज है। इसे तुरंत बचाने की जरूरत है। हेरिटेज कमेटी ने प्रशासन के अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि वह इनको बचाने के लिए एक शेड का निर्माण करे। यदि यह नहीं कर सकते तो तत्काल तिरपाल ही डाला जाए, ताकि बारिश में खराब होने से इन हेरिटेज फर्नीचर को बचाया जा सके।
विज्ञापन
विज्ञापन
यूटी सचिवालय में शहर के एडवाइजर समेत तमाम अधिकारी बैठते हैं, लेकिन प्रेस रूम के सामने खुले में पड़े हेरिटेज फर्नीचर की तरफ किसी का ध्यान नहीं गया। अगर इधर नजरे इनायत की होती तो शहर के इस धरोहर की ऐसी हालत नहीं होती। जानकारी के अनुसार करोड़ों रुपये का यह हेरिटेज फर्नीचर यहां कई महीनों से फेंका हुआ है।
विज्ञापन
बीते दिनों शहर की हेरिटेज कमेटी ने दौरा किया और पाया कि खुले में कबाड़ की तरह पड़ा यह फर्नीचर हेरिटेज है। इसे तुरंत बचाने की जरूरत है। हेरिटेज कमेटी ने प्रशासन के अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि वह इनको बचाने के लिए एक शेड का निर्माण करे। यदि यह नहीं कर सकते तो तत्काल तिरपाल ही डाला जाए, ताकि बारिश में खराब होने से इन हेरिटेज फर्नीचर को बचाया जा सके।
विज्ञापन
ठोस पॉलिसी बनाने में प्रशासन नाकाम
हेरिटेज फर्नीचर
- फोटो : अमर उजाला
हेरिटेज कमेटी के निर्देश के बावजूद प्रशासन ने हेरिटेज फर्नीचर को बचाने के लिए कुछ नहीं किया। अनदेखी के कारण काफी कुर्सियां और स्टडी टेबल खराब हो चुकी हैं। इस मामले में चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों की लापरवाही पर कोई जवाब तलब करने वाला नहीं है।
बेशकीमती फर्नीचर की सुरक्षा को लेकर यूटी प्रशासन अभी तक कोई ठोस पॉलिसी नहीं बना सका है। अभी तक इसकी सुरक्षा को लेकर हाईटेक चिप लगाने का प्रपोजल सिर्फ कागजों तक सिमटा हुआ है। हेरिटेज फर्नीचर की सुरक्षा को लेकर यूटी प्रशासन ने वैसे तो हेरिटेज प्रोटेक्शन कमेटी का गठन किया है, लेकिन कमेटी की सिफारिशों पर अभी तक कोई काम नहीं हुआ।
लगातार बढ़ रहे चोरी के मामले, पुलिस व प्रशासन फेल
ली कार्बूजिए और पियरे जेनरे द्वारा तैयार 60 फीसदी से अधिक हेरिटेज फर्नीचर पीयू, पेक, गवर्नमेंट होम साइंस कॉलेज सेक्टर- 10, सचिवालय व गवर्नमेंट स्कूलों में है। कई साल से इन हेरिटेज फर्नीचर को चोरी और फिर विदेशों में करोड़ों रुपये में बेचने के मामले सामने आते रहते हैं। वर्ष 2012 में एक विदेशी महिला ने जनरल पोस्ट ऑफिस से हेरिटेज फर्नीचर पार्सल करने की कोशिश की थी।
मार्च 2012 में नया गांव से करीब 150 हेरिटेज आइटम बरामद किए गए थे। 2015 में सेक्टर-19 ली कार्बूजिए सेंटर से 8 कुर्सियां और दो टेबल चोरी हुए। जनवरी 2016 में सेक्टर-10 स्थित गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज से 15 हेरिटेज कुर्सियों के चोरी के मामले सामने आ चुके हैं। इस वर्ष भी पंजाब यूनिवर्सिटी में एक हेरिटेज टेबल को रिक्शे से पीयू से बाहर ले जाने की कोशिश की गई थी, हालांकि गेट पर रिक्शे को रोक लिया गया था।
हेरिटेज फर्नीचर को हैसुरक्षित स्थान पर रखा गया है। इन सभी फर्नीचर को सेक्टर-18 स्थित गवर्नमेंट प्रेस में शिफ्ट किया जाना है क्योंकि वहां पर हेरिटेज फर्नीचर और विटेंज कारों का म्यूजियम बनेगा। लेकिन किसी कारणवश गवर्नमेंट प्रेस के खाली होने में समय लग रहा है। इस मामले को देखा जाएगा।
- कपिल सेतिया, चीफ आर्किटेक्ट
बेशकीमती फर्नीचर की सुरक्षा को लेकर यूटी प्रशासन अभी तक कोई ठोस पॉलिसी नहीं बना सका है। अभी तक इसकी सुरक्षा को लेकर हाईटेक चिप लगाने का प्रपोजल सिर्फ कागजों तक सिमटा हुआ है। हेरिटेज फर्नीचर की सुरक्षा को लेकर यूटी प्रशासन ने वैसे तो हेरिटेज प्रोटेक्शन कमेटी का गठन किया है, लेकिन कमेटी की सिफारिशों पर अभी तक कोई काम नहीं हुआ।
लगातार बढ़ रहे चोरी के मामले, पुलिस व प्रशासन फेल
ली कार्बूजिए और पियरे जेनरे द्वारा तैयार 60 फीसदी से अधिक हेरिटेज फर्नीचर पीयू, पेक, गवर्नमेंट होम साइंस कॉलेज सेक्टर- 10, सचिवालय व गवर्नमेंट स्कूलों में है। कई साल से इन हेरिटेज फर्नीचर को चोरी और फिर विदेशों में करोड़ों रुपये में बेचने के मामले सामने आते रहते हैं। वर्ष 2012 में एक विदेशी महिला ने जनरल पोस्ट ऑफिस से हेरिटेज फर्नीचर पार्सल करने की कोशिश की थी।
मार्च 2012 में नया गांव से करीब 150 हेरिटेज आइटम बरामद किए गए थे। 2015 में सेक्टर-19 ली कार्बूजिए सेंटर से 8 कुर्सियां और दो टेबल चोरी हुए। जनवरी 2016 में सेक्टर-10 स्थित गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज से 15 हेरिटेज कुर्सियों के चोरी के मामले सामने आ चुके हैं। इस वर्ष भी पंजाब यूनिवर्सिटी में एक हेरिटेज टेबल को रिक्शे से पीयू से बाहर ले जाने की कोशिश की गई थी, हालांकि गेट पर रिक्शे को रोक लिया गया था।
हेरिटेज फर्नीचर को हैसुरक्षित स्थान पर रखा गया है। इन सभी फर्नीचर को सेक्टर-18 स्थित गवर्नमेंट प्रेस में शिफ्ट किया जाना है क्योंकि वहां पर हेरिटेज फर्नीचर और विटेंज कारों का म्यूजियम बनेगा। लेकिन किसी कारणवश गवर्नमेंट प्रेस के खाली होने में समय लग रहा है। इस मामले को देखा जाएगा।
- कपिल सेतिया, चीफ आर्किटेक्ट