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Chandigarh News: निदेशक और विभाग प्रमुख का विवाद बच्चों के इलाज में बाधा

Thu, 31 Aug 2023 02:09 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 31 Aug 2023 02:09 AM IST
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Dispute between director and department head hinders treatment of children
चंडीगढ़। पीजीआई में उच्चाधिकारियों के बीच का विवाद मरीजों के इलाज में बाधा पैदा करने लगा है। एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर में जन्मजात हृदयरोगी बच्चों के लिए वरदान आईसीयू अधिकारियों के विवाद का शिकार होने लगा है। जिस यूनिट से उत्तर भारत के गंभीर रूप से बीमार बच्चों की जान बचाई जा रही है, उसे ध्वस्त करने के लिए एक के बाद एक आदेश जारी किए जा रहे हैं। उधर, इस मामले पर पीजीआई प्रशासन खुलकर बोलने से कतरा रहा है लेकिन कागजों में यूनिट को अस्त-व्यस्त करने की तैयारी चल रही है। गौरतलब है कि पीजीआई में डीन एकेडमिक के चार्ज में वरिष्ठता सूची की अनदेखी को लेकर एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर के प्रमुख और पीजीआई निदेशक के बीच विवाद गहरा गया है। यह मामला केंद्र सरकार तक जा पहुंचा है।उत्तर भारत में जन्मजात हृदयरोगी बच्चों के इलाज की कोई सुविधा न होने से पीजीआई में 2021 अक्तूबर में इस यूनिट की शुरुआत की गई थी। 10 बेड वाले इस यूनिट को 4सी वार्ड में ही जगह चिह्नित कर बनाया गया है, जहां 2021 से अब तक जन्मजात हृदयरोग के लगभग 900 बच्चों की जान बचाई जा चुकी है। प्रतिवर्ष यहां 270 से 280 बच्चे भर्ती किए जा रहे हैं। अब विवाद के कारण यूनिट के संचालन पर मंडराते खतरे से बच्चों का इलाज एक बार फिर बाधित होने की आशंका बढ़ने लगी है।
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आईसीयू को जनरल वार्ड से जोड़ने का आदेश
पीजीआई प्रशासन के निर्देश पर 2021 में जिस 4सी वार्ड में एक दीवार खड़ी कर इस आईसीयू की स्थापना की गई थी, उसे तोड़ने का आदेश जारी कर दिया गया है। पीजीआई प्रशासन ने 28 अगस्त को जारी आदेश में अग्नि सुरक्षा के मानकों के पालन न होने का हवाला दिया है। हैरानी की बात यह है कि प्रशासन को निर्माण के दौरान इन मानकों की याद नहीं आई। अब मानकों का हवाला देकर यूनिट को बंद कराने की योजना बनाई जा रही है।
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स्टाफ को भी यहां से वहां भेजा रहा
पीजीआई प्रशासन ने आईसीयू की प्रभारी नर्सिंग अधिकारी को भी वहां से हटाने का आदेश जारी कर दिया है। इस संबंध में 10 अगस्त को जारी आदेश में प्रभारी नर्सिंग अधिकारी को यूनिट की जगह 4सी वार्ड में तैनात कर्मचारियों के सुपरविजन की जिम्मेदारी दे दी गई है। इन आदेशों पर पीजीआई के ही फैकल्टी और डॉक्टरों का कहना है आपसी विवाद के कारण एक बेहतर व्यवस्था को तहस-नहस किया जा रहा है।
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उस दीवार के कारण वहां पर फायर सिस्टम पूरी तरह से ब्लाक हो गया है। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दीवार को तोड़ने का निर्णय लिया गया है क्योंकि वहां पर वेंटिलेटर व अन्य इलेक्ट्रिकरण उपकरण स्थापित हैं, जो काफी ऊर्जा उत्सर्जित करते हैं। यह कभी भी खतरनाक साबित हो सकती है। ऐसे में मानकों का सख्ती से पालन नहीं हो सकता। -प्रो. विवेक लाल, निदेशक पीजीआई

आईसीयू के लिए ऑपरेशन थिएटर जैसे मानकों का पालन किया जाता है। वहां एक नहीं दो दरवाजे होने चाहिए ताकि बाहर की जरा सी भी हवा अंदर न जाए। आईसीयू के अंदर एएचयू होते हैं, जो पूरी तरह अलग होना चाहिए क्योंकि इसमें हेपा फिल्टर लगे होते हैं। जो एसी से निकलने वाली हवा को भी फिल्टर करते हैं ताकि संक्रमण की कोई गुंजाइश न रहे। इसे जनरल वार्ड से किसी भी स्तर पर जोड़ा गया तो वहां भर्ती बच्चों को संक्रमण से बचाना मुश्किल होगा। उन बच्चों को हॉस्पिटल एक्वायर्ड इंफेक्शन तेजी से चपेट में लेती है क्योंकि उन पर एंटीबायोटिक रजिस्टेंस होता है। -डॉ. आरएस बेदी, बालरोग विशेषज्ञ व आईएमए के पूर्व अध्यक्ष
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