{"_id":"5f7425680e7ba15801103df2","slug":"discussion-with-farmers-on-agriculture-act-impact-and-side-effects","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"किसान बोले- बिना पूछे ही बना दिया कानून ‘भूख मौत से बुरी है... इसे मिटाने वाले को न मिटाएं’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसान बोले- बिना पूछे ही बना दिया कानून ‘भूख मौत से बुरी है... इसे मिटाने वाले को न मिटाएं’
Wed, 30 Sep 2020 11:58 AM IST
खुशबू गोयल
नीरज कुमार, चंडीगढ़
नीरज कुमार, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 30 Sep 2020 11:58 AM IST
विज्ञापन
साधु सिंह, गुरबचन सिंह
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फरीदां भूख तों मौत बुरी, राती सुत्ता खाके सुबह फेर खड़ी। बाबा फरीद की इस पंक्ति से चंडीगढ़ के किसानों ने कृषि कानून पर पर चर्चा शुरू की। किसानों ने अमर उजाला से बात करते हुए कही कि भूख मौत से भी बुरी है। भूख किसान मिटाता है, खेतों में अन्न उगाकर। लेकिन अब केंद्र की सरकार किसानों से ही नाइंसाफी करने लगी है। इस कानून से किसान नहीं बचेगा।
उन्होंने कहा कि जब किसान नहीं बचेगा तो हिंदुस्तान भी नहीं बचेगा क्योंकि देश की सीमा पर किसान के ही बच्चे खड़े हैं। जब किसान बर्बाद हो जाएगा तो सीमा पर कौन जाएगा। किसानों का कहना है कि कोई बड़ा औद्योगिक घराने का बेटा सीमा पर नहीं है। इसलिए किसानों को बर्बाद न करो, नहीं तो सब बर्बाद हो जाएंगे। जब किसानों को अपनी स्थानीय मंडियों में पहुंचना मुश्किल है तो वे दूसरे राज्यों में अपनी उपज किस प्रकार लेकर जाएंगे।
यह कहना है चंडीगढ़ के गांव के किसानों का
कृषि कानून से सिर्फ किसानों को ही नहीं उपभोक्ता यानी खाने वाले उनको भी घाटा होगा। यह कानून बिना किसानों के सलाह से बनाया है। सारे देश के किसान इससे प्रभावित होंगे। किसान आंदोलन न करे तो क्या करे क्योंकि यह उसके अस्तित्व की लड़ाई है।
विज्ञापन
- साधु सिंह, सारंगपुर
अब तो कंपनियों पर निर्भर रह जाएंगे
किसान नहीं बचेंगे। कंपनियों पर निर्भर रह जाएंगे। सरकार कहती है कि भंडारण पर रोक नहीं है। किसानों के पास जो घर है, उसमें वह परिवार रखे या अनाज। इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि सरकार किसके साथ है। एक एकड़ खेती वाला अनाज कहां बेचेगा।
- भूपिंदर नाथ, सारंगपुर
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि जब किसान नहीं बचेगा तो हिंदुस्तान भी नहीं बचेगा क्योंकि देश की सीमा पर किसान के ही बच्चे खड़े हैं। जब किसान बर्बाद हो जाएगा तो सीमा पर कौन जाएगा। किसानों का कहना है कि कोई बड़ा औद्योगिक घराने का बेटा सीमा पर नहीं है। इसलिए किसानों को बर्बाद न करो, नहीं तो सब बर्बाद हो जाएंगे। जब किसानों को अपनी स्थानीय मंडियों में पहुंचना मुश्किल है तो वे दूसरे राज्यों में अपनी उपज किस प्रकार लेकर जाएंगे।
विज्ञापन
यह कहना है चंडीगढ़ के गांव के किसानों का
कृषि कानून से सिर्फ किसानों को ही नहीं उपभोक्ता यानी खाने वाले उनको भी घाटा होगा। यह कानून बिना किसानों के सलाह से बनाया है। सारे देश के किसान इससे प्रभावित होंगे। किसान आंदोलन न करे तो क्या करे क्योंकि यह उसके अस्तित्व की लड़ाई है।
विज्ञापन
- साधु सिंह, सारंगपुर
अब तो कंपनियों पर निर्भर रह जाएंगे
किसान नहीं बचेंगे। कंपनियों पर निर्भर रह जाएंगे। सरकार कहती है कि भंडारण पर रोक नहीं है। किसानों के पास जो घर है, उसमें वह परिवार रखे या अनाज। इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि सरकार किसके साथ है। एक एकड़ खेती वाला अनाज कहां बेचेगा।
- भूपिंदर नाथ, सारंगपुर
एक कानून बना दो- एमएसपी से कम पर खरीदा तो होगी कार्रवाई
सरकार यह कानून बना दे कि यदि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम पर खरीद करने वाले पर कार्रवाई होगी, लेकिन ऐसा भी नहीं हो रहा है। मक्की एमएसपी पर नहीं बिक रही है, क्या सरकार को नहीं पता। यदि नहीं पता तो फिर क्या पता है।
- गुरचरण सिंह, सारंगपुर
किसानों के हितों का है नुकसान
यह कृषि कानून किसानों के हित में नहीं है। जल्दबाजी में केंद्र सरकार ने बिना किसानों से पूछे ही अपने कुछ लोगों के लाभ के लिए इसे बनाया है। सरकार इसे सुधारे। इस सरकार से बहुत आशा बंधी थी लेकिन धीरे- धीरे खत्म हो रहा है।
- जरनैल सिंह, निवासी गांव रायपुरखुर्द
बड़े ठेकेदारों को फायदा होगा
इस कानून से बड़े ठेकेदारों को फायदा होगा। वे मर्जी से अनाज उठाएंगे। इससे किसान परेशानी होंगे। किसान 200 क्विंटल अनाज घर में किस प्रकार रखेगा। उसे मजबूरी में कम दाम पर बेचने पर मजबूर होना पड़ेगा। यह ठीक नहीं है।
- कुलदीप सिंह, निवासी गांव डड्डूमाजरा
- गुरचरण सिंह, सारंगपुर
किसानों के हितों का है नुकसान
यह कृषि कानून किसानों के हित में नहीं है। जल्दबाजी में केंद्र सरकार ने बिना किसानों से पूछे ही अपने कुछ लोगों के लाभ के लिए इसे बनाया है। सरकार इसे सुधारे। इस सरकार से बहुत आशा बंधी थी लेकिन धीरे- धीरे खत्म हो रहा है।
- जरनैल सिंह, निवासी गांव रायपुरखुर्द
बड़े ठेकेदारों को फायदा होगा
इस कानून से बड़े ठेकेदारों को फायदा होगा। वे मर्जी से अनाज उठाएंगे। इससे किसान परेशानी होंगे। किसान 200 क्विंटल अनाज घर में किस प्रकार रखेगा। उसे मजबूरी में कम दाम पर बेचने पर मजबूर होना पड़ेगा। यह ठीक नहीं है।
- कुलदीप सिंह, निवासी गांव डड्डूमाजरा
एमएसपी पर अनाज नहीं बिकेगा तो स्थिति भयावह होगी
न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर यदि अनाज नहीं बिकेगा तो किसानों की स्थिति भयावह होगी। पैसे की जरूरत पड़ती थी तो आढ़ती से लेते थे. लेकिन अब यह सब नहीं रहेगा तो हमारा काम किस प्रकार चलेगा। किसानों के पास गोदाम भी तो नहीं हैं।
- गुरबचन सिंह, सारंगपुर
आने वाला समय बहुत ही कठिन
यह कानून पूंजीपतियों के साथ केंद्र सरकार की डील है। इस प्रकार से तो किसान गुलाम हो जाएंगे। धीरे-धीरे उनका जमीन भी चली जाएगी। किसान जमीन को मां मानता है। इससे किसानों का बड़ा नुकसान है। किसानों के लिए भयावह समय आने वाला है।
- गुरदयाल सिंह, मस्तगढ़
किसानों की बात कोई नहीं सुन रही केंद्र सरकार
केंद्र सरकार ने किसानों की बातों को नहीं सुना। जब भुखमरी थी तो अनाज का उत्पादन बढ़ाने के लिए कृषि विश्वविद्यालय बनाए। नई तकनीक से अनाज की उपज बढ़ी। पूरा देश का पेट भरा और अब अनाज का उत्पादन अधिक है।
- कुलदीप, निवासी गांव कैंबवाला
- गुरबचन सिंह, सारंगपुर
आने वाला समय बहुत ही कठिन
यह कानून पूंजीपतियों के साथ केंद्र सरकार की डील है। इस प्रकार से तो किसान गुलाम हो जाएंगे। धीरे-धीरे उनका जमीन भी चली जाएगी। किसान जमीन को मां मानता है। इससे किसानों का बड़ा नुकसान है। किसानों के लिए भयावह समय आने वाला है।
- गुरदयाल सिंह, मस्तगढ़
किसानों की बात कोई नहीं सुन रही केंद्र सरकार
केंद्र सरकार ने किसानों की बातों को नहीं सुना। जब भुखमरी थी तो अनाज का उत्पादन बढ़ाने के लिए कृषि विश्वविद्यालय बनाए। नई तकनीक से अनाज की उपज बढ़ी। पूरा देश का पेट भरा और अब अनाज का उत्पादन अधिक है।
- कुलदीप, निवासी गांव कैंबवाला