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रिश्वत केसः डीआईजी ने जसविंदर कौर के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने से किया इनकार
Wed, 05 Aug 2020 02:32 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Wed, 05 Aug 2020 02:32 PM IST
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दो लाख रुपये की रिश्वत मामले में चंडीगढ़ पुलिस के डीआईजी ने इंस्पेक्टर जसविंदर कौर के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने से मना कर दिया है। उन्होंने कहा है कि मामले में कोई नया सबूत सामने नहीं आया है। उनका कहना है कि सीबीआई की तरफ से इंस्पेक्टर जसविंदर कौर की मामले में संलिप्तता साबित करने के लिए कोई भी ठोस सबूत नहीं रखा गया है। इस कारण भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 के तहत उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी नहीं दी जा सकती।
डीआईजी ने कहा कि सीबीआई द्वारा दिए गए सारे रिकॉर्ड, रिकॉर्डिंग और चार्जशीट की जांच करने के बाद सामने आया है कि मोहन सिंह ने कहीं भी यह बयान नहीं दिया है कि जसविंदर कौर के कहने पर उसने रिश्वत के पैसे लिए थे। जसविंदर कौर के सीधे रिश्वत मांगने से संबंधित कोई भी मौखिक और लिखित सुबूत भी नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता प्रेम सिंह बिष्ट, मोहन सिंह और जसविंदर कौर के बीच रिश्वत या मिलने को लेकर बातचीत का भी कोई सबूत नहीं है।
गिरफ्तारी के बाद सीबीआई के कहने पर भी मोहन सिंह ने इंस्पेक्टर जसविंदर कौर से बात करने से मना कर दिया था इसलिए उनकी तरफ से मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अब सीबीआई अदालत बुधवार को इस मामले पर अपना फैसला सुनाएगी। दरअसल, अक्तूबर 2017 में सेक्टर-31 थाने के एसएसओ मोहन सिंह को सीबीआई ने दो लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
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शिकायतकर्ता प्रेम सिंह बिष्ट ने आरोप लगाया था कि हत्या के मामले में उनके तीन कर्मचारियों को छोड़ने के नाम पर मोहन सिंह ने नौ लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि रिश्वत जसविंदर कौर के निर्देश पर मांगी गई थी। मोहन सिंह ने उन्हें कहा था कि नौ लाख में से में से 8 लाख रुपये जसविंदर कौर के हैं। मोहन सिंह की गिरफ्तारी के बाद जसविंदर कौर के खिलाफ सबूत न मिलने के कारण उनके खिलाफ मामला बंद कर दिया गया था।
लेकिन शिकायतकर्ता प्रेम सिंह बिष्ट ने फरवरी 2020 में सीबीआई अदालत में याचिका दायर कर जसविंदर कौर को मामले में आरोपी बनाने की मांग की थी। इस याचिका पर अदालत ने चंडीगढ़ डीआईजी को इंस्पेक्टर जसविंदर कौर के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने पर जवाब दायर करने के निर्देश दिए थे। बता दें कि मनीमाजरा की पूर्व एसएचओ जसविंदर कौर पांच लाख रुपये की रिश्वत के मामले में फिलहाल जेल में हैं। कुछ समय पहले ही उन्होंने इस केस में सरेंडर किया था, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी की गई थी।
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डीआईजी ने कहा कि सीबीआई द्वारा दिए गए सारे रिकॉर्ड, रिकॉर्डिंग और चार्जशीट की जांच करने के बाद सामने आया है कि मोहन सिंह ने कहीं भी यह बयान नहीं दिया है कि जसविंदर कौर के कहने पर उसने रिश्वत के पैसे लिए थे। जसविंदर कौर के सीधे रिश्वत मांगने से संबंधित कोई भी मौखिक और लिखित सुबूत भी नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता प्रेम सिंह बिष्ट, मोहन सिंह और जसविंदर कौर के बीच रिश्वत या मिलने को लेकर बातचीत का भी कोई सबूत नहीं है।
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गिरफ्तारी के बाद सीबीआई के कहने पर भी मोहन सिंह ने इंस्पेक्टर जसविंदर कौर से बात करने से मना कर दिया था इसलिए उनकी तरफ से मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अब सीबीआई अदालत बुधवार को इस मामले पर अपना फैसला सुनाएगी। दरअसल, अक्तूबर 2017 में सेक्टर-31 थाने के एसएसओ मोहन सिंह को सीबीआई ने दो लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
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शिकायतकर्ता प्रेम सिंह बिष्ट ने आरोप लगाया था कि हत्या के मामले में उनके तीन कर्मचारियों को छोड़ने के नाम पर मोहन सिंह ने नौ लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि रिश्वत जसविंदर कौर के निर्देश पर मांगी गई थी। मोहन सिंह ने उन्हें कहा था कि नौ लाख में से में से 8 लाख रुपये जसविंदर कौर के हैं। मोहन सिंह की गिरफ्तारी के बाद जसविंदर कौर के खिलाफ सबूत न मिलने के कारण उनके खिलाफ मामला बंद कर दिया गया था।
लेकिन शिकायतकर्ता प्रेम सिंह बिष्ट ने फरवरी 2020 में सीबीआई अदालत में याचिका दायर कर जसविंदर कौर को मामले में आरोपी बनाने की मांग की थी। इस याचिका पर अदालत ने चंडीगढ़ डीआईजी को इंस्पेक्टर जसविंदर कौर के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने पर जवाब दायर करने के निर्देश दिए थे। बता दें कि मनीमाजरा की पूर्व एसएचओ जसविंदर कौर पांच लाख रुपये की रिश्वत के मामले में फिलहाल जेल में हैं। कुछ समय पहले ही उन्होंने इस केस में सरेंडर किया था, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी की गई थी।